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Faridabad News: करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं सुधरी शहर में पेयजल आपूर्ति

Sat, 21 Oct 2023 10:51 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 21 Oct 2023 10:51 PM IST
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Drinking water supply in the city has not improved even after spending crores
अमर उजाला ब्यूरो
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फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी में शहर वासियों को पेयजल किल्लत से निजात दिलाने के लिए फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण की ओर से पांच साल में करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। दो साल पहले तक जिन सेक्टर-22, 23 और 55 में पेयजल आपूर्ति बेहतर के दावे किए जा रहे थे। सबसे ज्यादा दिक्कत उन्हीं इलाकों में बनी हुई है। पीने का पानी न आने से लोग परेशान हैं और निजी खर्च पर टैंकर मंगाकर काम चला रहे हैं।
शहर में रोजाना 450 एमएलडी पेयजल की जरूरत है। लेकिन, सप्लाई 350 एमएलडी ही हो रहा है। हालांकि पिछले पांच सालों में फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) की ओर से पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए। सेक्टर-22, 23 और लकड़पुर में वर्षों पहले बने अंडरग्राउंड बूस्टर को दोबारा चालू करने के लिए 25 लाख रुपये की लागत से नई पाइल लाइन बिछाई गई। कैबिनेट मंत्री मूलचंद शर्मा का दावा था कि दोनों क्षेत्र में पानी की समस्या बिल्कुल खत्म हो जाएगी। लेकिन, समस्या जस की तस बनी हुई है। एनआईटी क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति सुधार के लिए रेनीवैल नंबर दो, 10 और मंझावली की करीब 50 लाख रुपये की लागत से सफाई कराई गई। इसका भी कोई खास लाभ नहीं मिला। बल्लभगढ़ से गांव छायंसा स्थित 10 नंबर ट्यूबवेल तक करीब चार करोड़ रुपये की लागत से नई पाइप लाइन बिछाई गई। कैबिनेट मंत्री मूलचंद शर्मा का दावा था कि उनके विभाग सभा में 40 हजार लोगों को पानी की समस्या से राहत मिलेगी लेकिन, विधानसभा के अंतर्गत आने वाले सेक्टर-55 और 22, 23 में आज भी सप्ताह में मात्र दो दिन लोगों को पानी मिल रहा है।
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97 करोड़ का काम ठेकेदार ने अधूरा छोड़ा

अमृत योजना के तहत ग्रेटर फरीदाबाद क्षेत्र की काॅलोनियों में पेयजल की पाइप लाइन डालने का ठेका साल 2018 में केबीआर शिल्पा जेवी को दिया गया था। करीब 97 करोड़ से एजेंसी ने साल 2020 में काम को पूरा करना करना था, लेकिन नवंबर 2022 तक बढ़ा दिया गया था। एजेंसी ने इस दौरान डीआई पाइप डालने का काम शुरू किया था, लेकिन बीच में ही काम बंद कर दिया था। निगम के नोटिस के बावजूद एजेंसी के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। तीन माह पहले शहरी स्थानीय निकाय विभाग की मंजूरी मिलने के बाद निगम ने 32.22 करोड़ का टेंडर जारी करने की तैयारी है।
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स्काडा योजना का भी नहीं मिला लाभ

स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी की ओर से शहर में पेयजल आपूर्ति सुधार के लिए स्काडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्विजिशन) शुरु की गई। स्काडा के तहत शहर के पेयजल सिस्टम का वितरण समान रूप से होने का दावा किया गया था। कहीं भी पानी की लाइन में लीकेज व चोरी कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में पता लग जाएगा। इसकी निगरानी स्मार्ट सिटी के अधिकारी अपने मोबाइल फोन पर भी कर सकेंगे। लेकिन यह योजना भी लोगों को राहत नहीं दे सकी।
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वर्जन

शहर में पेयजल व्यवस्था सुधार पर विभाग की तरफ से लगातार काम किया जा रहा है। लोगों को जल्द इसका लाभ मिलना शुरु हो जाएगा।
- डॉ. गरिमा मित्तल, अतिरिक्त सीईओ, एफएमडीए
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