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ट्यूबवेल के पेयजल की गुणवत्ता जांचेगा स्वास्थ्य विभाग
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फरीदाबाद। बरसात के मौसम में डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने शुक्रवार को विभाग के अधिकारियों की बैठक ली। इस दौरान शहर में लगे विभिन्न ट्यूबवेलों के पानी के सैंपल लेने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए। साथ ही अन्य जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए।
सीएमओ डॉ. विनय गुप्ता ने बताया कि स्कूलों में एंटी लार्वा गतिविधियां बढ़ाने, ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करने व स्लाइड की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना से राहत मिलने के चलते स्कूल खुल गए हैं और बच्चों का आना शुरू कर दिया गया है। ऐसे में स्कूलों में भी एंटी लार्वा एक्टिविटी चलाई जाएं। स्कूलों में जाकर लार्वा की जांच की जाए और साथ ही बच्चों को डेंगू व मलेरिया की बीमारी के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी महामारी को जागरूकता और बचाव उपायों के साथ काबू किया जा सकता है, तो मलेरिया डेंगू को क्यों नहीं।
वहीं, बरसात के दिनों में पेयजल सप्लाई लाइन के टूटने से दूषित पानी की आपूर्ति की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए ट्यूबवेलों से सप्लाई होने वाले पानी के सैंपल लेकर पेयजल शुद्धता सुनिश्चित की जाएगी। पानी के सैंपल में क्लोरीन की उपलब्धता, दूषित पदार्थों की मौजूदगी जैसे पहलुओं की जांच की जाएगी। विभाग के नोडल डॉ. रामभगत ने बताया कि जिले में मलेरिया के पांच मामलों की अब तक पुष्टि हुई है। हालांकि कई दिनों से इन मामलों पर विराम लगा हुआ है। ऐसे में जिले में एंटीलर्वा एक्टिविटी जोरो पर है। तालाबों में गंबुजिया मंछलियां छोड़कर एंटी लार्वा एक्टिविटी को बढ़ाया जा रहा है।
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सीएमओ डॉ. विनय गुप्ता ने बताया कि स्कूलों में एंटी लार्वा गतिविधियां बढ़ाने, ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करने व स्लाइड की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना से राहत मिलने के चलते स्कूल खुल गए हैं और बच्चों का आना शुरू कर दिया गया है। ऐसे में स्कूलों में भी एंटी लार्वा एक्टिविटी चलाई जाएं। स्कूलों में जाकर लार्वा की जांच की जाए और साथ ही बच्चों को डेंगू व मलेरिया की बीमारी के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी महामारी को जागरूकता और बचाव उपायों के साथ काबू किया जा सकता है, तो मलेरिया डेंगू को क्यों नहीं।
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वहीं, बरसात के दिनों में पेयजल सप्लाई लाइन के टूटने से दूषित पानी की आपूर्ति की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसी स्थिति से बचने के लिए ट्यूबवेलों से सप्लाई होने वाले पानी के सैंपल लेकर पेयजल शुद्धता सुनिश्चित की जाएगी। पानी के सैंपल में क्लोरीन की उपलब्धता, दूषित पदार्थों की मौजूदगी जैसे पहलुओं की जांच की जाएगी। विभाग के नोडल डॉ. रामभगत ने बताया कि जिले में मलेरिया के पांच मामलों की अब तक पुष्टि हुई है। हालांकि कई दिनों से इन मामलों पर विराम लगा हुआ है। ऐसे में जिले में एंटीलर्वा एक्टिविटी जोरो पर है। तालाबों में गंबुजिया मंछलियां छोड़कर एंटी लार्वा एक्टिविटी को बढ़ाया जा रहा है।
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