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बच्चों की सुरक्षा के लिए कानून की जानकारी जरूरी : डीएलएसए
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कानूनी सहायता के बारे में विद्यार्थियों को दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से मंगलवार को राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सराय ख्वाजा में बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम के प्रति जागरूक करने के लिए शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश फरीदाबाद सुधीर जीवन के मार्गदर्शन तथा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं डीएलएसए सचिव जितेंद्र सिंह की देखरेख में हुआ।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जितेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम के उद्देश्य और इसके तहत आने वाले विभिन्न अपराधों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कानून बच्चों को यौन शोषण और लैंगिक अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने अधिनियम में निर्धारित विभिन्न दंड प्रावधानों के बारे में भी विद्यार्थियों को बताया। उन्होंने अनिवार्य रिपोर्टिंग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार के लैंगिक अपराध या दुर्व्यवहार की जानकारी मिलने पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना देना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पॉक्सो के तहत बच्चे की सहमति को कानूनी सहमति नहीं माना जाता है। कानून का उद्देश्य बच्चों को शोषण और यौन अपराधों से संरक्षण देना है। शिविर में पैनल अधिवक्ता ने विद्यार्थियों और स्कूल स्टाफ को बच्चों के कानूनी अधिकारों, अपराध की सूचना देने की प्रक्रिया तथा पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को उपलब्ध कानूनी सहायता की जानकारी दी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से मंगलवार को राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सराय ख्वाजा में बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम के प्रति जागरूक करने के लिए शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश फरीदाबाद सुधीर जीवन के मार्गदर्शन तथा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं डीएलएसए सचिव जितेंद्र सिंह की देखरेख में हुआ।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जितेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम के उद्देश्य और इसके तहत आने वाले विभिन्न अपराधों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कानून बच्चों को यौन शोषण और लैंगिक अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने अधिनियम में निर्धारित विभिन्न दंड प्रावधानों के बारे में भी विद्यार्थियों को बताया। उन्होंने अनिवार्य रिपोर्टिंग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार के लैंगिक अपराध या दुर्व्यवहार की जानकारी मिलने पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना देना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पॉक्सो के तहत बच्चे की सहमति को कानूनी सहमति नहीं माना जाता है। कानून का उद्देश्य बच्चों को शोषण और यौन अपराधों से संरक्षण देना है। शिविर में पैनल अधिवक्ता ने विद्यार्थियों और स्कूल स्टाफ को बच्चों के कानूनी अधिकारों, अपराध की सूचना देने की प्रक्रिया तथा पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को उपलब्ध कानूनी सहायता की जानकारी दी।
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