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Faridabad News: खुदाई से लेकर पाइप डालने की तरकीब अपनाई फिर भी नहीं बचाई जा सकी बच्ची

Tue, 29 Sep 2026 12:45 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2026 12:45 AM IST
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Despite employing methods ranging from excavation to pipe insertion, the girl could not be saved.
जिला प्रशासन से लेकर एनडीआरएफ की तमाम मशक्कत काम नहीं आ सकी
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हेमलता
बल्लभगढ़। सिही गांव में बच्ची को जिंदा बचाने के लिए बचाव दल ने बोरवेल के पास खुदाई करने से लेकर बोरवेल के अंदर पाइप डालने की तरकीब अपनाई। करीब 10 घंटे की कवायद के बावजूद बचाव दल बच्ची को जिंदा नहीं बचा सका। जिला प्रशासन से लेकर एनडीआरएफ की तमाम मशक्कत काम नहीं आ सकी।
रविवार शाम करीब 5:57 बजे खेलते समय तीन साल की बच्ची नेहा बंद पड़े बोरवेल में गिर गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस चौकी सेक्टर-8 की टीम करीब दो मिनट में मौके पर पहुंच गई। इसके बाद चौकी इंचार्ज भी करीब 6:15 बजे घटनास्थल पर पहुंच गए। पुलिस और प्रशासन ने तुरंत रेस्क्यू अभियान शुरू किया। अंधेरा होने के कारण सबसे पहले मौके पर रोशनी की व्यवस्था की गई। इसी दौरान एसीपी सिटी बल्लभगढ़ रवि और एसडीएम मयंक भारद्वाज भी मौके पर पहुंचे।
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7 बजे तक आ रही थी बच्ची की रोने की आवाज
घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पिता रामदीन और मां पहुंच गई। पुलिस की ओर से लगातार बच्ची से पिता रामदीन की बात करवाई जा रही थी। लोगों के अनुसार शाम के 7 बजे तक बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दे रही थी। उसके बाद आवाज आनी बंद हो गई।
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पाइप के माध्यम से ऑक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था की
इसके बाद करीब 7 बजे स्वास्थ्य विभाग की टीम एडवांस्ड लाइफ स्पोर्ट एंबुलेंस के साथ घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने पाइप के माध्यम से बोरवेल में ऑक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था की। इसके बाद फूड पाइप के जरिए बच्ची को जूस पिलाने का प्रयास किया गया। कुछ देर बाद आपदा प्रबंधन की टीम मौके पर पहुंची और बोरवेल के अंदर कैमरा डालकर बच्ची की स्थिति का पता लगाने का प्रयास किया।

120 फीट पर दिखी चप्पल
कैमरे से करीब 120 फीट की गहराई में पानी दिखाई दिया, जबकि करीब 150 फीट पर बच्ची के होने की आशंका जताई गई। पानी के ऊपर एक चप्पल तैरती हुई दिखाई दी। शुरुआत में इसे बच्ची की चप्पल माना गया, लेकिन बाद में वह बच्ची की चप्पल नहीं निकली। इससे रेस्क्यू टीम के सामने बच्ची की वास्तविक स्थिति का पता लगाने की चुनौती और बढ़ गई।

गाजियाबाद से रात नौ बजे पहुंची एनडीआरएफ टीम
करीब 8 बजे गाजियाबाद स्थित एनडीआरएफ टीम को सूचना दी गई। टीम करीब 8:10 बजे गाजियाबाद से रवाना हुई और रात करीब 9 बजे गांव सिही पहुंच गई। मौके पर पहुंचते ही एनडीआरएफ के जवानों ने दोबारा कैमरे को बोरवेल के अंदर उतारा, ताकि बच्ची की स्थिति और उसकी पोजीशन का पता लगाया जा सके। करीब 10 बजे रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया।
रस्सी के जरिये शुरू किया अभियान
एनडीआरएफ टीम ने सबसे पहले रस्सी के माध्यम से बच्ची को पकड़कर बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन बच्ची की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका। इसके बाद लोहे की पाइप और हुक की मदद से बच्ची को पकड़ने का प्रयास किया गया। इसके लिए तिगांव क्षेत्र के मंधावली गांव से लोहे की पाइप मंगाए गए।

सेना के अधिकारी भी पहुंचे, स्थानीय स्तर पर तैयार कराया लिफटिड छाता
रेस्क्यू अभियान की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली स्थित सेना के अधिकारियों को भी सूचना दी गई। सेना के अधिकारी रात करीब 10 बजे मौके पर पहुंचे। एनडीआरएफ और सेना की टीम ने मिलकर बच्ची को निकालने के प्रयास तेज किए। सेना के अधिकारी के अनुसार, हुक से बच्ची को निकालने में सफलता नहीं मिलने के बाद बोरवेल के आकार के अनुसार स्थानीय स्तर पर लिफटिड छाते का विशेष एंगल तैयार कराया गया। करीब 12 बजे ऐसा लगा कि बच्ची को बाहर निकाल लिया जाएगा, लेकिन जब एनडीआरएफ और रेस्क्यू टीम ने उसे खींचने का प्रयास किया तो वह अंदर फंस गई। इसके बाद दोबारा सर्च अभियान चलाया गया। बोरवेल के आकार और बच्ची की स्थिति को देखते हुए लिफटिड छाता तैयार कराया गया। इसके बाद बच्ची को लिफटिड छाते में पकड़कर पैरों की तरफ से ऊपर खींचने का प्रयास किया गया।

सिर नीचे और पैर ऊपर होने से बढ़ी मुश्किल
सेना के अधिकारी ने बताया कि बच्ची बोरवेल में सिर के बल गिरी थी और उसके पैर ऊपर की ओर थे। बोरवेल में पानी होने के साथ-साथ मिट्टी और रेत भी थी। इसके कारण कैमरे के जरिए बच्ची की स्थिति स्पष्ट दिखाई नहीं दे रही थी। इसी वजह से रेस्क्यू टीम को बच्ची तक पहुंचने और उसे पकड़ने में काफी परेशानी हुई।

हाईटेक कैमरा मंगवाया
नगर निगम फरीदाबाद की ओर से भी हाईटेक कैमरा उपलब्ध कराया गया था। इसका उद्देश्य बोरवेल के अंदर बच्ची की स्थिति का पता लगाना था, लेकिन पानी, मिट्टी और रेत के कारण कैमरे में बच्ची स्पष्ट दिखाई नहीं दे रही थी। इसके बावजूद टीमों ने लगातार प्रयास जारी रखे।

3:55 बजे बाहर निकाली गई बच्ची, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
एनडीआरएफ, सेना और अन्य रेस्क्यू टीमों की करीब पांच घंटे की लगातार मशक्कत के बाद रात 3:55 बजे बच्ची को बोरवेल से बाहर निकाला जा सका। बाहर निकालते ही उसे एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया।

नगर निगम ने भी शुरू किया था सर्च अभियान
एनडीआरएफ की टीम एक ओर अपना कार्य कर रही थी। वहीं दूसरी ओर नगर निगम की ओर से जेसीबी की मदद से गड्ढा खोदकर बोरवेल तक पहुंचने की कोशिश की जा रही थी। पहले नगर निगम की ओर से बोरवेल से करीब 5 फीट की दूरी पर गड्ढा खुदवाने का कार्य किया, लेकिन कोई सफलता हासिल नहीं हुई। उसके बाद उस गड्ढे को बंद करने के बाद करीब 30 फीट दूर दोबारा से दूसरा गढ्ढा खोदने का कार्य शुरू किया गया लेकिन एनडीआरएफ की टीम के द्वारा बच्ची को बाहर निकालने के बाद उस गड्ढे को भी बंद कर दिया गया।



बच्ची को निकालने के बाद बंद किया गया बोरवेल
बच्ची को निकाले के बाद नगर निगम की टीम की ओर से बोरवेल को जेसीबी की मदद से मिट्टी डाल कर पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया। लोगों का कहना है कि अगर पहले ही नगर निगम जाग जाता तो शायद आज नेहा जिंदा होती। आस-पड़ोस के लोगों का कहना था कि निगम प्रशासन लापरवाही नहीं बरतता तो शायद बच्ची आज जिंदा होती।
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