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डीएपी के लिए चक्कर लगाने को किसान मजबूर
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बल्लभगढ़। शहर में डीएपी नहीं होने की वजह से किसान परेशान है। खाद कंपनियों की दुकानों का चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
कोऑपरेटिव मार्केटिंग सोसाइटी के मैनेजर चंद प्रकाश ने बताया कि दो दिन पहले पहला रैक आया था। इसमें डीएपी के 1000 कट्टे थे। लेकिन उसी दिन कुछ ही घंटों में बिक गए। अब दूसरा रैक 24 अक्तूबर को आने की उम्मीद है।
किसानों को खाद की जरूरत इन दिनों ज्यादा होती है। लेकिन, पीछे से डिमांड ज्यादा होने की वजह से सप्लाई कम हो रही है। मैनेजर ने बताया डीएपी का एक कट्टा 1200 रुपये का दिया जा रहा है। इस बार ज्यादा कट्टे आने की उम्मीद है जिससे किसानों को कुछ हद तक राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि एक किसान आधार कार्ड पर पांच खाद के कट्टे दिए जा रहे हैं। ईफको बल्लभगढ़ के इंचार्ज अजीत सिंह ने बताया कि इस साल कोटा कम कर दिया है। उनकी दुकान पर हर रोज 50 से 60 किसान सिर्फ डीएपी के बारे में पूछने के लिए आते हैं लेकिन मायूस होकर लौट जाते हैं।
ईफको पर पिछले चार दिनों से डीएपी लेने के लिए आ रहे हैं। लेकिन हर रोज अभी नहीं आए है सुनकर वापस चले जाते हैं। चार कट्टे लेने हैं।
- देवेंद्र, गांव छपरौला
आलू की बिजाई करनी है। इसलिए डीएपी चाहिए। लेकिन शहर में कहीं भी डीएपी नहीं होने की वजह से बिजाई में देरी हो रही है।
- प्रताप, गांव डींग
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कोऑपरेटिव मार्केटिंग सोसाइटी के मैनेजर चंद प्रकाश ने बताया कि दो दिन पहले पहला रैक आया था। इसमें डीएपी के 1000 कट्टे थे। लेकिन उसी दिन कुछ ही घंटों में बिक गए। अब दूसरा रैक 24 अक्तूबर को आने की उम्मीद है।
किसानों को खाद की जरूरत इन दिनों ज्यादा होती है। लेकिन, पीछे से डिमांड ज्यादा होने की वजह से सप्लाई कम हो रही है। मैनेजर ने बताया डीएपी का एक कट्टा 1200 रुपये का दिया जा रहा है। इस बार ज्यादा कट्टे आने की उम्मीद है जिससे किसानों को कुछ हद तक राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि एक किसान आधार कार्ड पर पांच खाद के कट्टे दिए जा रहे हैं। ईफको बल्लभगढ़ के इंचार्ज अजीत सिंह ने बताया कि इस साल कोटा कम कर दिया है। उनकी दुकान पर हर रोज 50 से 60 किसान सिर्फ डीएपी के बारे में पूछने के लिए आते हैं लेकिन मायूस होकर लौट जाते हैं।
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ईफको पर पिछले चार दिनों से डीएपी लेने के लिए आ रहे हैं। लेकिन हर रोज अभी नहीं आए है सुनकर वापस चले जाते हैं। चार कट्टे लेने हैं।
- देवेंद्र, गांव छपरौला
आलू की बिजाई करनी है। इसलिए डीएपी चाहिए। लेकिन शहर में कहीं भी डीएपी नहीं होने की वजह से बिजाई में देरी हो रही है।
- प्रताप, गांव डींग