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सिर्फ मच्छर से नहीं विभागीय खेल से फैल रहा है डेंगू
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फरीदाबाद (मूर्ति दलाल)। शहर के कुछ इलाकों में तेजी से फैल रहा डेंगू सिर्फ मच्छरों की देन नहीं बल्कि, इसमें सरकारी विभागों की लीपापोती और लापरवाही के खेल भी शामिल है। रोगियों के स्वस्थ होने के बाद स्वास्थ्य कर्मी मरीजों के घर व आसपास मच्छर के लार्वा की जांच के लिए पहुंच रहे हैं। फॉगिंग नहीं करवाई गई है। निदेशालय तक भेजे जाने वाले आंकड़ों में कई मरीज ‘क्योर’ यानी स्वस्थ दिखाए जा रहे हैं। जब अमर उजाला टीम ने पड़ताल की तो पता चला कि वे अभी अस्पताल में भर्ती हैं। सरकारी विभागों की यह सरपरस्ती और लीपापोती स्वस्थ लोगों को भी डेंगू का मरीज बनाने की जिम्मेदार है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, डबुआ कॉलोनी, एसी नगर, एसजीएम नगर, सेक्टर-21, सेक्टर-23 संजय क़ॉलोनी, एनआईटी, सेक्टर-222 बसेलवा कॉलोनी, कृष्णा कॉलोनी जैसे इलाकों में मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इन इलाकों में बुजुर्ग-बच्चे और अन्य हर वर्ग के मामले सामने आ रहे हैं। कई मरीजों व उनके आसपास के इलाकों में बात करने पर पता चला कि सरकारी विभाग बीमारी का असली कारण हैं।
केस-1: डबुआ निवासी 17 वर्षीय किशोरी 15 सितंबर से अस्पताल में भर्ती है। अभी डेंगू से उबरी नहीं। वहीं, रिपोर्ट में उसे ‘क्योर’ दिखा दिया गया है। मां के मुताबिक, अभी डिस्चार्ज होने में उसे समय लगेगा। मरीज की पसली में पानी भी भरा हुआ है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम की उदासीनता भी परिजन साफ शब्दों में बताते हैं। पीड़िता की मां के अनुसार, घर में 21 सितंबर को टीम लार्वा जांच के लिए पहुंची। घर में रखे कूलर में कोई तरल दवा डाली लेकिन नगर निगम की टीम आज तक फॉगिंग के लिए नहीं आई।
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केस-2: एसजीएम नगर निवासी 16 वर्षीय किशोर 14 सितंबर को डेंगू से पीड़ित मिला। वह निजी अस्पताल में भर्ती हुआ। फिलहाल स्वस्थ है। हालांकि, इस बीच उनके घर न तो कोई लार्वा जांच की टीम पहुंची और न ही कोई नगर निगम से फॉगिंग के लिए। परिजनों का कहना है कि घर के आसपास 21 सितंबर को लार्वा जांच के लिए टीम पहुंची थी।
केस-3: एनआईटी-2 सी निवासी 57 वर्षीय व्यक्ति को नौ सितंबर को बुखार हुआ। वह 14 सितंबर को निजी अस्पताल में भर्ती हुए। अब स्वस्थ हैं। इस बीच उनके बेटे-बेटी को भी डेंगू ने चपेट में ले लिया। पीड़ित ने बताया कि घर के बाहर बीते 15 दिन से बरसात का पानी जमा है। साथ ही सीवरेज ओवरफ्लो भी हो रहा है। बेटी की हालत ठीक नहीं है। इलाके में कई और मामले डेंगू के सामने आए हैं। जलभराव की शिकायत निगम से की। मेयर से की। वहीं, स्थानीय निवासी मेयर के भाई से भी की। मसला जस का तस है। न कोई सफाई हुई और न कोई जांच। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 21 सितंबर को पहुंचकर घर में रखे कूलर में कुछ दवा जरूर डाली। इससे पहले किसी विभाग की टीम पीड़ितों के संपर्क करने नहीं पहुंची।
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, डबुआ कॉलोनी, एसी नगर, एसजीएम नगर, सेक्टर-21, सेक्टर-23 संजय क़ॉलोनी, एनआईटी, सेक्टर-222 बसेलवा कॉलोनी, कृष्णा कॉलोनी जैसे इलाकों में मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इन इलाकों में बुजुर्ग-बच्चे और अन्य हर वर्ग के मामले सामने आ रहे हैं। कई मरीजों व उनके आसपास के इलाकों में बात करने पर पता चला कि सरकारी विभाग बीमारी का असली कारण हैं।
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केस-1: डबुआ निवासी 17 वर्षीय किशोरी 15 सितंबर से अस्पताल में भर्ती है। अभी डेंगू से उबरी नहीं। वहीं, रिपोर्ट में उसे ‘क्योर’ दिखा दिया गया है। मां के मुताबिक, अभी डिस्चार्ज होने में उसे समय लगेगा। मरीज की पसली में पानी भी भरा हुआ है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम की उदासीनता भी परिजन साफ शब्दों में बताते हैं। पीड़िता की मां के अनुसार, घर में 21 सितंबर को टीम लार्वा जांच के लिए पहुंची। घर में रखे कूलर में कोई तरल दवा डाली लेकिन नगर निगम की टीम आज तक फॉगिंग के लिए नहीं आई।
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केस-2: एसजीएम नगर निवासी 16 वर्षीय किशोर 14 सितंबर को डेंगू से पीड़ित मिला। वह निजी अस्पताल में भर्ती हुआ। फिलहाल स्वस्थ है। हालांकि, इस बीच उनके घर न तो कोई लार्वा जांच की टीम पहुंची और न ही कोई नगर निगम से फॉगिंग के लिए। परिजनों का कहना है कि घर के आसपास 21 सितंबर को लार्वा जांच के लिए टीम पहुंची थी।
केस-3: एनआईटी-2 सी निवासी 57 वर्षीय व्यक्ति को नौ सितंबर को बुखार हुआ। वह 14 सितंबर को निजी अस्पताल में भर्ती हुए। अब स्वस्थ हैं। इस बीच उनके बेटे-बेटी को भी डेंगू ने चपेट में ले लिया। पीड़ित ने बताया कि घर के बाहर बीते 15 दिन से बरसात का पानी जमा है। साथ ही सीवरेज ओवरफ्लो भी हो रहा है। बेटी की हालत ठीक नहीं है। इलाके में कई और मामले डेंगू के सामने आए हैं। जलभराव की शिकायत निगम से की। मेयर से की। वहीं, स्थानीय निवासी मेयर के भाई से भी की। मसला जस का तस है। न कोई सफाई हुई और न कोई जांच। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 21 सितंबर को पहुंचकर घर में रखे कूलर में कुछ दवा जरूर डाली। इससे पहले किसी विभाग की टीम पीड़ितों के संपर्क करने नहीं पहुंची।