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एक और कार बरामद: अल फलाह यूनिवर्सिटी में खड़ी मिली ब्रेजा, गाड़ी शाहीन के नाम इस्तेमाल कर रहा था कोई और

Thu, 13 Nov 2025 07:21 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद Published by: विकास कुमार Updated Thu, 13 Nov 2025 07:21 PM IST
सार

कार को यूनिवर्सिटी का एक अन्य डॉक्टर इस्तेमाल कर रहा था। उसे भी हिरासत में ले लिया गया है। डॉक्टर शाहीन से जम्मू पुलिस की पूछताछ में कार व डॉक्टर का पता चलने पर ये कार्रवाई हुई है। 

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Delhi blast Brezza car found at Al-Falah University is being investigated by Jammu and Kashmir Police
अल फलाह यूनिवर्सिटी में मिली कार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की कथित कमांडर डॉ. शाहीन सईद की दूसरी कार अल फलाह यूनिवर्सिटी में गुरुवार को मिली है। डॉ. शाहीन ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के ही ब्लॉक नंबर 15 के फ्लैट नंबर 32 के पते पर सितंबर 2025 में ये कार खरीदी थी। जम्मू कश्मीर पुलिस से मिले इनपुट के बाद फरीदाबाद पुलिस की टीम ने यूनिवर्सिटी परिसर में कार ढूंढी और इसके आस-पास के इलाके को सील किया गया है। बम निरोधक दस्ता से भी कार की जांच कराई गई है।

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Delhi blast Brezza car found at Al-Falah University is being investigated by Jammu and Kashmir Police
बम निरोधक दस्ता पहुंचा - फोटो : अमर उजाला

शाहीन की दूसरी कार बरामद
इस सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल के तहत लखनऊ से गिरफ्तार की गई डॉ. शाहीन सईद से जम्मू कश्मीर पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है। इसी पूछताछ में पता चला है कि वो आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की कमांडर है। धौज स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी परिसर से 30 अक्तूबर को गिरफ्तार किए गए डॉ. मुज्जमिल अहमद गनेई उर्फ मुसैब से पूछताछ के बाद 8 नवंबर को इस केस में पहली स्विफ्ट कार बरामद हुई थी। ये कार भी डॉ. शाहीन के नाम पर थी और उसने डॉ. मुज्जमिल को ये कार प्रयोग करने के लिए दी थी। इसी कार से पहली बार 8 नवंबर को क्रिनकॉव राइफल, पिस्टल, मैगजीन व गोलियां मिले थे।

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क्लियरेंस के बाद ही कार को हाथ लगाएगी पुलिस
अब इस मामले में डॉ. शाहीन के नाम पर रजिस्टर्ड दूसरी ब्रेजा कार मिली है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो जम्मू कश्मीर पुलिस की पूछताछ में डॉ. शाहीन ने खुलासा किया है कि दोनों ही कारों का प्रयोग विस्फोटक लाकर फरीदाबाद में छुपाने में किया गया है। इसी वजह से पुलिस अभी कार को छू नहीं रही है। कार की जांच के लिए गुरुवार दोपहर बाद लगभग 4 बजे बम निरोधक दस्ता को यूनिवर्सिटी परिसर में बुलाया गया। बम निरोधक दस्ते की क्लियरेंस के बाद ही कार को यहां से जब्त कर टीम ले जाएगी।

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फरीदाबाद से खरीदी गई थी i20 कार
उधर लाल किले में हुए ब्लास्ट में इस्तेमाल की गई कार को फरीदाबाद से खरीदा गया था। आतंकियों ने ओएलएक्स के जरिये इसका सौदा किया था। इसके बाद वह फरीदाबाद आकर उसको ले गए थे। इस बात की पुष्टि फरीदाबाद के रॉयल कार जोन के मालिक अमित पटेल ने की। उन्होंने बताया कि कार खरीदने के लिए जो आई डी दी गई। उनमें जो पता था वो पुलवामा का था। उन्होंने यह भी कहा कि कार नाम कराने के लिए दिए गए समय से पहले ही दिल्ली में ब्लास्ट कर दिया गया।

आधार और दिया था पैन कार्ड
फरीदाबाद सेक्टर-37 स्थित रॉयल कार जोन के मालिक अमित पटेल ने बताया कि 29 अक्तूबर को ओएलएक्स के माध्यम से एक ग्राहक उनके पास आया था। उस ग्राहक को उनके ऑफिस स्टाफ सोनू ने हैंडल किया। ग्राहक ने हुंडई आई 20 कार मांगी थी। जिनको सोनू ने (मॉडल 2013 या 2014) का मॉडल दिखाया। उसके बाद उनको ग्राहक ने गाड़ी देखने के बाद तुरंत खरीदने का निर्णय लिया। कार को खरीदने के लिए जो दस्तावेज दिए गए उसमें उन्होंने आधार कार्ड और पैन कार्ड दिया था। जिस पर जम्मू-कश्मीर के पुलवामा का दर्ज था।

आरसी को ट्रांसफर के लिए मांगे थे 25 दिन
अमित पटेल ने बताया उनके स्टाफ ने डॉक्यूमेंटेशन पूरा करने के बाद 29 अक्टूबर की शाम करीब 4 बजे गाड़ी आमिर और रशीद नाम के दो व्यक्ति को सौंप दी। उनका कहना है अगर उनको थोड़ा भी शक होता तो वह गाड़ी नहीं देते। आमिर ने गाड़ी की आरसी को ट्रांसफर कराने के लिए 25 दिन का टाइम मांगा था। उन्होंने बताया कि जिस कार को बेचा गया, वह पहले से सेकेंड ओनर के नाम पर थी और आरसी में भी उसी का नाम दर्ज था। इसलिए आमिर रशीद को कहा गया कि 20-25 दिन बाद आरसी अपने नाम ट्रांसफर कराने के लिए आ जाएं।

ऑटो से आए थे कार लेने
अमित पटेल ने बताया कि कार का इंश्योरेंस की डेट अभी बची हुई थी। हालांकि उसका पॉल्यूशन सर्टिफिकेट एक्सपायर हो गया था। इस वजह से उन्होंने नजदीक के ही पेट्रोल पंप में उसका पॉल्यूशन सर्टिफिकेट भी बनवाया। इसके बाद वह कार लेकर चले गए। उन्होंने बताया कि कि आमिर और राशिद नाम के दो युवक कार खरीदने के लिए आए थे। वह दोनों एक ऑटो में गाड़ी लेने के लिए आए थे। उनके साथ एक अन्य व्यक्ति भी था लेकिन वह ऑटो से उतरकर नहीं आया। इसलिए वह उसको नहीं पहचान पाए।

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