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फरीदाबाद : ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में शुरू हुआ प्लाज्मा थैरेपी से इलाज
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फरीदाबाद। कोरोना संक्रमण से मात देने वाले लोगों का रक्त अब संक्रमितों के लिए इलाज का जरिया बन रहा है। करीब 20 दिन पहले कोरोना को मात देकर लौटे सेक्टर-28 निवासी ने अपने प्लाज्मा के जरिए कोरोना संक्रमित को ठीक करने में योगदान दिया है। सोमवार रात मरीज को प्लाज्मा की पहली डोज दी गई है। दूसरी डोज मंगलवार को दी गई है। अब डॉक्टर मरीज की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। बेहतर परिणाम आने पर अन्य मरीजों का भी प्लाज्मा थेरेपी से इलाज शुरू किया जाएगा।
एनआईटी तीन स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल हरियाणा प्रदेश का पहला ऐसा सरकारी अस्पताल है। जहां आईसीएमआर की मंजूरी मिलने के बाद प्लाज्मा थेरेपी से इलाज शुरू हुआ है। पीड़ित मरीज को प्लाज्मा डोनेट सेक्टर-28 निवासी संजीव शर्मा ने किया। वह कोरोना संक्रमित थे। हाल में ईएसआईसी अस्पताल से डिस्चार्ज हुए। डिस्चार्ज के दौरान उन्हें डॉक्टरों ने अस्पताल में प्लाज्मा थेरेपी से इलाज शुरू होने के विषय में बताया था और उनसे प्लाज्मा डोनेशन के लिए कहा गया। संजीव वर्मा ने बताया कि शुरुआत में उन्हें संकोच हुआ, मगर उन्होंने दूसरे की जान बचाने के लिए तुरंत हां कर दी। उन्होंने बताया वह स्वयं हेल्थ केयर सेक्टर से है। दिल्ली हार्ट इंस्टीट्यूट के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर है। संजीव ने बताया कि अप्रैल में उन्हें और उनके परिवार को कोरोना हुआ था। उनमें कोरोना के लक्षण पाए गए थे, मगर परिवार के अन्य सदस्यों में कोई लक्षण नहीं मिले।
प्लाज्मा डोनेशन के लिए आगे आएं
संजीव शर्मा ने लोगों ने अपील करते हुए कहा कि कोरोना संकट में सभी लोगों को एक दूसरे की मदद करनी चाहिए। जो लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं, वह स्वयं डॉक्टरों के पास जाकर प्लाज्मा डोनेट करें, जिससे किसी दूसरी की जान भी बच सके।
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प्लाज्मा डोनेशन के प्रति लोगों को जागरूक करना जरूरी
प्लाज्मा थेरेपी से इलाज केवल उसी मरीज का किया जाता है जो गंभीर हालत में हो और उसे सांस लेने में तकलीफ होती है। प्लाज्मा डोनेशन के प्रति लोगों में जागरूकता का भी अभाव है। इसलिए लोगों को आगे आने की जरूरत है। कोरोना से ठीक हो चुके लोगों का सहयोग कोरोना को हराने में हमारी मदद करेगा। - डॉ. असीम दास, डीन, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल
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एनआईटी तीन स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल हरियाणा प्रदेश का पहला ऐसा सरकारी अस्पताल है। जहां आईसीएमआर की मंजूरी मिलने के बाद प्लाज्मा थेरेपी से इलाज शुरू हुआ है। पीड़ित मरीज को प्लाज्मा डोनेट सेक्टर-28 निवासी संजीव शर्मा ने किया। वह कोरोना संक्रमित थे। हाल में ईएसआईसी अस्पताल से डिस्चार्ज हुए। डिस्चार्ज के दौरान उन्हें डॉक्टरों ने अस्पताल में प्लाज्मा थेरेपी से इलाज शुरू होने के विषय में बताया था और उनसे प्लाज्मा डोनेशन के लिए कहा गया। संजीव वर्मा ने बताया कि शुरुआत में उन्हें संकोच हुआ, मगर उन्होंने दूसरे की जान बचाने के लिए तुरंत हां कर दी। उन्होंने बताया वह स्वयं हेल्थ केयर सेक्टर से है। दिल्ली हार्ट इंस्टीट्यूट के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर है। संजीव ने बताया कि अप्रैल में उन्हें और उनके परिवार को कोरोना हुआ था। उनमें कोरोना के लक्षण पाए गए थे, मगर परिवार के अन्य सदस्यों में कोई लक्षण नहीं मिले।
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प्लाज्मा डोनेशन के लिए आगे आएं
संजीव शर्मा ने लोगों ने अपील करते हुए कहा कि कोरोना संकट में सभी लोगों को एक दूसरे की मदद करनी चाहिए। जो लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं, वह स्वयं डॉक्टरों के पास जाकर प्लाज्मा डोनेट करें, जिससे किसी दूसरी की जान भी बच सके।
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प्लाज्मा डोनेशन के प्रति लोगों को जागरूक करना जरूरी
प्लाज्मा थेरेपी से इलाज केवल उसी मरीज का किया जाता है जो गंभीर हालत में हो और उसे सांस लेने में तकलीफ होती है। प्लाज्मा डोनेशन के प्रति लोगों में जागरूकता का भी अभाव है। इसलिए लोगों को आगे आने की जरूरत है। कोरोना से ठीक हो चुके लोगों का सहयोग कोरोना को हराने में हमारी मदद करेगा। - डॉ. असीम दास, डीन, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल