{"_id":"6a3821c9f4bf6f56c90802f0","slug":"ib-sub-inspectors-bail-plea-rejected-in-case-involving-leaking-information-about-businessmen-to-a-gangster-faridabad-news-c-26-1-fbd1021-72963-2026-06-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: गैंगस्टर को कारोबारियों की जानकारी देने के आरोप में आइबी सब इंस्पेक्टर की जमानत खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: गैंगस्टर को कारोबारियों की जानकारी देने के आरोप में आइबी सब इंस्पेक्टर की जमानत खारिज
विज्ञापन
अदालत ने की टिप्पणी-यह गंभीर श्रेणी का अपराध, जमानत नहीं दी सकती
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले के आठ कारोबारियों से विदेश में बैठे गैंगस्टर द्वारा करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में आइबी के सब इंस्पेक्टर सिकंदर की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने टिप्पणी की कि जिस अधिकारी का दायित्व अपराधियों पर शिकंजा कसना था, वह स्वयं अपराधियों से जुड़ गया। ऐसे में यह गंभीर श्रेणी का अपराध है और फिलहाल जमानत नहीं दी जा सकती है।
जमानत याचिका में सिकंदर ने कहा था कि रंगदारी प्रकरण में उसकी संलिप्तता के कोई प्रत्यक्ष या ठोस भौतिक साक्ष्य नहीं हैं। पुलिस उसके पास से कोई आपत्तिजनक बरामदगी भी नहीं कर पाई है और अब उससे कुछ बरामद किया जाना शेष नहीं है। उसने यह भी तर्क दिया कि मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी दीपक गोयल को जमानत मिल चुकी है, इसलिए उसे भी राहत दी जाए।
वहीं पुलिस ने अदालत में कहा कि कारोबारियों की जानकारी सबसे पहले सिकंदर के माध्यम से गैंगस्टर तक पहुंची थी। भले ही भौतिक साक्ष्य न मिले हों, लेकिन उसकी संलिप्तता के डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। जांच अभी जारी है और मामले में अन्य गिरफ्तारियां भी होनी हैं।
विज्ञापन
बता दें कि करीब एक माह पहले विदेश में बैठे गैंगस्टर रणदीप मलिक ने फरीदाबाद के आठ कारोबारियों से रंगदारी मांगी थी। जांच के दौरान कारोबारी दीपक गोयल और बाद में आइबी सब इंस्पेक्टर सिकंदर का नाम सामने आया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले के आठ कारोबारियों से विदेश में बैठे गैंगस्टर द्वारा करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में आइबी के सब इंस्पेक्टर सिकंदर की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने टिप्पणी की कि जिस अधिकारी का दायित्व अपराधियों पर शिकंजा कसना था, वह स्वयं अपराधियों से जुड़ गया। ऐसे में यह गंभीर श्रेणी का अपराध है और फिलहाल जमानत नहीं दी जा सकती है।
जमानत याचिका में सिकंदर ने कहा था कि रंगदारी प्रकरण में उसकी संलिप्तता के कोई प्रत्यक्ष या ठोस भौतिक साक्ष्य नहीं हैं। पुलिस उसके पास से कोई आपत्तिजनक बरामदगी भी नहीं कर पाई है और अब उससे कुछ बरामद किया जाना शेष नहीं है। उसने यह भी तर्क दिया कि मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी दीपक गोयल को जमानत मिल चुकी है, इसलिए उसे भी राहत दी जाए।
विज्ञापन
वहीं पुलिस ने अदालत में कहा कि कारोबारियों की जानकारी सबसे पहले सिकंदर के माध्यम से गैंगस्टर तक पहुंची थी। भले ही भौतिक साक्ष्य न मिले हों, लेकिन उसकी संलिप्तता के डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। जांच अभी जारी है और मामले में अन्य गिरफ्तारियां भी होनी हैं।
विज्ञापन
बता दें कि करीब एक माह पहले विदेश में बैठे गैंगस्टर रणदीप मलिक ने फरीदाबाद के आठ कारोबारियों से रंगदारी मांगी थी। जांच के दौरान कारोबारी दीपक गोयल और बाद में आइबी सब इंस्पेक्टर सिकंदर का नाम सामने आया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।