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निलंबित एसटीपी सतीश पाराशर के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज
Updated Fri, 20 Apr 2018 06:12 PM IST
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निलंबित एसटीपी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज
फरीदाबाद। अरावली संरक्षित भूमि में सशर्त सीएलयू जारी करने के बाद चर्चा में आए वरिष्ठ नगर योजनाकार (एसटीपी) सतीश पाराशर के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि ओल्ड फरीदाबाद जोन में संयुक्त आयुक्त रहते हुए उन्होंने अपनी ही मातहत महिला कर्मी के फर्जी दस्तावेज पर डेयरी स्कीम का प्लॉट दे दिया था।
आरटीआई कार्यकर्ता वरुण श्योकंद के मुताबिक, वर्ष 2013 में सरकार ने ओल्ड फरीदाबाद के डेयरी उद्योगों को बसाने के लिए गांव बसेलवा में डेयरी स्कीम चलाई थी। उस समय सतीश पाराशर ओल्ड फरीदाबाद नगर निगम के संयुक्त आयुक्त थे। आरोप है कि पाराशर ने डेयरी स्कीम के तहत हितेंद्र नाम के व्यक्ति के नाम प्लॉट नंबर 113 अलॉट कर दिया। अलॉटमेंट में हितेंद्र के हक में जो जनरल पावर ऑफ अटार्नी (जीपीए) लगाई गई थी वह सतीश के दफ्तर में कार्यरत महिला लिपिक सुनीता डागर के नाम से जारी हुई थी। यह जीपीए सागर मध्यप्रदेश से जारी था। वरुण के मुताबिक, उन्होंने आरटीआई डाल कर जीपीए की जानकारी मांगी, सागर, मध्यप्रदेश के तहसीलदार ने सूचना दी कि इस तरह की जीपीए उनके कार्यालय में पंजीकृत नहीं है। आरोप है कि पाराशर ने फर्जी जीपीए के आधार पर प्लॉट सुनीता डागर के नाम ट्रांसफर कर दिया। यह भी आरोप है कि सुनीता और सतीश दोनों ही नगर निगम में कई साल के कार्यरत हैं इसलिए दोनों ने जानबूझ कर फर्जी दस्तावेज लगाकर सरकारी प्लॉट हड़पने का काम किया। वरुण ने इसकी शिकायत न्यायालय में की थी, न्यायालय के आदेश पर ओल्ड फरीदाबाद थाने में केस दर्ज किया गया। एसएचओ ओल्ड ने बताया कि धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज निर्माण, साजिश रचना, सुबूत मिटाने और जान से मारने की धमकी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
फरीदाबाद। अरावली संरक्षित भूमि में सशर्त सीएलयू जारी करने के बाद चर्चा में आए वरिष्ठ नगर योजनाकार (एसटीपी) सतीश पाराशर के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि ओल्ड फरीदाबाद जोन में संयुक्त आयुक्त रहते हुए उन्होंने अपनी ही मातहत महिला कर्मी के फर्जी दस्तावेज पर डेयरी स्कीम का प्लॉट दे दिया था।
आरटीआई कार्यकर्ता वरुण श्योकंद के मुताबिक, वर्ष 2013 में सरकार ने ओल्ड फरीदाबाद के डेयरी उद्योगों को बसाने के लिए गांव बसेलवा में डेयरी स्कीम चलाई थी। उस समय सतीश पाराशर ओल्ड फरीदाबाद नगर निगम के संयुक्त आयुक्त थे। आरोप है कि पाराशर ने डेयरी स्कीम के तहत हितेंद्र नाम के व्यक्ति के नाम प्लॉट नंबर 113 अलॉट कर दिया। अलॉटमेंट में हितेंद्र के हक में जो जनरल पावर ऑफ अटार्नी (जीपीए) लगाई गई थी वह सतीश के दफ्तर में कार्यरत महिला लिपिक सुनीता डागर के नाम से जारी हुई थी। यह जीपीए सागर मध्यप्रदेश से जारी था। वरुण के मुताबिक, उन्होंने आरटीआई डाल कर जीपीए की जानकारी मांगी, सागर, मध्यप्रदेश के तहसीलदार ने सूचना दी कि इस तरह की जीपीए उनके कार्यालय में पंजीकृत नहीं है। आरोप है कि पाराशर ने फर्जी जीपीए के आधार पर प्लॉट सुनीता डागर के नाम ट्रांसफर कर दिया। यह भी आरोप है कि सुनीता और सतीश दोनों ही नगर निगम में कई साल के कार्यरत हैं इसलिए दोनों ने जानबूझ कर फर्जी दस्तावेज लगाकर सरकारी प्लॉट हड़पने का काम किया। वरुण ने इसकी शिकायत न्यायालय में की थी, न्यायालय के आदेश पर ओल्ड फरीदाबाद थाने में केस दर्ज किया गया। एसएचओ ओल्ड ने बताया कि धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज निर्माण, साजिश रचना, सुबूत मिटाने और जान से मारने की धमकी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
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