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Faridabad News: अस्पताल के अंदर घूमते रहते हैं कुत्ते, मरीजों को लगता है डर
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सेक्टर -8 स्थित ईएसआई अस्पताल में अव्यवस्था का आलम, सुरक्षा गार्ड नहीं देते ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर- 8 स्थित ईएसआई अस्पताल में व्यवस्था दिनों दिन खराब होती जा रही हैं। मुख्य गेट पर भरे गंदे पानी और बदबू से मरीज पहले ही परेशान थे और अब कुत्तों के काटने का डर बना हुआ है। डॉक्टर के कमरे के बाहर से लेकर वेटिंग रूम में जगह-जगह कुत्ते घूमते रहते हैं, उन्हें भगाने वाला कोई नहीं है।
अस्पताल में रोजाना करीब 400 से अधिक मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं। यहां पर मरीजों के साथ जगह-जगह लावारिस कुत्ते भी देखने को मिल रहे हैं। जिसकी वजह से मरीजों को डर लगा रहता है कि कोई हादसा न हो जाए। अस्पताल में कार्यरत कर्मचारी कुत्तों को अंदर बैठे देखते रहते हैं, लेकिन उन्हें भगाने की जहमत नहीं उठाते हैं। लावारिस कुत्ताें ने अस्पताल में ऐसी हालत की हुई है कि लोग डर-डर कर अपना इलाज करवाते हैं। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक में कुत्ते रहते हैं। उन कुत्तों को अस्पताल के सुरक्षा गार्ड वहां से भगाते नहीं है।
छोटे बच्चे अस्पताल के अंदर आने से कतराते हैं
अस्पताल में उपचार करवाने के लिए बाल रोग विशेषज्ञ के पास बच्चे आते हैं। लावारिस कुत्तों से सबसे ज्यादा खतरा छोटे बच्चों को होता है। कुत्तों की वजह से कई बार बच्चे अस्पताल परिसर के अंदर भी नहीं आते हैं। परिजनों की ओर से लावारिस कुत्ते को भगाने के बाद बच्चे डॉक्टर के पास आते हैं।
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कई बार लिख चुके हैं पत्र
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुनीत बंसल ने कहा कि अस्पताल चारों ओर से खुला हुआ है। इस वजह से लावारिस कुत्ते आ जाते हैं। कुत्तों को पकड़ने के लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से नगर निगम को कई बार पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर- 8 स्थित ईएसआई अस्पताल में व्यवस्था दिनों दिन खराब होती जा रही हैं। मुख्य गेट पर भरे गंदे पानी और बदबू से मरीज पहले ही परेशान थे और अब कुत्तों के काटने का डर बना हुआ है। डॉक्टर के कमरे के बाहर से लेकर वेटिंग रूम में जगह-जगह कुत्ते घूमते रहते हैं, उन्हें भगाने वाला कोई नहीं है।
अस्पताल में रोजाना करीब 400 से अधिक मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं। यहां पर मरीजों के साथ जगह-जगह लावारिस कुत्ते भी देखने को मिल रहे हैं। जिसकी वजह से मरीजों को डर लगा रहता है कि कोई हादसा न हो जाए। अस्पताल में कार्यरत कर्मचारी कुत्तों को अंदर बैठे देखते रहते हैं, लेकिन उन्हें भगाने की जहमत नहीं उठाते हैं। लावारिस कुत्ताें ने अस्पताल में ऐसी हालत की हुई है कि लोग डर-डर कर अपना इलाज करवाते हैं। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक में कुत्ते रहते हैं। उन कुत्तों को अस्पताल के सुरक्षा गार्ड वहां से भगाते नहीं है।
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छोटे बच्चे अस्पताल के अंदर आने से कतराते हैं
अस्पताल में उपचार करवाने के लिए बाल रोग विशेषज्ञ के पास बच्चे आते हैं। लावारिस कुत्तों से सबसे ज्यादा खतरा छोटे बच्चों को होता है। कुत्तों की वजह से कई बार बच्चे अस्पताल परिसर के अंदर भी नहीं आते हैं। परिजनों की ओर से लावारिस कुत्ते को भगाने के बाद बच्चे डॉक्टर के पास आते हैं।
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कई बार लिख चुके हैं पत्र
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुनीत बंसल ने कहा कि अस्पताल चारों ओर से खुला हुआ है। इस वजह से लावारिस कुत्ते आ जाते हैं। कुत्तों को पकड़ने के लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से नगर निगम को कई बार पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।