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आधार का बंटाधार वाया बिहार
Updated Wed, 22 Aug 2018 09:36 PM IST
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बैंक बंद होने के बाद बनाते थे आधार कार्ड
पुलिस को चिंता, गलत व्यक्ति का आधार कार्ड बनाने पर सुरक्षा को हो सकता है खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद।
अवैध रूप से आधार कार्ड बनाने के आरोपी दीपक और विकास ने देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दस्तावेज का सत्यापन किए बगैर आरोपी पांच सौ रुपये के लिए किसी का भी आधार कार्ड बना देते थे। ऐसे में अब पुलिस को चिंता सता रही है कि इन्होंने किसी गलत व्यक्ति का आधार कार्ड बना दिया, तो वह देश की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकता है।
साथी का लैपटॉप लेकर हो गया था फरार
क्राइम ब्रांच सेक्टर-56 के जांच अधिकारी अनूप सिंह ने बताया कि दीपक ने वर्ष 2015 में आधार कार्ड बनाने का काम किया था। वह जिस एजेंसी के पास काम करता था, उसका ठेका समाप्त होने के बाद वह वापस अपने गांव चला गया। कुछ दिन गांव में रहने के बाद वह पटना आया और वहां इलाहाबाद बैंक में आधार कार्ड बनाने का काम करने लगा। पुलिस के अनुसार, दीपक ने बताया कि अप्रैल 2017 में उससे अपने साथी राहुल यादव का लैपटॉप टूट गया था। इस पर दीपक ने उसे अपना लैपटॉप दे दिया और उसका लैपटॉप लेकर फरार हो गया। उसने दिल्ली आकर नेहरू प्लेस में उस लैपटॉप को ठीक करवाया। उसमें आधार का सारा डाटा मौजूद था। इसी सॉफ्टवेयर से उसने फरीदाबाद में आधार कार्ड बनाने का काम शुरू कर दिया।
शाम को करते थे काम
आरोपी दीपक आधार कार्ड बनाने और उसमें संशोधन की सारी प्रक्रिया जानता था। उसके पास इलाहाबाद बैंक की आईडी भी थी, जिससे उस डाटा को खोला जा सके। दिन में बैंक में काम के दौरान यदि वह उस आईडी को इस्तेमाल करता तो पकड़े जाने का डर था। लैपटॉप में जीपीएस लगा होने के कारण बैंक में पता चल जाता कि आईडी और लैपटॉप कहीं और इस्तेमाल हो रहे हैं। इस पर उसने शाम को बैंक बंद होने के बाद काम करने की योजना बनाई। वह शाम को 5 बजे से रात 10 बजे तक आधार कार्ड बनाता और उनमें संशोधन करता था। इस दौरान बैंक बंद होने के कारण अगले दिन उस पर किसी का ध्यान नहीं जाता था। हालांकि पुलिस का कहना है कि ऐसा संभव नहीं है। बैंक अधिकारियों को यह पता नहीं चला कि पिछले छह-आठ माह से बैंक की आईडी और लैपटॉप जिस युवक के पास है, वह लापता है। उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। पुलिस की एक टीम जल्द ही पटना जाएगी। वहां जाकर पता चलेगा कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, यह भी पता किया जाएगा।
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पहले भी दर्ज हो चुका है धोखाधड़ी का मामला
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि दीपक के खिलाफ इस साल जनवरी में थाना कोतवाली में भी धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज हुआ था। उसने एक बुजुर्ग के खाते से ऑनलाइन 50 हजार रुपये निकाल लिए थे। इस मामले में पुलिस उसे पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और मामला अदालत में विचाराधीन है।
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पुलिस को चिंता, गलत व्यक्ति का आधार कार्ड बनाने पर सुरक्षा को हो सकता है खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद।
अवैध रूप से आधार कार्ड बनाने के आरोपी दीपक और विकास ने देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दस्तावेज का सत्यापन किए बगैर आरोपी पांच सौ रुपये के लिए किसी का भी आधार कार्ड बना देते थे। ऐसे में अब पुलिस को चिंता सता रही है कि इन्होंने किसी गलत व्यक्ति का आधार कार्ड बना दिया, तो वह देश की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकता है।
साथी का लैपटॉप लेकर हो गया था फरार
क्राइम ब्रांच सेक्टर-56 के जांच अधिकारी अनूप सिंह ने बताया कि दीपक ने वर्ष 2015 में आधार कार्ड बनाने का काम किया था। वह जिस एजेंसी के पास काम करता था, उसका ठेका समाप्त होने के बाद वह वापस अपने गांव चला गया। कुछ दिन गांव में रहने के बाद वह पटना आया और वहां इलाहाबाद बैंक में आधार कार्ड बनाने का काम करने लगा। पुलिस के अनुसार, दीपक ने बताया कि अप्रैल 2017 में उससे अपने साथी राहुल यादव का लैपटॉप टूट गया था। इस पर दीपक ने उसे अपना लैपटॉप दे दिया और उसका लैपटॉप लेकर फरार हो गया। उसने दिल्ली आकर नेहरू प्लेस में उस लैपटॉप को ठीक करवाया। उसमें आधार का सारा डाटा मौजूद था। इसी सॉफ्टवेयर से उसने फरीदाबाद में आधार कार्ड बनाने का काम शुरू कर दिया।
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शाम को करते थे काम
आरोपी दीपक आधार कार्ड बनाने और उसमें संशोधन की सारी प्रक्रिया जानता था। उसके पास इलाहाबाद बैंक की आईडी भी थी, जिससे उस डाटा को खोला जा सके। दिन में बैंक में काम के दौरान यदि वह उस आईडी को इस्तेमाल करता तो पकड़े जाने का डर था। लैपटॉप में जीपीएस लगा होने के कारण बैंक में पता चल जाता कि आईडी और लैपटॉप कहीं और इस्तेमाल हो रहे हैं। इस पर उसने शाम को बैंक बंद होने के बाद काम करने की योजना बनाई। वह शाम को 5 बजे से रात 10 बजे तक आधार कार्ड बनाता और उनमें संशोधन करता था। इस दौरान बैंक बंद होने के कारण अगले दिन उस पर किसी का ध्यान नहीं जाता था। हालांकि पुलिस का कहना है कि ऐसा संभव नहीं है। बैंक अधिकारियों को यह पता नहीं चला कि पिछले छह-आठ माह से बैंक की आईडी और लैपटॉप जिस युवक के पास है, वह लापता है। उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। पुलिस की एक टीम जल्द ही पटना जाएगी। वहां जाकर पता चलेगा कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, यह भी पता किया जाएगा।
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पहले भी दर्ज हो चुका है धोखाधड़ी का मामला
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि दीपक के खिलाफ इस साल जनवरी में थाना कोतवाली में भी धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज हुआ था। उसने एक बुजुर्ग के खाते से ऑनलाइन 50 हजार रुपये निकाल लिए थे। इस मामले में पुलिस उसे पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और मामला अदालत में विचाराधीन है।