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पीयूष अपहरण कांड: 9 वर्ष पहले हुआ था अपहरण, पीएमओ का आदेश फिर भी जांच शुरू नहीं
Sat, 19 Jan 2019 08:57 PM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
Published by: Priyesh Mishra
Updated Sat, 19 Jan 2019 08:57 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
एनआईटी-पांच से 20 जनवरी 2010 को अपहृत पांच साल के बच्चे की तलाश में पिछले नौ साल से बच्चे के माता-पिता भटक रहे हैं। पुलिस को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से आए आदेशों की भी कोई परवाह नहीं है। चार माह पहले बच्चे के पिता ने प्रधानमंत्री कार्यालय में जांच के लिए पत्र लिखा था। पीएमओ से आई चिट्ठी के बाद भी पुलिस ने अभी तक पीयूष अपहरण कांड की फाइल से धूल तक नहीं झाड़ी है। इतना ही नहीं पुलिस उपायुक्त से मिलने पहुंचे बच्चे के परिजनों पर जांच अधिकारी शिकायत लगाने की बात कहकर भड़क गए।
एनआईटी-पांच एफ ब्लाक निवासी अरुणा और राकेश वैद्य का पांच साल का बेटा पीयूष 20 जनवरी 2010 की शाम को अपने घर के सामने बने पार्क में खेल रहा था। शाम छह बजे के आसपास वह अचानक गायब हो गया। घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। रात को करीब आठ बजे पीयूष के पिता राकेश के पास एक फोन आया। फोन करने वाले ने पीयूष के अपहरण की बात कहते हुए 17.50 लाख रुपये की फिरौती मांगी। मामला पुलिस तक पहुंचा। घटना को लेकर शहर में खूब बवाल भी मचा, धरने प्रदर्शन हुए। पुलिस ने इस मामले को सुलझाने के भरसक प्रयास किए पर आज तक न तो पीयूष के बारे में कोई सुराग लगा और न ही अपहरणकर्ताओं के बारे में कोई जानकारी मिल सकी।
राकेश वैद्य ने बताया कि उन्होंने सितंबर 2018 को प्रधानमंत्री कार्यालय में भी पत्र लिखकर मामले की जांच करवाने की मांग की थी। वहां से उनके पास संदेश आया कि पुलिस मामले की दोबारा जांच करेगी। मगर कुछ नहीं हुआ। कई बार एनआईटी थाने में जांच अधिकारी से मिले, मगर कुछ नहीं हुआ। इस संबंध में जब उन्होंने पुलिस आयुक्त विक्रम कपूर से मुलाकात कर जांच अधिकारी बदलने की मांग की तो जांच अधिकारी उनसे नाराज हो गए। इसके बावजूद अभी तक मामले में पुलिस ने कुछ नहीं किया है।
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पुलिस को दिए कई सुराग, नहीं की जांच
राकेश वैद्य ने बताया कि उन्होंने मामले की जांच में जुटी पुलिस को कई सुराग दिए हैं, मगर पुलिस ने उस पर कभी गंभीरता से काम नहीं किया। उनके मोहल्ले में काम करने वाले एक व्यक्ति को पकड़ा था, जिसके पास करीब 30 मोबाइल फोन व चाबियां मिली थीं। मगर पुलिस ने आज तक उस व्यक्ति से कोई पूछताछ नहीं की।
डीएनए करवाने में भी लापरवाही
राकेश की पत्नी अरुणा वैद्य ने बताया कि वर्ष 2012 में पुलिस को पलवल में एक बच्चा मिला था। उसे कोई बोरे में बंद करके फेंक गया था। पुलिस उन्हें पलवल ले गई। अरुणा वैद्य ने उस बच्चे के पीयूष होने की आशंका जताई। साथ ही संतुष्टि के लिए उनका डीएनए टेस्ट करवाने की मांग की। अरुणा वैद्य का कहना है कि 9 साल बीतने के बाद कई जांच अधिकारी बदल गए। उन्होंने सभी से डीएनए टेस्ट करवाने की गुहार लगाई, मगर आज तक किसी ने टेस्ट नहीं करवाया।
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एनआईटी-पांच एफ ब्लाक निवासी अरुणा और राकेश वैद्य का पांच साल का बेटा पीयूष 20 जनवरी 2010 की शाम को अपने घर के सामने बने पार्क में खेल रहा था। शाम छह बजे के आसपास वह अचानक गायब हो गया। घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। रात को करीब आठ बजे पीयूष के पिता राकेश के पास एक फोन आया। फोन करने वाले ने पीयूष के अपहरण की बात कहते हुए 17.50 लाख रुपये की फिरौती मांगी। मामला पुलिस तक पहुंचा। घटना को लेकर शहर में खूब बवाल भी मचा, धरने प्रदर्शन हुए। पुलिस ने इस मामले को सुलझाने के भरसक प्रयास किए पर आज तक न तो पीयूष के बारे में कोई सुराग लगा और न ही अपहरणकर्ताओं के बारे में कोई जानकारी मिल सकी।
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राकेश वैद्य ने बताया कि उन्होंने सितंबर 2018 को प्रधानमंत्री कार्यालय में भी पत्र लिखकर मामले की जांच करवाने की मांग की थी। वहां से उनके पास संदेश आया कि पुलिस मामले की दोबारा जांच करेगी। मगर कुछ नहीं हुआ। कई बार एनआईटी थाने में जांच अधिकारी से मिले, मगर कुछ नहीं हुआ। इस संबंध में जब उन्होंने पुलिस आयुक्त विक्रम कपूर से मुलाकात कर जांच अधिकारी बदलने की मांग की तो जांच अधिकारी उनसे नाराज हो गए। इसके बावजूद अभी तक मामले में पुलिस ने कुछ नहीं किया है।
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पुलिस को दिए कई सुराग, नहीं की जांच
राकेश वैद्य ने बताया कि उन्होंने मामले की जांच में जुटी पुलिस को कई सुराग दिए हैं, मगर पुलिस ने उस पर कभी गंभीरता से काम नहीं किया। उनके मोहल्ले में काम करने वाले एक व्यक्ति को पकड़ा था, जिसके पास करीब 30 मोबाइल फोन व चाबियां मिली थीं। मगर पुलिस ने आज तक उस व्यक्ति से कोई पूछताछ नहीं की।
डीएनए करवाने में भी लापरवाही
राकेश की पत्नी अरुणा वैद्य ने बताया कि वर्ष 2012 में पुलिस को पलवल में एक बच्चा मिला था। उसे कोई बोरे में बंद करके फेंक गया था। पुलिस उन्हें पलवल ले गई। अरुणा वैद्य ने उस बच्चे के पीयूष होने की आशंका जताई। साथ ही संतुष्टि के लिए उनका डीएनए टेस्ट करवाने की मांग की। अरुणा वैद्य का कहना है कि 9 साल बीतने के बाद कई जांच अधिकारी बदल गए। उन्होंने सभी से डीएनए टेस्ट करवाने की गुहार लगाई, मगर आज तक किसी ने टेस्ट नहीं करवाया।