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ये तस्वीर ठीक नहीं: हाथ में बोतल पकड़ बेटे ने एक घंटे किया एंबुलेंस का इंतजार, स्ट्रेचर पर लेटा था बीमार पिता

Thu, 18 Jul 2024 06:33 PM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 18 Jul 2024 06:33 PM IST
सार

बीके अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1500 से 2000 मरीज इलाज कराने आते हैं। जिसमें से प्रतिदिन करीब 70 से 80 मरीज आपातकालीन वार्ड में आते हैं। कई मरीजों को ठीक से इलाज न मिलने पर उनको दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है। 

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Holding a bottle in his hand son waited for an hour for the ambulance at BK Hospital
हाथ में ग्लूकोस की बोतल पकड़े खड़ा बेटा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फरीदाबाद के बीके अस्पताल में गुरुवार को मरीज की हालत गंभीर होने के कारण उसे दिल्ली के एम्स अस्पताल के लिए रेफर किया गया। मरीज को एम्स ले जाने के लिए परिजन मरीज को स्ट्रेचर पर लिटा कर आधे घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। इस दौरान परिजन हाथ में ग्लूकोस की बोतल पकड़ कर खड़े रहे। एंबुलेंस के न आने तक मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

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बीके अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1500 से 2000 मरीज इलाज कराने आते हैं। जिसमें से प्रतिदिन करीब 70 से 80 मरीज आपातकालीन वार्ड में आते हैं। कई मरीजों को ठीक से इलाज न मिलने पर उनको दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है। गुरुवार को मरीज अंशू के पिता नरेंद्र ने बताया कि बुधवार की दोपहर में ही उसकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी। इसके बाद उसे ऑटो से बीके अस्पताल लेकर आए थे। डॉक्टर ने उसे अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती करके इलाज शुरू किया। 

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वहीं, डॉक्टर ने इलाज के बाद हालत में सुधार न होने के कारण उसे दिल्ली के एम्स अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन मरीज को स्ट्रेचर पर लेटा कर आपातकालीन वार्ड के बाहर हाथ में ग्लूकोस की बोतल पकड़ कर एक घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। एक घंटे तक एंबुलेंस न आने के कारण मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। 

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एंबुलेंस फ्लीट मैनेजर हरिकेश डागर ने बताया कि जिस मरीज को एंबुलेंस की जरूरत होती है। उसके लिए एंबुलेंस भेजा जाता है। जिसका रिकॉर्ड रजिस्टर में लिख दिया जाता है। मरीज अंशू के लिए भेजी गई एंबुलेंस की जानकारी रजिस्टर की जांच करके बताएंगे।

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