{"_id":"6a8b2891b9c3d9e9a30db8a2","slug":"lower-courts-order-set-aside-directions-issued-to-return-the-vehicle-to-the-company-faridabad-news-c-26-1-fbd1023-78187-2026-08-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: निचली अदालत का आदेश रद्द कर कंपनी को वाहन वापस करने के दिए निर्देश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: निचली अदालत का आदेश रद्द कर कंपनी को वाहन वापस करने के दिए निर्देश
विज्ञापन
फरीदाबाद। महज 34,556 रुपये की बकाया राशि के कारण करीब 23.64 लाख रुपये का कमर्शियल वाहन कब्जे में लेने पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज को झटका दिया है। अदालत ने निचली अदालत का 28 जुलाई का आदेश रद्द करते हुए कंपनी को वाहन वापस करने के निर्देश जारी किए हैं।
पलवल निवासी दिनेश कुमार ने सितंबर 2024 में 5 साल की अवधि के लिए 23.64 लाख रुपये का ऋण लेकर ट्रक खरीदा था, जिसकी मासिक किस्त 51,720 रुपये थी। पीड़ित नियमित रूप से किस्तों का भुगतान कर रहा था और 13 जून 2026 तक केवल 33,556 रुपये ही बकाया थे। इसके बावजूद, 29 जून को फरीदाबाद से चेन्नई जाते समय एमपी के धार जिले में कंपनी ने रास्ते में वाहन को कब्जे में ले लिया। अदालत ने पाया कि ऋण समझौते की धारा 14 के तहत गाड़ी जब्त करने से पहले 7 दिन का पूर्व नोटिस देना अनिवार्य था, जबकि कंपनी 10 मार्च का नोटिस दिनेश को मिलने का कोई सबूत पेश नहीं कर सकी। इसके अलावा, दिनेश द्वारा गारंटर बनने वाले दूसरे व्यक्ति के लोन में चूक का हवाला देकर उसका वाहन जब्त करने को भी कोर्ट ने गलत ठहराया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि वाहन खड़ा रहने से उसकी हालत खराब होगी और पीड़ित की आजीविका प्रभावित होगी। संवाद
विज्ञापन
पलवल निवासी दिनेश कुमार ने सितंबर 2024 में 5 साल की अवधि के लिए 23.64 लाख रुपये का ऋण लेकर ट्रक खरीदा था, जिसकी मासिक किस्त 51,720 रुपये थी। पीड़ित नियमित रूप से किस्तों का भुगतान कर रहा था और 13 जून 2026 तक केवल 33,556 रुपये ही बकाया थे। इसके बावजूद, 29 जून को फरीदाबाद से चेन्नई जाते समय एमपी के धार जिले में कंपनी ने रास्ते में वाहन को कब्जे में ले लिया। अदालत ने पाया कि ऋण समझौते की धारा 14 के तहत गाड़ी जब्त करने से पहले 7 दिन का पूर्व नोटिस देना अनिवार्य था, जबकि कंपनी 10 मार्च का नोटिस दिनेश को मिलने का कोई सबूत पेश नहीं कर सकी। इसके अलावा, दिनेश द्वारा गारंटर बनने वाले दूसरे व्यक्ति के लोन में चूक का हवाला देकर उसका वाहन जब्त करने को भी कोर्ट ने गलत ठहराया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि वाहन खड़ा रहने से उसकी हालत खराब होगी और पीड़ित की आजीविका प्रभावित होगी। संवाद
विज्ञापन