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Faridabad News: बसंत पंचमी आज, सेक्टरों और सोसाइटियों में सरस्वती पूजन व भंडारों का होगा आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर बसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। घरों, स्कूलों, शिक्षण संस्थानों और मंदिरों में मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाएगी। विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक मां सरस्वती से विद्या, बुद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करेंगे।
शहर के एनआईटी, एसजीएम नगर, एसी नगर सहित अलग-अलग सेक्टरों और रिहायशी सोसाइटियों में भी बसंत पंचमी पर्व को सामूहिक रूप से मनाया जाएगा। कई स्थानों पर सरस्वती पूजन के साथ भंडारे और प्रसाद वितरण किया जाएगा। लोग पीले वस्त्र धारण कर पूजा में शामिल होगें। बसंत पंचमी पर घरों में पीले चावल, हलवा और मालपुआ जैसे पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं।
बसंत पंचमी को लेकर बाजारों में भी चहल-पहल बनी हुई है। सरस्वती पूजन के लिए मूर्तियों की जमकर खरीदारी की गई है। मूर्ति विक्रेताओं के अनुसार इस बार छोटी-बड़ी प्रतिमाओं की मांग अधिक रही है।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी को मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस माना जाता है। इस दिन से बसंत ऋतु का आगमन माना जाता है, जो नई ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है। ज्योतिष शास्त्र में इस दिन को अबूझ मुहूर्त माना गया है, जिसके चलते आज गृह प्रवेश और अन्य शुभ संस्कार भी संपन्न किए जा रहे हैं।
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फरीदाबाद। माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर बसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। घरों, स्कूलों, शिक्षण संस्थानों और मंदिरों में मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाएगी। विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक मां सरस्वती से विद्या, बुद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करेंगे।
शहर के एनआईटी, एसजीएम नगर, एसी नगर सहित अलग-अलग सेक्टरों और रिहायशी सोसाइटियों में भी बसंत पंचमी पर्व को सामूहिक रूप से मनाया जाएगा। कई स्थानों पर सरस्वती पूजन के साथ भंडारे और प्रसाद वितरण किया जाएगा। लोग पीले वस्त्र धारण कर पूजा में शामिल होगें। बसंत पंचमी पर घरों में पीले चावल, हलवा और मालपुआ जैसे पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं।
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बसंत पंचमी को लेकर बाजारों में भी चहल-पहल बनी हुई है। सरस्वती पूजन के लिए मूर्तियों की जमकर खरीदारी की गई है। मूर्ति विक्रेताओं के अनुसार इस बार छोटी-बड़ी प्रतिमाओं की मांग अधिक रही है।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी को मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस माना जाता है। इस दिन से बसंत ऋतु का आगमन माना जाता है, जो नई ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है। ज्योतिष शास्त्र में इस दिन को अबूझ मुहूर्त माना गया है, जिसके चलते आज गृह प्रवेश और अन्य शुभ संस्कार भी संपन्न किए जा रहे हैं।