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Faridabad News: 12 वर्षों में पॉक्सो के मामलों में 4500 से अधिक शिकायतें और एफआईआर की गईं दर्ज
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जिला बाल संरक्षण इकाई के आंकड़े बच्चों के खिलाफ अपराध की गंभीर स्थिति को कर रहे उजागर
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। एनआईटी-1 स्थित जिला बाल संरक्षण इकाई के आंकड़े बच्चों के खिलाफ अपराध की गंभीर स्थिति को उजागर करते हैं। विभाग में पिछले 12 वर्षों में 4,500 से अधिक पॉक्सो के मामलों में शिकायतें और एफआईआर दर्ज की गईं हैं।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी गरिमा सिंह तोमर ने बताया कि इन मामलों में नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न जैसी घटनाएं शामिल हैं। अधिकतर पीड़ित बच्चे कमजोर मानसिक स्थिति, आर्थिक तंगी या असुरक्षित माहौल में पाए गए हैं। कई मामलों में बच्चे सड़कों, रेड लाइट पर भीख मांगते या मजदूरी स्थलों पर भटकते मिले, जिन्हें सुरक्षित आश्रय और देखभाल के लिए विभाग ने संरक्षण में लिया।
सबसे भयावह घटनाओं में ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें छह महीने के शिशु के साथ दुष्कर्म जैसी क्रूर वारदात हुई। इन मामलों में विभाग न केवल कानूनी कार्रवाई करवाता है बल्कि पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाने के लिए कोर्ट में लगातार पैरवी भी करता है।
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गरिमा सिंह ने बताया कि चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 इन मामलों में तुरंत कार्रवाई के लिए हमेशा सक्रिय रहता है। किसी भी सूचना पर टीम मौके पर पहुंचकर बच्चे को सुरक्षित स्थान पर ले जाती है और आवश्यक चिकित्सा व मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराती है। इसके अलावा एनआईटी-1 में स्थित बाल भवन में भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि यदि किसी बच्चे के साथ शोषण की आशंका हो तो तुरंत बाल संरक्षण विभाग या हेल्पलाइन पर सूचित करें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। एनआईटी-1 स्थित जिला बाल संरक्षण इकाई के आंकड़े बच्चों के खिलाफ अपराध की गंभीर स्थिति को उजागर करते हैं। विभाग में पिछले 12 वर्षों में 4,500 से अधिक पॉक्सो के मामलों में शिकायतें और एफआईआर दर्ज की गईं हैं।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी गरिमा सिंह तोमर ने बताया कि इन मामलों में नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न जैसी घटनाएं शामिल हैं। अधिकतर पीड़ित बच्चे कमजोर मानसिक स्थिति, आर्थिक तंगी या असुरक्षित माहौल में पाए गए हैं। कई मामलों में बच्चे सड़कों, रेड लाइट पर भीख मांगते या मजदूरी स्थलों पर भटकते मिले, जिन्हें सुरक्षित आश्रय और देखभाल के लिए विभाग ने संरक्षण में लिया।
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सबसे भयावह घटनाओं में ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें छह महीने के शिशु के साथ दुष्कर्म जैसी क्रूर वारदात हुई। इन मामलों में विभाग न केवल कानूनी कार्रवाई करवाता है बल्कि पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाने के लिए कोर्ट में लगातार पैरवी भी करता है।
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गरिमा सिंह ने बताया कि चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 इन मामलों में तुरंत कार्रवाई के लिए हमेशा सक्रिय रहता है। किसी भी सूचना पर टीम मौके पर पहुंचकर बच्चे को सुरक्षित स्थान पर ले जाती है और आवश्यक चिकित्सा व मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराती है। इसके अलावा एनआईटी-1 में स्थित बाल भवन में भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि यदि किसी बच्चे के साथ शोषण की आशंका हो तो तुरंत बाल संरक्षण विभाग या हेल्पलाइन पर सूचित करें।