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Faridabad News: बीके अस्पताल की लापरवाही उजागर, पार्क में पड़े हैं मरीजों के पुराने दस्तावेज
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मोबाइल नंबर, घर का पता, आधार कार्ड की प्रतियां और मेडिकल रिपोर्ट शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके अस्पताल में मरीजों की गोपनीय जानकारी खतरे में पड़ गई है। सीएमओ कार्यालय के ठीक सामने स्थित पार्क में मरीजों के पुराने दस्तावेज खुले में पड़े हुए मिले हैं। इनमें मरीजों के मोबाइल नंबर, घर का पता, आधार कार्ड की प्रतियां, मेडिकल रिपोर्ट सहित अन्य संवेदनशील जानकारी शामिल हैं।
दस्तावेजों की हालत देखकर साफ है कि ये करीब पांच साल पुराने हैं, लेकिन इन्हें सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की बजाय खुले में फेंक दिया गया। स्थानीय लोगों और अस्पताल आने वाले मरीजों ने जब इन दस्तावेजों को देखा तो हैरानी जताई। कई लोगों ने इसे निजता के हनन का गंभीर मामला बताया और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया।
लापरवाही से सवालों के घेरे में अस्पताल प्रबंधन
घटना यह दिखाती है कि मरीजों की गोपनीय जानकारी को सुरक्षित रखने को लेकर अस्पताल प्रशासन कितनी गंभीरता बरत रहा है। सरकारी नियमों के अनुसार, मरीजों से जुड़ी निजी जानकारी को एक निश्चित समय तक सुरक्षित रखना और फिर नियमों के तहत नष्ट करना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां न तो नियमों का पालन हुआ और न ही जिम्मेदारी का निर्वहन।
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वर्जन
मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यदि ऐसा कुछ है तो इसके बारे में जांच की जाएगी। - डॉ. विकास गोयल, एसएमओ
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके अस्पताल में मरीजों की गोपनीय जानकारी खतरे में पड़ गई है। सीएमओ कार्यालय के ठीक सामने स्थित पार्क में मरीजों के पुराने दस्तावेज खुले में पड़े हुए मिले हैं। इनमें मरीजों के मोबाइल नंबर, घर का पता, आधार कार्ड की प्रतियां, मेडिकल रिपोर्ट सहित अन्य संवेदनशील जानकारी शामिल हैं।
दस्तावेजों की हालत देखकर साफ है कि ये करीब पांच साल पुराने हैं, लेकिन इन्हें सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की बजाय खुले में फेंक दिया गया। स्थानीय लोगों और अस्पताल आने वाले मरीजों ने जब इन दस्तावेजों को देखा तो हैरानी जताई। कई लोगों ने इसे निजता के हनन का गंभीर मामला बताया और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया।
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लापरवाही से सवालों के घेरे में अस्पताल प्रबंधन
घटना यह दिखाती है कि मरीजों की गोपनीय जानकारी को सुरक्षित रखने को लेकर अस्पताल प्रशासन कितनी गंभीरता बरत रहा है। सरकारी नियमों के अनुसार, मरीजों से जुड़ी निजी जानकारी को एक निश्चित समय तक सुरक्षित रखना और फिर नियमों के तहत नष्ट करना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां न तो नियमों का पालन हुआ और न ही जिम्मेदारी का निर्वहन।
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मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यदि ऐसा कुछ है तो इसके बारे में जांच की जाएगी। - डॉ. विकास गोयल, एसएमओ