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Faridabad News: धौलागढ़ में अवैध रूप से चल रहा था नशा मुक्ति केंद्र, संचालक पर केस दर्ज
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- उड़न दस्ते ने की कार्रवाई, 28 मरीजों की मिली लापरवाही
– दवाइयां और रिकॉर्ड जब्त, केंद्र सील
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। मुख्यमंत्री उड़न दस्ता फरीदाबाद की टीम ने सोमवार को धौलागढ़ में एक अवैध नशा मुक्ति केंद्र पर छापेमारी की। यह नशा मुक्ति केंद्र बिना अनुमति के संचालित किया जा रहा था। उड़ान दस्ता टीम को नशा मुक्ति केंद्र में मरीजों की सुरक्षा और उपचार मानकों की उल्लंघन होते मिला। मौके से प्रशासनिक टीम ने बड़ी संख्या में दवाइयां दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए। इसके साथ ही संचालक सतेंद्र के खिलाफ थाना कैंप में एफआईआर दर्ज कराई गई है। मुख्यमंत्री उड़न दस्ता ने अवैध नशा मुक्ति केंद्र को सील कर दिया।
संचालक नहीं दिखा पाया वैध दस्तावेज
जानकारी के अनुसार, सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री उड़न दस्ता ने सिविल अस्पताल पलवल से विशेषज्ञ टीम गठित कराई। संयुक्त दल में उप सिविल सर्जन डॉ. संजय कुमार, ड्रग्स इंस्पेक्टर फरीदाबाद संदीप गहलांन और स्थानीय पुलिस के अधिकारी शामिल थे। टीम ने धौलागढ़ स्थित उक्त केंद्र पर अचानक दबिश दी। निरीक्षण के समय केंद्र संचालक सतेंद्र मौके पर मौजूद मिला। उससे केंद्र संचालन के वैध दस्तावेज, लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और चिकित्सकीय अनुमतियां पेश करने को कहा गया, लेकिन वह कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
नशा मुक्ति केंद्र के तीन कमरों में 28 नशाग्रस्त व्यक्ति को रखा गया था। उपचार की वैज्ञानिक प्रक्रिया, प्रशिक्षित स्टाफ, स्वच्छ भोजन, आपातकालीन व्यवस्था और चिकित्सकीय निगरानी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं का कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं मिला। टीम ने मौके से 15 तरह की अंग्रेजी (एलोपैथिक) दवाइयां बरामद की। लेकिन दवाइयों के बिल, खरीद रसीदें और किसी पंजीकृत डॉक्टर की विधिवत प्रिस्क्रिप्शन उपलब्ध नहीं कराई गई। यह स्थिति ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट समेत संबंधित स्वास्थ्य नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
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कैप पुलिस ने दर्ज किया केस
जांच के दौरान संयुक्त टीम ने केंद्र से एक एडमिशन रजिस्टर, एक हाजरी रजिस्टर और 33 लाभार्थियों की फाइलें अपने कब्जे में लीं। रिकॉर्ड में अनेक एंट्रियों का सत्यापन संदिग्ध पाया गया तथा मरीजों की सहमति, परिजन की जानकारी, उपचार योजना, दवा-डोज और फॉलो-अप संबंधी विवरण अधूरे या अनुपस्थित दिखे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, नशा मुक्ति केंद्र चलाने के लिए निर्धारित लाइसेंस, प्रशिक्षित काउंसलर, रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर, 24x7 आपातकालीन व्यवस्था और दवा प्रबंधन की पारदर्शी व्यवस्था अनिवार्य है, जो वहां नदारद थी। कैंप पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
जिले में पहले भी पकड़े जा चुके हैं अवैध नशा मुक्ति केंद्र
चार माह पहले बामनीखेड़ा के पास अवैध नशा मुक्ति केंद्र से 42 मरीज बरामद हुए थे। यहां 12 वर्षीय नाबालिग भी बंद मिला था। जांच में न तो कोई चिकित्सक, न ही रिकॉर्ड और न ही पर्याप्त व्यवस्था मिली। संचालक समेत तीन लोगों पर केस दर्ज किया गया।
सात माह पहले असावटा गांव में श्री श्याम फाउंडेशन नाम से चल रहे अवैध नशा मुक्ति केंद्र में 39 मरीज मिले थे। यहां मरीजों से हर महीने 6–8 हजार रुपये वसूले जा रहे थे। केंद्र में न डॉक्टर थे और न ही आवश्यक दस्तावेज। सह-संचालक गिरफ्तार हुआ था जबकि मुख्य संचालक फरार हो गया था।
अप्रैल 2024 में प्रकाश विहार कॉलोनी से 50 मरीजों के साथ अवैध केंद्र पकड़ा गया। यहां कोई प्रशिक्षित चिकित्सक या काउंसलर नहीं था। परिजनों से प्रति माह 7–10 हजार रुपये वसूले जाते थे।
जून 2024 में रामनगर स्थित केंद्र पर छापेमारी में 51 मरीज मिले। जांच में अंग्रेजी दवाइयां बरामद हुईं। एक मरीज की मौत का मामला भी उजागर हुआ था।
अक्तूबर 2023 में कुसलीपुर-असावटा मार्ग पर जंगल में चल रहे अवैध केंद्र से लगभग 50 मरीज मिले थे। टीम ने संचालक के खिलाफ केस दर्ज किया।
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– दवाइयां और रिकॉर्ड जब्त, केंद्र सील
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। मुख्यमंत्री उड़न दस्ता फरीदाबाद की टीम ने सोमवार को धौलागढ़ में एक अवैध नशा मुक्ति केंद्र पर छापेमारी की। यह नशा मुक्ति केंद्र बिना अनुमति के संचालित किया जा रहा था। उड़ान दस्ता टीम को नशा मुक्ति केंद्र में मरीजों की सुरक्षा और उपचार मानकों की उल्लंघन होते मिला। मौके से प्रशासनिक टीम ने बड़ी संख्या में दवाइयां दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए। इसके साथ ही संचालक सतेंद्र के खिलाफ थाना कैंप में एफआईआर दर्ज कराई गई है। मुख्यमंत्री उड़न दस्ता ने अवैध नशा मुक्ति केंद्र को सील कर दिया।
संचालक नहीं दिखा पाया वैध दस्तावेज
जानकारी के अनुसार, सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री उड़न दस्ता ने सिविल अस्पताल पलवल से विशेषज्ञ टीम गठित कराई। संयुक्त दल में उप सिविल सर्जन डॉ. संजय कुमार, ड्रग्स इंस्पेक्टर फरीदाबाद संदीप गहलांन और स्थानीय पुलिस के अधिकारी शामिल थे। टीम ने धौलागढ़ स्थित उक्त केंद्र पर अचानक दबिश दी। निरीक्षण के समय केंद्र संचालक सतेंद्र मौके पर मौजूद मिला। उससे केंद्र संचालन के वैध दस्तावेज, लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और चिकित्सकीय अनुमतियां पेश करने को कहा गया, लेकिन वह कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
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नशा मुक्ति केंद्र के तीन कमरों में 28 नशाग्रस्त व्यक्ति को रखा गया था। उपचार की वैज्ञानिक प्रक्रिया, प्रशिक्षित स्टाफ, स्वच्छ भोजन, आपातकालीन व्यवस्था और चिकित्सकीय निगरानी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं का कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं मिला। टीम ने मौके से 15 तरह की अंग्रेजी (एलोपैथिक) दवाइयां बरामद की। लेकिन दवाइयों के बिल, खरीद रसीदें और किसी पंजीकृत डॉक्टर की विधिवत प्रिस्क्रिप्शन उपलब्ध नहीं कराई गई। यह स्थिति ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट समेत संबंधित स्वास्थ्य नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
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कैप पुलिस ने दर्ज किया केस
जांच के दौरान संयुक्त टीम ने केंद्र से एक एडमिशन रजिस्टर, एक हाजरी रजिस्टर और 33 लाभार्थियों की फाइलें अपने कब्जे में लीं। रिकॉर्ड में अनेक एंट्रियों का सत्यापन संदिग्ध पाया गया तथा मरीजों की सहमति, परिजन की जानकारी, उपचार योजना, दवा-डोज और फॉलो-अप संबंधी विवरण अधूरे या अनुपस्थित दिखे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, नशा मुक्ति केंद्र चलाने के लिए निर्धारित लाइसेंस, प्रशिक्षित काउंसलर, रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर, 24x7 आपातकालीन व्यवस्था और दवा प्रबंधन की पारदर्शी व्यवस्था अनिवार्य है, जो वहां नदारद थी। कैंप पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
जिले में पहले भी पकड़े जा चुके हैं अवैध नशा मुक्ति केंद्र
चार माह पहले बामनीखेड़ा के पास अवैध नशा मुक्ति केंद्र से 42 मरीज बरामद हुए थे। यहां 12 वर्षीय नाबालिग भी बंद मिला था। जांच में न तो कोई चिकित्सक, न ही रिकॉर्ड और न ही पर्याप्त व्यवस्था मिली। संचालक समेत तीन लोगों पर केस दर्ज किया गया।
सात माह पहले असावटा गांव में श्री श्याम फाउंडेशन नाम से चल रहे अवैध नशा मुक्ति केंद्र में 39 मरीज मिले थे। यहां मरीजों से हर महीने 6–8 हजार रुपये वसूले जा रहे थे। केंद्र में न डॉक्टर थे और न ही आवश्यक दस्तावेज। सह-संचालक गिरफ्तार हुआ था जबकि मुख्य संचालक फरार हो गया था।
अप्रैल 2024 में प्रकाश विहार कॉलोनी से 50 मरीजों के साथ अवैध केंद्र पकड़ा गया। यहां कोई प्रशिक्षित चिकित्सक या काउंसलर नहीं था। परिजनों से प्रति माह 7–10 हजार रुपये वसूले जाते थे।
जून 2024 में रामनगर स्थित केंद्र पर छापेमारी में 51 मरीज मिले। जांच में अंग्रेजी दवाइयां बरामद हुईं। एक मरीज की मौत का मामला भी उजागर हुआ था।
अक्तूबर 2023 में कुसलीपुर-असावटा मार्ग पर जंगल में चल रहे अवैध केंद्र से लगभग 50 मरीज मिले थे। टीम ने संचालक के खिलाफ केस दर्ज किया।