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Faridabad News: मिलावटी मिठाई को लेकर एसडीएम फरीदाबाद को सौंपा ज्ञापन
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हर जिले में मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब शुरू की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने मिठाई, दूध, खोया, पनीर में मिलावट रोकने के लिए बृहस्पतिवार को एसडीएम अमित कुमार को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष प्रदीप बंसल व जिलाध्यक्ष अजय कुमार भाटिया ने मांग की है कि त्योहारों के समय मिठाई, दूध, पनीर, खोया व उससे बने उत्पादों में अत्यधिक मिलावट की शिकायत देखने को मिलती है।
फलों को चमकाने के लिए मोम, केमिकल युक्त रंग व शीघ्र पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे विषैले रसायनों का प्रयोग धड़ल्ले से किया जाता है। इनके प्रयोग से शरीर में बहुत-सी बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं। इसको रोकने के लिए विशेष चैकिंग अभियान चलाया जाए। वर्ष भर इस तरह के चैकिंग अभियान चलाए जाने चाहिए। सैंपल को चेक करने के लिए दूर दराज की लैब में भेजा जाता है। उसकी रिपोर्ट कई महीनों के बाद मिलती है। सैंपल फेल होने की स्थिति में उसका कोई औचित्य नहीं रह जाता है, क्योंकि तब तक वह वस्तु उपयोग हो चुकी होती है।
उन्होंने मांग की है कि हर जिले में मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब शुरू की जाए, जिससे कि शीघ्र ही रिपोर्ट तैयार हो जाए और सैंपल फेल होने पर उस वस्तु के स्टॉक को तुरंत नष्ट किया जा सके। दोषी उत्पादकों व विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। ग्राहकों को जागरूक करने के लिए भी समय समय पर अभियान चलाया जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने मिठाई, दूध, खोया, पनीर में मिलावट रोकने के लिए बृहस्पतिवार को एसडीएम अमित कुमार को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष प्रदीप बंसल व जिलाध्यक्ष अजय कुमार भाटिया ने मांग की है कि त्योहारों के समय मिठाई, दूध, पनीर, खोया व उससे बने उत्पादों में अत्यधिक मिलावट की शिकायत देखने को मिलती है।
फलों को चमकाने के लिए मोम, केमिकल युक्त रंग व शीघ्र पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे विषैले रसायनों का प्रयोग धड़ल्ले से किया जाता है। इनके प्रयोग से शरीर में बहुत-सी बीमारियां उत्पन्न हो जाती हैं। इसको रोकने के लिए विशेष चैकिंग अभियान चलाया जाए। वर्ष भर इस तरह के चैकिंग अभियान चलाए जाने चाहिए। सैंपल को चेक करने के लिए दूर दराज की लैब में भेजा जाता है। उसकी रिपोर्ट कई महीनों के बाद मिलती है। सैंपल फेल होने की स्थिति में उसका कोई औचित्य नहीं रह जाता है, क्योंकि तब तक वह वस्तु उपयोग हो चुकी होती है।
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उन्होंने मांग की है कि हर जिले में मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब शुरू की जाए, जिससे कि शीघ्र ही रिपोर्ट तैयार हो जाए और सैंपल फेल होने पर उस वस्तु के स्टॉक को तुरंत नष्ट किया जा सके। दोषी उत्पादकों व विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। ग्राहकों को जागरूक करने के लिए भी समय समय पर अभियान चलाया जाए।
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