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Faridabad News: समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके अस्पताल की ट्रॉमा व्यवस्था और मरीज की समय पर निगरानी को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। हादसे में घायल 19 वर्षीय युवक की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद युवक की हालत इतनी गंभीर नहीं दिख रही थी, लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद करीब सवा से डेढ़ घंटे तक उसे पर्याप्त उपचार नहीं मिला। इस दौरान उसकी हालत बिगड़ती गई और बाद में उसकी मौत हो गई।
पिता लाल राम के अनुसार, मृतक कुलदीप आईटीआई में पढ़ाई करता था। बुधवार को वह रोजाना की तरह आईटीआई जा रहा था। रास्ते में हादसे में उसके सिर और पैर में चोट लग गई। परिजन पहले उसे एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से उसे बीके अस्पताल रेफर किया गया।
परिजनों का कहना है कि बीके अस्पताल पहुंचने के बाद कुलदीप बातचीत कर रहा था और लोगों को पहचान भी रहा था। अस्पताल में उसे इंजेक्शन दिया गया और सिर में टांके लगाए गए। इसके बाद करीब एक से डेढ़ घंटे तक उसे लिटाकर रखा गया। आरोप है कि इस दौरान उसकी हालत की दोबारा गंभीरता से जांच नहीं की गई और न ही आगे के उपचार की व्यवस्था की गई।
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परिजनों के मुताबिक, इस दौरान न ग्लूकोज चढ़ाया गया और न ही जरूरत के अनुसार खून चढ़ाने और अन्य उपचार की व्यवस्था की गई। बाद में अचानक उसकी हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि सिर में गंभीर चोट के बावजूद समय रहते विशेषज्ञ उपचार और लगातार निगरानी मिलती तो युवक की जान बच सकती थी। उन्होंने मामले की जांच कर लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वर्जन
पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. विकास गोयल, कार्यवाहक प्रधान चिकित्सा अधिकारी
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फरीदाबाद। बीके अस्पताल की ट्रॉमा व्यवस्था और मरीज की समय पर निगरानी को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। हादसे में घायल 19 वर्षीय युवक की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद युवक की हालत इतनी गंभीर नहीं दिख रही थी, लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद करीब सवा से डेढ़ घंटे तक उसे पर्याप्त उपचार नहीं मिला। इस दौरान उसकी हालत बिगड़ती गई और बाद में उसकी मौत हो गई।
पिता लाल राम के अनुसार, मृतक कुलदीप आईटीआई में पढ़ाई करता था। बुधवार को वह रोजाना की तरह आईटीआई जा रहा था। रास्ते में हादसे में उसके सिर और पैर में चोट लग गई। परिजन पहले उसे एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से उसे बीके अस्पताल रेफर किया गया।
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परिजनों का कहना है कि बीके अस्पताल पहुंचने के बाद कुलदीप बातचीत कर रहा था और लोगों को पहचान भी रहा था। अस्पताल में उसे इंजेक्शन दिया गया और सिर में टांके लगाए गए। इसके बाद करीब एक से डेढ़ घंटे तक उसे लिटाकर रखा गया। आरोप है कि इस दौरान उसकी हालत की दोबारा गंभीरता से जांच नहीं की गई और न ही आगे के उपचार की व्यवस्था की गई।
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परिजनों के मुताबिक, इस दौरान न ग्लूकोज चढ़ाया गया और न ही जरूरत के अनुसार खून चढ़ाने और अन्य उपचार की व्यवस्था की गई। बाद में अचानक उसकी हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि सिर में गंभीर चोट के बावजूद समय रहते विशेषज्ञ उपचार और लगातार निगरानी मिलती तो युवक की जान बच सकती थी। उन्होंने मामले की जांच कर लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. विकास गोयल, कार्यवाहक प्रधान चिकित्सा अधिकारी