फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Faridabad News ›   सुप्रीम कोर्ट में दया अपील करेंगे कांत एंक्लेव

सुप्रीम कोर्ट में दया अपील करेंगे कांत एंक्लेव

Thu, 13 Sep 2018 05:20 AM IST
Updated Thu, 13 Sep 2018 05:20 AM IST
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट में दया अपील करेंगे कांत एंक्लेव
supreme court
फरीदाबाद। हम सर्वोच्च न्यायालय में दया अपील दायर करेंगे कि हम जैसे सीनियर सिटिजंस को बेघर करने से पहले हमारी कहीं व्यवस्था की जाए। कांत एंक्लेव के 1500 प्लॉट होल्डर्स में 90 फीसदी सीनियर सिटिजंस हैं। जीवनभर की कमाई लगाकर आशियाना बनाया, अब कहा जा रहा है कि दो माह में मकान तोड़ दिया जाएगा। मुआवजे की रकम काफी कम है और डेवलपर हमें पैसा दे पाएगा ऐसा लगता नहीं। इस फैसले से सिर्फ प्लॉट होल्डर्स का ही नुकसान हुआ है। यह कहना है ऑर्गनाइजेशन ऑफ रेजिडेंट्स कांत एंक्लेव के प्रधान और सेवानिवृत्त ब्रिगेेडियर मोहिंदर बीर आनंद विशिष्ट सेवा मेडल का।
विज्ञापन

ब्रिगेडियर एमबी आनंद का कहना है कि हरियाणा सरकार की गलती का दंड कांत एंक्लेव के प्लॉट होल्डर्स को नहीं मिलना चाहिए। यहां प्लॉट खरीदने से पहले सभी ने सरकार से पूरी तसल्ली की थी कि यह प्रोजेक्ट/कॉलोनी, अप्रूव्ड और लीगल है। सरकार की देखरेख में तो यहां विकास कार्य किए गए। एंक्लेव में 40 किलोमीटर सड़कें बनाई गईं, 1220 स्ट्रीट लाइटें, तीन पानी की टंकियां, 21 किलोमीटर सीवरेज पाइपलाइन डाली गई, पेयजल आपूर्ति के लिए 22.7 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई गई। इसके बाद हमने प्लॉट खरीदे, सरकार ने नक्शा पास किया, हाउस टैक्स जमा कर रहे हैं। यदि राज्य सरकार को मालूम था कि यह प्रोजेक्ट विवादित है तो उसे हमारा नक्शा ही पास नहीं करना चाहिए था।
विज्ञापन

मेरी ही तरह अधिकतर लोगों ने जीवनभर की कमाई और लोन लेकर यह घर बनाए। सर्वोच्च न्यायालय ने जो मुआवजा निर्धारित किया है वह कम है। डेवलपर यह राशि देगा कहना मुश्किल है। हमेें कहा गया है कि राशि पाने के लिए सिविल कोर्ट में अपील करें। इसमें काफी समय भी लग सकता है, यदि पैसा मिला भी तो वह काफी कम होगा। हम सुप्रीम कोर्ट में दया याचिका डाल कर गुजारिश करेंगे कि यदि हमें हटाया जा रहा है तो इतना मुआवजा दिया जाए कि हम कहीं दो कमरों का घर खरीद सकें। सर्वोच्च पदों पर रहकर देश की सेवा करने वाले अधिकारी, न्यायाधीश, बड़े उद्यमी आदि लोगों ने सेवानिवृत्ति के बाद यहां प्लॉट खरीदे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


मकान उजाड़ने से पर्यावरण को होगा नुकसान
रिटायर्ड ब्रिगेडियर एमबी आनंद कहते हैं कि कांत एंक्लेव के डेवलपमेंट में हजारों मीट्रिक टन सीमेंट, लोहा, पाइप आदि खपाए गए हैं। इन्हें उजाड़ने से पर्यावरण को नुकसान होगा। सीमेंट और मलबे में वनस्पति नहीं उगेगी। 2004 में जब हम यहां बसे थे तो सिर्फ कीकर थे, कीकर को पर्यावरण के लिए अच्छा नहीं माना जाता। यहां बसने के बाद हम लोगों ने यहां बड़े इलाके में पौधरोपण किया। पार्क डेवलप किए, ज्यादातर घरों में सोलर पैनल लगाए गए हैं यानी पर्यावरण का संरक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 1996 के सुप्रीम कोर्ट ने रेस्ट्रिेक्टेड कंस्ट्रक्शन का आदेश दिया था, इसके तहत ढाई मंजिल तक कंस्ट्रक्शन किया जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय से अपील की जाएगी कि उसे लागू किया जाए ताकि हमारे घर न उजड़ें और पर्यावरण का संरक्षण भी हो। कांत एंक्लेव में जितनी हरियाली है उतनी शायद आपको इसके बाहर की अरावली में नहीं देखने को मिले।

कानून मानने वालों को नहीं मिले दंड
कांत एंक्लेव में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज, विश्व बैंक के पूर्व अधिकारी, रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स, रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर और उद्यमी रहते हैं। यह सभी कानून मानने वाले लोग हैं, इन्हें कानून मानने का दंड नहीं मिलना चाहिए। ब्रिगेडियर एमबी आनंद कहते हैं कि इसी अरावली में संगम विहार और खोरी गांव में अवैध कॉलोनियां बस गईं, प्रशासन उन्हें नहीं रोक सका। कांत एंक्लेव में इसलिए प्लॉट्स पर निर्माण नहीं हुआ कि हम कानून का उल्लंघन नहीं कर सकते। वह कहते हैं कि यदि कांत एंक्लेव उजाड़ा गया तो फिर यहां भी संगम विहार एक्सटेंशन और खोरी एक्सटेंशन बन जाएगा, क्योंकि प्रशासन अवैध कब्जे को रोक नहीं सका। उन्होंने कहा कि एक सेना अधिकारी होने के नाते उन्हें आशंका है कि कांत एंक्लेव उजड़ने के बाद यह इलाका अराजकतत्वों और आतंकवादियों के छिपने का अड्डा बन जाएगा क्योंकि यहां सड़कों से लेकर पीने के पानी से लेकर जंगल सभी कुछ मौजूद है।


नौकरों के भरोसे हैं ज्यादातर घर
कांत एंक्लेव में अधिकतर घरों में ताला लगा है और उनकी हिफाजत के लिए चौकीदार तैनात हैं। कुछ आलीशान घरों की देखभाल नौकर कर रहे हैं। एंक्लेव में एक एक्सपोर्ट यूूनिट का कार्यालय भी है लेकिन वहां भी कोई व्यक्ति बाहरी आदमी से बात करने को तैयार नहीं दिखा। बिल्डर कार्यालय में बैठे रामकिशन बताते हैं कि कोर्ट विवाद के कारण यहां खरीदार आते नहीं, जो घर हैं भी तो वह बड़े लोगों के हैं, शहरी सुविधाएं नहीं होने के कारण यह लोग नौकरों को छोड़कर राजधानी या विदेशों में रह रहे हैं।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed