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फज्र की नमाज अदा कर बन जाते हैं कृष्ण, जवाब में बोलते हैं...राधे-राधे
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फरीदाबाद सूरजकुंड मेले में श्रीकृष्ण बना नौशाद ।
- फोटो : Faridabad
फरीदाबाद। सुबह उठकर फज्र की नमाज से अल्लाह की इबादत के साथ दिन की शुरुआत करने वाले नौशाद दिन चढ़ते ही भगवान कृष्ण की वेशभूषा में मेले में आ जाते हैं। दिनभर देवता का रूप धरे उन्हें यह याद ही नहीं रहता कि कितनी बार उन्होंने हाथ जोड़े लोगों का अभिवादन स्वीकार किया और कितनी बार जय श्री कृष्ण के जवाब में राधे-राधे कहा। शाम ढलने के साथ ही नहा धोकर फिर नमाज के लिए चले जाते हैं। मुस्लिम होकर भी हिंदू देवताओं का किरदार निभाकर सांप्रदायिक एकता की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं।
मेले में कृष्ण को देख जब लोग हाथ जोड़ते हैं तो हल्की सी मुस्कान के साथ उन्हें राधे-राधे का जवाब मिलता है। परिचय पूछने पर यह खुद को यशोदा का लाल और मथुरा का वासी बताते हैं। कृष्ण के रूप में बृज भाषा बोलते हैं। राजस्थान से अपने परिवार के साथ मेले में पहुंचे नौशाद का परिवार अलग-अलग वेशभूषा में लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। इस्लाम के नियम के साथ हिंदू देव बनने तक के सफर के बारे में पूछने पर कहते हैं कि जब वह शिव, कृष्ण या नारद के भेष में होते हैं तो उन्हें पता ही नहीं चलता की वह किस धर्म से हैं। लोग श्रद्धा से सिर झुकाते हैं तो अपने आप ही संस्कृत के श्लोक और देवों की वाणी मुंह से निकलती है।
उनका कहना है कि कलाकार का धर्म कला ही होता है और कुछ नहीं। राजस्थान के दौसा जिले में रहने वाले वाले नौशाद का पूरा परिवार कई सालों से मेले में आ रहा है। उनका कहना है की पीढ़ियों से उनके पूर्वज बहरुपिये की कला को आगे बढ़ा रहे हैं। हिंदू देवी देवताओं के रूप धरकर वह गंगा जमुनी संस्कृति को मजबूत करने में लगे हुए हैं। उनके परिवार से शमशाद, फरीद, फिरोज और गुलशन भी साथ आए हैं। अलग अलग दिन परिवार के सभी सदस्य अलग अलग रोल निभाते हैं। खान बंधुओं का कहना है कि मुस्लिम की आंख से राम दिखे और हिंदू की आंख से अल्लाह। तभी हम धर्म के नाम पर होय रहे फिजूल के झगड़ों पर अपनी जीत हासिल कर सकेंगे।
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मेले में कृष्ण को देख जब लोग हाथ जोड़ते हैं तो हल्की सी मुस्कान के साथ उन्हें राधे-राधे का जवाब मिलता है। परिचय पूछने पर यह खुद को यशोदा का लाल और मथुरा का वासी बताते हैं। कृष्ण के रूप में बृज भाषा बोलते हैं। राजस्थान से अपने परिवार के साथ मेले में पहुंचे नौशाद का परिवार अलग-अलग वेशभूषा में लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। इस्लाम के नियम के साथ हिंदू देव बनने तक के सफर के बारे में पूछने पर कहते हैं कि जब वह शिव, कृष्ण या नारद के भेष में होते हैं तो उन्हें पता ही नहीं चलता की वह किस धर्म से हैं। लोग श्रद्धा से सिर झुकाते हैं तो अपने आप ही संस्कृत के श्लोक और देवों की वाणी मुंह से निकलती है।
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उनका कहना है कि कलाकार का धर्म कला ही होता है और कुछ नहीं। राजस्थान के दौसा जिले में रहने वाले वाले नौशाद का पूरा परिवार कई सालों से मेले में आ रहा है। उनका कहना है की पीढ़ियों से उनके पूर्वज बहरुपिये की कला को आगे बढ़ा रहे हैं। हिंदू देवी देवताओं के रूप धरकर वह गंगा जमुनी संस्कृति को मजबूत करने में लगे हुए हैं। उनके परिवार से शमशाद, फरीद, फिरोज और गुलशन भी साथ आए हैं। अलग अलग दिन परिवार के सभी सदस्य अलग अलग रोल निभाते हैं। खान बंधुओं का कहना है कि मुस्लिम की आंख से राम दिखे और हिंदू की आंख से अल्लाह। तभी हम धर्म के नाम पर होय रहे फिजूल के झगड़ों पर अपनी जीत हासिल कर सकेंगे।
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