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बारिश में धुल गया प्रदूषण, हवा हुई साफ
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फरीदाबाद। बारिश और तेज हवाओं ने सोमवार को फरीदाबाद की हवा साफ कर दी। 24 घंटे में जिले की वायु गुणवत्ता में 228 अंकों का भारी सुधार आया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी सूची में फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 186 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रिकॉर्ड किया गया। बल्लभगढ़ में एक्यूआई का स्तर 95 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया है।
पिछले कई दिनों से शहर में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा हुआ था। दिवाली पर पटाखे जलाने से प्रदूषण गंभीर श्रेणी में पहुंच गया था। रविवार को फरीदाबाद में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 414 और बल्लभगढ़ में 244 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पहुंच गया था। शाम को हुई बूंदाबांदी के बाद सोमवार को प्रदूषण का स्तर काफी कम हो गया है।
सोमवार को शाम चार बजे तक फरीदाबाद का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 186 और बल्लभगढ़ का 95 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज हुआ। क्षेत्रों के हिसाब से एनआईटी क्षेत्र में हवा अभी भी खतरनाक श्रेणी में बनी हुई है। सेक्टर-11 में 129, सेक्टर-30 में 153 और सेक्टर-16 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया। इसे बेहद साफ बताया गया है। लोगों ने लंबे समय बाद एक बार फिर शुद्ध हवा में सांस ली।
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वर्जन
बारिश होने से धूल के कण जमीन पर आ गए हैं, जिससे प्रदूषण कम हो गया है। अगर हवा चलती रहे, तो प्रदूषण का स्तर कम ही बना रहेगा। विभाग की टीम भी बढ़ते स्तर पर नजर बनाए हुए है।
- दिनेश कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी
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पिछले कई दिनों से शहर में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा हुआ था। दिवाली पर पटाखे जलाने से प्रदूषण गंभीर श्रेणी में पहुंच गया था। रविवार को फरीदाबाद में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 414 और बल्लभगढ़ में 244 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पहुंच गया था। शाम को हुई बूंदाबांदी के बाद सोमवार को प्रदूषण का स्तर काफी कम हो गया है।
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सोमवार को शाम चार बजे तक फरीदाबाद का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 186 और बल्लभगढ़ का 95 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज हुआ। क्षेत्रों के हिसाब से एनआईटी क्षेत्र में हवा अभी भी खतरनाक श्रेणी में बनी हुई है। सेक्टर-11 में 129, सेक्टर-30 में 153 और सेक्टर-16 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया। इसे बेहद साफ बताया गया है। लोगों ने लंबे समय बाद एक बार फिर शुद्ध हवा में सांस ली।
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बारिश होने से धूल के कण जमीन पर आ गए हैं, जिससे प्रदूषण कम हो गया है। अगर हवा चलती रहे, तो प्रदूषण का स्तर कम ही बना रहेगा। विभाग की टीम भी बढ़ते स्तर पर नजर बनाए हुए है।
- दिनेश कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी