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Faridabad News: सूरजकुंड परिसर में 25 से 28 दिसंबर तक होगा गुर्जर संगम मेला
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समाज के अतीत, वर्तमान और भविष्य के आयामों को प्रस्तुत करेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। गुर्जर समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहर को नई सोच और आधुनिक दृष्टिकोण के साथ प्रदर्शित करने के उद्देश्य से 25 से 28 दिसंबर तक सूरजकुंड मेला परिसर में गुर्जर संगम मेला का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन गुर्जर समाज के विभिन्न संगठनों और समाज के प्रबुद्ध वर्ग के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है। रविवार को गुर्जर भवन में इसके बारे में जानकारी दी गई। समाज के सम्मानित प्रतिनिधियों और वरिष्ठ सदस्यों ने बताया कि यह चार दिवसीय आयोजन समाज के अतीत, वर्तमान और भविष्य के सांस्कृतिक, शैक्षिक, कला एवं सामुदायिक आयामों को प्रस्तुत करेगा।
गुर्जर संस्कृति का होगा भव्य प्रदर्शन
वक्ताओं ने बताया कि गुर्जर संस्कृति भारत के लगभग 18 राज्यों में अपनी गहरी जड़ें रखती हैं और इसकी ऐतिहासिक उपस्थिति मध्य एशिया, पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान तक दर्ज की जाती है। हिंदू, मुस्लिम, सिख और जैन गुर्जर समाज के लोग भले ही विभिन्न आस्थाओं से जुड़े हों, लेकिन वे साझा सांस्कृतिक धारा और एकता के प्रतीक हैं। गुर्जर संगम मेला इसी बहुलतावादी एकता को राष्ट्रीय पटल पर प्रस्तुत करेगा। इस आयोजन के माध्यम से समाज की आंतरिक एकजुटता को सशक्त करने के साथ-साथ राष्ट्रीय सद्भावना और सामाजिक समरसता को भी नई दिशा देने का प्रयास किया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। गुर्जर समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहर को नई सोच और आधुनिक दृष्टिकोण के साथ प्रदर्शित करने के उद्देश्य से 25 से 28 दिसंबर तक सूरजकुंड मेला परिसर में गुर्जर संगम मेला का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन गुर्जर समाज के विभिन्न संगठनों और समाज के प्रबुद्ध वर्ग के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है। रविवार को गुर्जर भवन में इसके बारे में जानकारी दी गई। समाज के सम्मानित प्रतिनिधियों और वरिष्ठ सदस्यों ने बताया कि यह चार दिवसीय आयोजन समाज के अतीत, वर्तमान और भविष्य के सांस्कृतिक, शैक्षिक, कला एवं सामुदायिक आयामों को प्रस्तुत करेगा।
गुर्जर संस्कृति का होगा भव्य प्रदर्शन
वक्ताओं ने बताया कि गुर्जर संस्कृति भारत के लगभग 18 राज्यों में अपनी गहरी जड़ें रखती हैं और इसकी ऐतिहासिक उपस्थिति मध्य एशिया, पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान तक दर्ज की जाती है। हिंदू, मुस्लिम, सिख और जैन गुर्जर समाज के लोग भले ही विभिन्न आस्थाओं से जुड़े हों, लेकिन वे साझा सांस्कृतिक धारा और एकता के प्रतीक हैं। गुर्जर संगम मेला इसी बहुलतावादी एकता को राष्ट्रीय पटल पर प्रस्तुत करेगा। इस आयोजन के माध्यम से समाज की आंतरिक एकजुटता को सशक्त करने के साथ-साथ राष्ट्रीय सद्भावना और सामाजिक समरसता को भी नई दिशा देने का प्रयास किया जाएगा।
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