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Faridabad News: हादसे में पैर गंवाने के बाद भी नहीं हारी हिम्मत, चढ़े सात पर्वत

Thu, 06 Mar 2025 11:05 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 06 Mar 2025 11:05 PM IST
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Even after losing his leg in an accident, he did not lose courage and climbed seven mountains
कमजोरी को ही सबसे बड़ी ताकत बनाकर कायम किया है इतिहास
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। महिला आज के समय में पुरुषों से किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं। हर जगह महिला पुरुष के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। ऐसी ही एक दिव्यांग महिला यूपी लखनऊ की बेटी होने के साथ हरियाणा के फरीदाबाद की बहू है। एक दर्दनाक हादसे से उबरकर अपनी कमजोरी को ही उन्होंने सबसे बड़ी ताकत बनाकर इतिहास कायम किया है। दूसरी ओर, टैपिंग बॉलिंग खिलाड़ी लक्ष्मी ने दिव्यांग होने के बाद धैर्य नहीं छोड़ा और कई राष्ट्रीय पदक लेकर अपना जीवन संवारा और फरीदाबाद का नाम रोशन किया। ट्रेन हादसे में अपना पैर गंवाने वाली किरन कनौजिया अपने साहस से भारत की पहली ब्लेड रनर बनीं। वहीं, पति की मौत होने के बाद बच्चों की जिम्मेदारी आने पर दोबारा से पढ़ाई शुरू की और अब बीके अस्पताल में क्लर्क के पद पर कार्यरत होकर बच्चों का पालन पोषण कर रही हैं।
सात पर्वतों पर फहराया तिरंगा, साउथ पोल फतह की तैयारी
दिव्यांग पर्वतारोही व देश की पूर्व राष्ट्रीय वॉलीबॉल खिलाड़ी डाॅ. अरुणिमा सिन्हा की शादी फरीदाबाद के गांव ताजुपुर के गौरव सिंह के साथ 2018 में हुई थी। गौरव सिंह राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज हैं। लखनऊ में जन्मी डाॅ. अरुणिमा को 11 अप्रैल 2011 को पद्मावती एक्सप्रेस में लूट का विरोध करने पर बदमाशों ने उन्हें चलती ट्रेन से फेंक दिया था। ट्रेन की चपेट में अरुणिमा सिन्हा का बायां पैर कट गया था, पर जिजीविषा की प्रतिमूर्ति अरुणिमा ने नए सिरे से जिंदगी का सफर तय किया और 2013 में वह माउंट एवरेस्ट पर पहुंची थीं। अब तक वह सात प्रमुख पर्वत चाेटियों पर तिरंगा लहराकर देश का नाम रोशन कर चुकी हैं। अरुणिमा ने एवरेस्ट, किलिमंजारो (अफ्रीका), एल्ब्रुस (रूस), कास्टेन पिरामिड (इंडोनेशिया), किजाश्को (आस्ट्रेलिया) और माउंट अकंकागुआ (दक्षिण अमेरिका) को फतह किया है।
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दिव्यांग लक्ष्मी ने टेनपिन बॉलिंग में फरीदाबाद का नाम किया रोशन
टेनपिन बॉलिंग खिलाड़ी लक्ष्मी ने अपने जीवन में कई चुनौतियां का सामना किया। अपने कदमों की काबिलियत पर विश्वास रखने वाली बल्लभगढ़ की लक्ष्मी ने 2014 में भीम अवॉर्ड और नेशनल अवॉर्ड जीता। लक्ष्मी जब एक साल की थीं तब उनके दाएं पैर में पोलियो हो गया था। इसके बाद उन्होंने अपनी राह खुद चुनते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते। 2023 में राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक और 2024 के राष्ट्रीय खेलों में दो रजत पदक हासिल किए। लक्ष्मी ने दिसंबर 2024 में लड़की को जन्म दिया है। उन्होंने कहा कि वह खेल नहीं सकती लेकिन फिर भी मार्च 2025 के अंत में होने वाले पैरा राष्ट्रीय खेलों में खेलना चाहती हैं। - लक्ष्मी
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कड़वी बातों को भूल बनी भारत की पहली ब्लेड रनर
भारत की पहली ब्लेड रनर बनी किरन कनौजिया ने ट्रेन हादसे में अपना पैर खो दिया था। दुनिया के ताने और कड़वी बातों से किरन को बहुत दुख होता था। लेकिन पैर पर ब्लेड लगवाने के बाद उन्होंने चलना सीखा। उसके बाद किरन ने ऐसी दौड़ लगाई कि रुकने का नाम ही नहीं लिया। हादसे में ट्रेन के चार कोच उनके पैर के ऊपर से निकल गए। डॉक्टर को उनका आधा पैर काटना पड़ा। इससे किरन अंदर से टूट गई और काफी निराश हो गई। उन्हें लगा उनकी जिंदगी यहीं खत्म हो गई लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अब किरन अलग-अलग शहरों में मैराथन दौड़ती हैं। उन्हें कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। किरन कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी हैं। - किरन कनौजिया

पति की मौत के बाद दोबारा शुरू की पढ़ाई

उनकी कम उम्र में शादी हो गई थी। शादी से पहले उन्होंने 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की हुई थी। शादी के कुछ समय के बाद उनकी पति की सड़क हादसे में मृत्यु हो गई। पति की मौत के बाद ससुराल वालों ने भी साथ देने से मना कर दिया। उसके बाद वह चावला कॉलोनी में किराये के मकान में अपने बच्चों को लेकर आईं। बच्चों की जिम्मेदारी होने के चलते उन्होंने दोबारा से पढ़ाई से शुरू की। 12वीं ओपन से करने के बाद उन्होंने बीए की। इसके बाद वह कंप्यूटर कोर्स करने के बाद बीके अस्पताल में क्लर्क की जॉब कर रही हैं। उनके बेटा बीटेक की पढ़ाई कर रहा है वहीं, बेटी नर्सिंग का कोर्स कर रही है। - गीता, चावला कॉलोनी
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