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पुलिस न मिलने से अरूआ गांव में नहीं हुई तोड़फोड़
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बल्लभगढ़। गांव अरूआ और साहपुरा खादर में लाल डोरा से बाहर पंचायती जमीन पर बने अवैध निर्माणों को तोड़ने का आदेश एसडीएम ने दिया हुआ है। लेकिन बृहस्पतिवार को पुलिसकर्मी नहीं मिलने की वजह से तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं हुई है।
स्थानीय निवासी अरुण ने बताया कि साल 1965 में यमुना नदी में बाढ़ आई थी। उस समय यह गांव पानी में डूब गया था। गांव की हालत को देखने के लिए तत्कालीन उपायुक्त ने कहा था कि लोग पंचायती जमीन पर जाकर बस जाएं। उस समय गांव की आबादी 800 थी, लेकिन अब यह संख्या आठ हजार तक पहुंच गई है। कुछ ग्रामीण लोकायुक्त के पास चले गए। लोकायुक्त ने मामले की सुनवाई करने के लिए पूर्व एसडीएम अपराजिता को आदेश दे दिए। पूर्व एसडीएम ने तोड़फोड़ की कार्रवाई के आदेश दिए हैं, लेकिन पुलिस बल नहीं मिलने से तोड़फोड़ नहीं हुई है। वहीं दूसरी ओर कार्रवाई टलने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। ग्रामीण विजयपाल भारद्वाज ने बताया कि बुधवार को सभी केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर से दिल्ली में मिले थे। गांव लगभग 200 साल पुराना बसा हुआ है। गांव के पूर्व सरपंच देवेंद्र गोयल ने बताया कि गांव का लाल डोरा यमुना में कट गया था, उस कारण लगभग 95 प्रतिशत आबादी शामलात देह व तोसी आबादी देह में बसी हुई है।
करोड़ों रुपये के हुए है विकास कार्य
लोगों के मुताबिक, गांव अरूआ एक स्मार्ट विलेज है। इसके विकास के लिए सरपंच द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके है। गांव में 4 बारात घर हैं। हर बारात घर दो एकड़ में करीब दो करोड़ की लागत से बनाए गए हैं। एक लघु सचिवालय भी बना है। जिसमें पटवारी, सरपंच, सेक्रेटरी व सीएससी सेंटर है। वहीं चौपाल में 90 इंज की 6 एलईडी लगी हैं। गांववासियों की सुरक्षा के लिए 875 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। बारात घर से लेकर स्ट्रीट लाइट में सोलर पैनल लगाए हुए हैं।
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तिगांव तहसील में भी हुई बैठक
गांव अरूआ के लोग बृहस्पतिवार को तोड़फोड़ रुकवाने के लिए तिगांव तहसील पहुंचे। जहां नायब तहसीलदार अजय कुमार से मिले। नायब तहसीलदार ने बताया कि वह सिर्फ उच्चाधिकारियों के आदेश का पालन कर रहे हैं। वहीं विधायक राजेश नागर ने गांव पहुंचकर फोन से डीसी और एसडीएम से बात की। इसके बाद भी कोई हल नहीं निकला। ग्रामवासी शुक्रवार को डीसी से कार्रवाई पर स्टे की अपील करेंगे।
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स्थानीय निवासी अरुण ने बताया कि साल 1965 में यमुना नदी में बाढ़ आई थी। उस समय यह गांव पानी में डूब गया था। गांव की हालत को देखने के लिए तत्कालीन उपायुक्त ने कहा था कि लोग पंचायती जमीन पर जाकर बस जाएं। उस समय गांव की आबादी 800 थी, लेकिन अब यह संख्या आठ हजार तक पहुंच गई है। कुछ ग्रामीण लोकायुक्त के पास चले गए। लोकायुक्त ने मामले की सुनवाई करने के लिए पूर्व एसडीएम अपराजिता को आदेश दे दिए। पूर्व एसडीएम ने तोड़फोड़ की कार्रवाई के आदेश दिए हैं, लेकिन पुलिस बल नहीं मिलने से तोड़फोड़ नहीं हुई है। वहीं दूसरी ओर कार्रवाई टलने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। ग्रामीण विजयपाल भारद्वाज ने बताया कि बुधवार को सभी केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर से दिल्ली में मिले थे। गांव लगभग 200 साल पुराना बसा हुआ है। गांव के पूर्व सरपंच देवेंद्र गोयल ने बताया कि गांव का लाल डोरा यमुना में कट गया था, उस कारण लगभग 95 प्रतिशत आबादी शामलात देह व तोसी आबादी देह में बसी हुई है।
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करोड़ों रुपये के हुए है विकास कार्य
लोगों के मुताबिक, गांव अरूआ एक स्मार्ट विलेज है। इसके विकास के लिए सरपंच द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके है। गांव में 4 बारात घर हैं। हर बारात घर दो एकड़ में करीब दो करोड़ की लागत से बनाए गए हैं। एक लघु सचिवालय भी बना है। जिसमें पटवारी, सरपंच, सेक्रेटरी व सीएससी सेंटर है। वहीं चौपाल में 90 इंज की 6 एलईडी लगी हैं। गांववासियों की सुरक्षा के लिए 875 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। बारात घर से लेकर स्ट्रीट लाइट में सोलर पैनल लगाए हुए हैं।
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तिगांव तहसील में भी हुई बैठक
गांव अरूआ के लोग बृहस्पतिवार को तोड़फोड़ रुकवाने के लिए तिगांव तहसील पहुंचे। जहां नायब तहसीलदार अजय कुमार से मिले। नायब तहसीलदार ने बताया कि वह सिर्फ उच्चाधिकारियों के आदेश का पालन कर रहे हैं। वहीं विधायक राजेश नागर ने गांव पहुंचकर फोन से डीसी और एसडीएम से बात की। इसके बाद भी कोई हल नहीं निकला। ग्रामवासी शुक्रवार को डीसी से कार्रवाई पर स्टे की अपील करेंगे।