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Faridabad News: आयुष्मान पैनल के अस्पतालों में एबीडीएम सॉफ्टवेयर अनिवार्य करने से आईएमए नाराज
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भुगतान में देरी के बाद अब सॉफ्टवेयर का अतिरिक्त खर्च बढ़ने से निजी अस्पतालों में रोष
भुगतान नहीं हुआ तो फिर सेवाएं बंद करने की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। आयुष्मान भारत योजना के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) का सॉफ्टवेयर विकसित करना अनिवार्य किए जाने से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) नाराज है। निजी अस्पतालों का कहना है कि आयुष्मान योजना के तहत मरीजों के इलाज का भुगतान पहले ही कई महीनों से लंबित है। अब सॉफ्टवेयर विकसित करने की अनिवार्यता से अस्पतालों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
आयुष्मान योजना के भुगतान में देरी को लेकर निजी अस्पताल पहले भी सरकार के खिलाफ नाराजगी जता चुके हैं। इसी मुद्दे पर निजी अस्पतालों ने एक सितंबर को हड़ताल कर आयुष्मान कार्डधारकों का उपचार नहीं किया था। आईएमए ने चेतावनी दी थी कि यदि 16 सितंबर तक लंबित भुगतान के मामले में सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाया तो आगे भी सेवाएं बंद करने का निर्णय लिया जा सकता है।
अब सरकार की ओर से एबीडीएम सॉफ्टवेयर विकसित करना अनिवार्य किए जाने से अस्पताल संचालकों में नाराजगी बढ़ गई है। निजी अस्पतालों का कहना है कि सरकार ने जुलाई में सॉफ्टवेयर को लेकर नोटिस जारी किया था, लेकिन उसमें इसे लागू करने की कोई अंतिम तारीख नहीं बताई गई थी। अब अचानक एबीडीएम सॉफ्टवेयर विकसित नहीं करने वाले अस्पतालों की एनएबीएच प्रोत्साहन राशि रोक दी गई है।
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अस्पताल संचालकों का कहना है कि सरकार को पहले स्पष्ट अंतिम समय-सीमा देनी चाहिए थी। अचानक प्रोत्साहन राशि रोकने से अस्पतालों की परेशानी बढ़ गई है। उनका कहना है कि सॉफ्टवेयर विकसित करने और उसके संचालन में अतिरिक्त खर्च आएगा। इसके अलावा आयुष्मान कार्डधारक के अस्पताल पहुंचने पर उसके उपचार से संबंधित पूरा ब्योरा सॉफ्टवेयर पर अपलोड करना होगा।
500 निजी अस्पतालों का करीब 1200 करोड़ रुपये भुगतान लंबित
आईएमए के अनुसार प्रदेश के करीब 500 निजी अस्पतालों का आयुष्मान योजना के तहत लगभग 1200 करोड़ रुपये का भुगतान सरकार के पास लंबित है। कुछ समय पहले तक प्रदेश में आयुष्मान योजना के पैनल में करीब 650 निजी अस्पताल शामिल थे। भुगतान में लगातार देरी के कारण कई अस्पताल आर्थिक दबाव में हैं। आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुरेश अरोड़ा का कहना है कि सरकार को पहले लंबित भुगतान का समाधान करना चाहिए। यदि भुगतान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में कई और निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत सेवाएं बंद करने का निर्णय ले सकते हैं।
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भुगतान नहीं हुआ तो फिर सेवाएं बंद करने की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। आयुष्मान भारत योजना के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) का सॉफ्टवेयर विकसित करना अनिवार्य किए जाने से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) नाराज है। निजी अस्पतालों का कहना है कि आयुष्मान योजना के तहत मरीजों के इलाज का भुगतान पहले ही कई महीनों से लंबित है। अब सॉफ्टवेयर विकसित करने की अनिवार्यता से अस्पतालों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
आयुष्मान योजना के भुगतान में देरी को लेकर निजी अस्पताल पहले भी सरकार के खिलाफ नाराजगी जता चुके हैं। इसी मुद्दे पर निजी अस्पतालों ने एक सितंबर को हड़ताल कर आयुष्मान कार्डधारकों का उपचार नहीं किया था। आईएमए ने चेतावनी दी थी कि यदि 16 सितंबर तक लंबित भुगतान के मामले में सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाया तो आगे भी सेवाएं बंद करने का निर्णय लिया जा सकता है।
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अब सरकार की ओर से एबीडीएम सॉफ्टवेयर विकसित करना अनिवार्य किए जाने से अस्पताल संचालकों में नाराजगी बढ़ गई है। निजी अस्पतालों का कहना है कि सरकार ने जुलाई में सॉफ्टवेयर को लेकर नोटिस जारी किया था, लेकिन उसमें इसे लागू करने की कोई अंतिम तारीख नहीं बताई गई थी। अब अचानक एबीडीएम सॉफ्टवेयर विकसित नहीं करने वाले अस्पतालों की एनएबीएच प्रोत्साहन राशि रोक दी गई है।
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अस्पताल संचालकों का कहना है कि सरकार को पहले स्पष्ट अंतिम समय-सीमा देनी चाहिए थी। अचानक प्रोत्साहन राशि रोकने से अस्पतालों की परेशानी बढ़ गई है। उनका कहना है कि सॉफ्टवेयर विकसित करने और उसके संचालन में अतिरिक्त खर्च आएगा। इसके अलावा आयुष्मान कार्डधारक के अस्पताल पहुंचने पर उसके उपचार से संबंधित पूरा ब्योरा सॉफ्टवेयर पर अपलोड करना होगा।
500 निजी अस्पतालों का करीब 1200 करोड़ रुपये भुगतान लंबित
आईएमए के अनुसार प्रदेश के करीब 500 निजी अस्पतालों का आयुष्मान योजना के तहत लगभग 1200 करोड़ रुपये का भुगतान सरकार के पास लंबित है। कुछ समय पहले तक प्रदेश में आयुष्मान योजना के पैनल में करीब 650 निजी अस्पताल शामिल थे। भुगतान में लगातार देरी के कारण कई अस्पताल आर्थिक दबाव में हैं। आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुरेश अरोड़ा का कहना है कि सरकार को पहले लंबित भुगतान का समाधान करना चाहिए। यदि भुगतान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में कई और निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत सेवाएं बंद करने का निर्णय ले सकते हैं।