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Faridabad News: डस्ट सेपरेशन केमिकल से नियंत्रित होगा वायु प्रदूषण

Thu, 12 Oct 2023 11:33 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 12 Oct 2023 11:33 PM IST
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Air pollution control to the dust separation chemical
- एंटी स्माॅग गन में पानी के साथ होगा केमिकल का प्रयोग, छह घंटे तक रहेगा असर
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मनोज धर द्विवेदी
फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए नगर निगम डस्ट सेपरेशन केमिकल का प्रयोग करने जा रहा है। केमिकल को एंटी स्मॉग गन के जरिए धूल वाली जगहों पर पानी के साथ छिड़काव किया जाएगा। केमिकल से धूल के कण आपस में जुड़कर बड़े कण बन जाते हैं और हवा में उड़ते नहीं हैं। इससे आम लोगों को कोई नुकसान नहीं है। एक लीटर केमिकल को 100 लीटर पानी में प्रयोग किया जाता है। इसका असर छह घंटे तक रहता है।
जिले में प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। ग्रैप के तहत कड़ी पाबंदियां लागू होने के बाद भी इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल रहा है। ऐसे में नगर निगम ने इसे लेकर कुछ अलग तैयारी कर रहा हैं ताकि प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सके। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के तहत इस साल करीब 19.38 करोड़ रुपये दिया है। इसी पैसे से डस्ट सेपरेशन केमिकल का भी प्रयोग होगा।
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नगर निगम के कार्यकारी अभियंता नितिन कादियान ने बताया कि इस बार डस्ट सेपरेटर केमिकल का प्रयोग करने की तैयारी है। उन्होंने बताया कि बाजार में क्रिस्टल और तरल रूप में पदार्थ उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग का भी इसे लेकर दिशा निर्देश है। ऐसे में निगम पहली बार धूल को नियंत्रित करने के लिए कैमिकल का प्रयोग करने जा रहा है। इससे ज्यादा धूल वाले छात्रों में प्रयोग किया जाएगा। अभियंता ने बताया कि सड़कों पर डस्ट रोकने के लिए 17 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं, इसमें सड़कों के बनाने, पैच वर्क और ग्रीन वेल्ट, पानी का छिड़काव कराने समेत अन्य कार्य हैं। वहीं, 1.5 करोड़ से दो एंटी स्मॉग गन मशीन ली जाएगी। पानी छिड़काव के लिए 60 लाख खर्च होंगे।
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बार-बार पानी के छिड़काव की जरूरत नहीं
नगर निगम के जेई जतिन यादव ने बताया कि पानी के छिड़काव का असर सड़कों पर आधे घंटे तक रहता है। उन्होंने बताया कि केमिकल युक्त पानी के छिड़काव से पांच-छह घंटे तक धूल नियंत्रित रहती है। डस्ट सेपरेशन केमिकल से सड़कों पर बार-बार पानी के छिड़काव की जरूरत नहीं होगी। इससे टैंकरों का प्रयोग अन्य क्षेत्रों में किया जा सकेगा।
इस तरह काम करेगा
निगम के अनुसार बाजार में डस्ट सेपरेशन केमिकल कई कंपनियों के उपलब्ध हैं। इसमें डस्टोविल (तरल), मैगनीशियम क्लोरियम, हेक्साक्लोराइड समेत अन्य केमिकल क्रिस्टल रूप में भी उपलब्ध है। एक लीटर केमिकल का 100 लीटर पानी में प्रयोग होता हैं। सामान्य रूप से केमिकल की कीमत 300 रुपये प्रति लीटर है। जेई के बताया कि जब एंटी स्मॉग गन से पानी में केमिकल डालकर छिड़काव करने पर धूल के अतिसूक्ष्म कणों को मिलकर भारी कण बन जाएंगे। भारी कण होने से लंबे समय तक जमीन पर रहते हैं और ज्यादा उड़ते नहीं हैं। नगर निगम पर करीब पांच से 10 लाख रुपये खर्च करेगा।
एनजीओ की मदद से होगा सर्वे
दूसरी ओर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने नगर निगम से प्रदूषण को लेकर एक सलाहकार रखने को कहा है। इस पर सलाहकार एजेंसी काम करना शुरू कर दी है। इसके लिए वार्ड स्तर पर टूटी सड़कें, कूड़ा, सीएंडडी समेत अन्य का सर्वे कर उसी अनुसार कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए नगर निगम एप 311 के लिए ऐसे स्थानों को ऑनलाइन करेगा। जिससे इसकी जानकारी संबंधित टीम को मिलती रहे।

निगम वायु प्रदूषण को लेकर कई कदम उठा रहा है। इसके तहत डस्ट सेपरेशन केमिकल का प्रयोग करने की तैयारी है। इसका प्रस्ताव बनाकर आयुक्त के पास भेजा गया है।

- नितिन कादियान, कार्यकारी अभियंता नगर निगम
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