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औद्योगिक नगरी में निगम ने जारी किए मात्र छह हजार ट्रेड लाइसेंस
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फरीदाबाद। नगर निगम के अधिकारी ही शायद उसके आर्थिक हालात सुधारना नहीं चाहते हैं। इसका सबूत है कि नगर निगम ने औद्योगिक नगरी में केवल मात्र छह हजार ट्रेड लाइसेंस जारी कर रखे हैं। खुद नवनियुक्त निगमायुक्त यश गर्ग भी निगम का डाटा देखकर हैरान हैं। निगमायुक्त ने जब लाइसेंस ब्रांच से इसका कारण जानना चाहा तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। निगम की आर्थिक हालत सुधारने के लिए निगमायुक्त ट्रेड लाइसेंस और बकाया संपत्ति कर वसूली पर जोर देने की बात कह रहे हैं।
औद्योगिक नगरी में छोटे बड़े करीब 25 से 30 हजार उद्योग हैं। इनमें छोटी वर्कशाप से लेकर बड़े-बड़े उद्योग भी शामिल हैं, जिनका सालाना टर्नओवर करोड़ों रुपये में है। इसके अलावा एस्कॉटर्स, जेसीबी, एबीबी जैसी कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी फरीदाबाद में काम कर रही हैं। नगर निगम ट्रेड लाइसेंस नियमानुसार इनसे भी लाइसेंस फीस वसूलने लगे तो निगम के खजाने में लाखों रुपये जमा हो जाएगा। इसके अलावा बाजारों में सैकड़ों दुकानें खुली हुई हैं।
शहर के प्रमुख बड़े बाजारों में एनआईटी-एक, दो, तीन व पांच के अलावा बल्लभगढ़, सराय ख्वाजा, सेक्टर-7-10 मार्केट, जवाहर कॉलोनी, डबुआ कॉलोनी, पर्वतीय कॉलोनी सहित सेक्टरों के बाजार शामिल हैं। इसके अलावा होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट, अस्पताल, क्लीनिक आदि भी ट्रेड लाइसेंस के दायरे में आते हैं। इसके बावजूद केवल मात्र छह हजार ट्रेड लाइसेंस जारी करना अधिकारियों में इच्छाशक्ति की कमी को दर्शाता है। ट्रेड लाइसेंस के तहत निगम की लिस्ट में 100 से अधिक विभिन्न तरह के ट्रेड हैं, जिन पर लाइसेंस शुरू वसूला जा सकता है।
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वेतन देने के भी नहीं हैं पैसे
नगर निगम इस कदर आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है कि उसके पास अधिकारियों व कर्मचारियों का वेतन देने के भी पैसे नहीं है। निगम कर्मचारियों के वेतन पर मासिक करीब 15 करोड़ रुपये खर्च करता है। आय के साधन में संपत्ति कर, पानी व सीवर के टैक्स के अलावा ट्रेड लाइसेंस एक बड़ा मद है, जिससे निगम को आय हो सकती है, मगर उस तरफ कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है। अब तो सरकार ने भी घोषणा कर दी है कि नए वित्त वर्ष से वह निगम की कोई आर्थिक मदद नहीं करेगा, उसे अपने आय के स्त्रोत खुद बनाने होंगे।
ओयो को जारी किए थे नोटिस, ठप हो गया मामला
पिछले साल तत्कालीन निगमायुक्त अनीता यादव ने रिहायशी क्षेत्रों में अवैध रूप से चल रहे ओयो होटलों को ट्रेड लाइसेंस लेने के लिए नोटिस जारी किए थे। लाइसेंस नहीं लेने पर कई ओयो होटलों को सील भी किया गया था, मगर कुछ दिन बाद ही अधिकारियों की मिलीभगत से सील खुल गई या तोड़ दी गई।
औद्योगिक नगरी में मात्र छह हजार ट्रेड लाइसेंस जारी करने से मैं भी काफी हैरान हूं। यह पता किया जा रहा है कि आज तक ट्रेड लाइसेंस जारी करने में इतनी ढिलाई क्यों बरती गई। निगम की आय बढ़ाने के लिए ट्रेड लाइसेंस सहित बकाया संपत्ति कर वसूली पर जोर रहेगा। - यश गर्ग, नगर निगम आयुक्त
ये हैं ट्रेड लाइसेंस की दरें
वर्कशाप व फैक्ट्रियां
50 हजार रुपये सालाना ट्रर्नओवर पर : 300 रुपये सालाना
एक लाख रुपये सालाना ट्रर्नओवर पर : 400 रुपये सालाना
10 लाख रुपये सालाना ट्रर्नओवर पर : 700 रुपये सालाना
25 लाख रुपये सालाना ट्रर्नओवर पर : 1200 रुपये सालाना
50 लाख रुपये सालाना ट्रर्नओवर पर : 3000 रुपये सालाना
एक करोड़ रुपये सालाना ट्रर्नओवर पर : 5000 रुपये सालाना
10 करोड़ रुपये सालाना ट्रर्नओवर पर : 10,000 रुपये सालाना
मैरिज गार्डन, बैक्वेट हॉल
एक एकड़ में बने एसी हॉल व गार्डन : 50 हजार रुपये सालाना
पांच एकड़ तक बने एसी हॉल व गार्डन : एक लाख रुपये सालाना
पांच एकड़ से अधिक में बने एसी हॉल व गार्डन : डेढ़ लाख रुपये सालाना
बिना एसी के एक एकड़ में बने हॉल व गार्डन : 10 हजार रुपये सालाना
बिना एसी के पांच एकड़ तक में बने हॉल व गार्डन : 25 हजार रुपये सालाना
बिना एसी के पांच एकड़ से अधिक में बने हॉल व गार्डन : 50 हजार रुपये सालाना
टेंट हाउस : पांच हजार रुपये सालाना
दो पहिया वाहनों की एजेंसी
250 गज से अधिक क्षेत्र में : 20 हजार रुपये सालाना
250 गज से कम क्षेत्र में : पांच हजार रुपये सालाना
क्लीनिक : 25 सौ रुपये सालाना
नर्सिंग होम : 5 बिस्तर तक एक हजार रुपये सालाना
6 से 15 बिस्तर तक 25 सौ रुपये सालाना
16 से 30 बिस्तर तक चार हजार रुपये सालाना
30 से अधिक अतिरिक्त बिस्तर पर 200 रुपये प्रति बेड
मल्टीप्लेक्स : 10 हजार रुपये प्रति स्क्रीन सालाना
सिनेमा हॉल : 5 हजार रुपये सालाना
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औद्योगिक नगरी में छोटे बड़े करीब 25 से 30 हजार उद्योग हैं। इनमें छोटी वर्कशाप से लेकर बड़े-बड़े उद्योग भी शामिल हैं, जिनका सालाना टर्नओवर करोड़ों रुपये में है। इसके अलावा एस्कॉटर्स, जेसीबी, एबीबी जैसी कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी फरीदाबाद में काम कर रही हैं। नगर निगम ट्रेड लाइसेंस नियमानुसार इनसे भी लाइसेंस फीस वसूलने लगे तो निगम के खजाने में लाखों रुपये जमा हो जाएगा। इसके अलावा बाजारों में सैकड़ों दुकानें खुली हुई हैं।
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शहर के प्रमुख बड़े बाजारों में एनआईटी-एक, दो, तीन व पांच के अलावा बल्लभगढ़, सराय ख्वाजा, सेक्टर-7-10 मार्केट, जवाहर कॉलोनी, डबुआ कॉलोनी, पर्वतीय कॉलोनी सहित सेक्टरों के बाजार शामिल हैं। इसके अलावा होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट, अस्पताल, क्लीनिक आदि भी ट्रेड लाइसेंस के दायरे में आते हैं। इसके बावजूद केवल मात्र छह हजार ट्रेड लाइसेंस जारी करना अधिकारियों में इच्छाशक्ति की कमी को दर्शाता है। ट्रेड लाइसेंस के तहत निगम की लिस्ट में 100 से अधिक विभिन्न तरह के ट्रेड हैं, जिन पर लाइसेंस शुरू वसूला जा सकता है।
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वेतन देने के भी नहीं हैं पैसे
नगर निगम इस कदर आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है कि उसके पास अधिकारियों व कर्मचारियों का वेतन देने के भी पैसे नहीं है। निगम कर्मचारियों के वेतन पर मासिक करीब 15 करोड़ रुपये खर्च करता है। आय के साधन में संपत्ति कर, पानी व सीवर के टैक्स के अलावा ट्रेड लाइसेंस एक बड़ा मद है, जिससे निगम को आय हो सकती है, मगर उस तरफ कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है। अब तो सरकार ने भी घोषणा कर दी है कि नए वित्त वर्ष से वह निगम की कोई आर्थिक मदद नहीं करेगा, उसे अपने आय के स्त्रोत खुद बनाने होंगे।
ओयो को जारी किए थे नोटिस, ठप हो गया मामला
पिछले साल तत्कालीन निगमायुक्त अनीता यादव ने रिहायशी क्षेत्रों में अवैध रूप से चल रहे ओयो होटलों को ट्रेड लाइसेंस लेने के लिए नोटिस जारी किए थे। लाइसेंस नहीं लेने पर कई ओयो होटलों को सील भी किया गया था, मगर कुछ दिन बाद ही अधिकारियों की मिलीभगत से सील खुल गई या तोड़ दी गई।
औद्योगिक नगरी में मात्र छह हजार ट्रेड लाइसेंस जारी करने से मैं भी काफी हैरान हूं। यह पता किया जा रहा है कि आज तक ट्रेड लाइसेंस जारी करने में इतनी ढिलाई क्यों बरती गई। निगम की आय बढ़ाने के लिए ट्रेड लाइसेंस सहित बकाया संपत्ति कर वसूली पर जोर रहेगा। - यश गर्ग, नगर निगम आयुक्त
ये हैं ट्रेड लाइसेंस की दरें
वर्कशाप व फैक्ट्रियां
50 हजार रुपये सालाना ट्रर्नओवर पर : 300 रुपये सालाना
एक लाख रुपये सालाना ट्रर्नओवर पर : 400 रुपये सालाना
10 लाख रुपये सालाना ट्रर्नओवर पर : 700 रुपये सालाना
25 लाख रुपये सालाना ट्रर्नओवर पर : 1200 रुपये सालाना
50 लाख रुपये सालाना ट्रर्नओवर पर : 3000 रुपये सालाना
एक करोड़ रुपये सालाना ट्रर्नओवर पर : 5000 रुपये सालाना
10 करोड़ रुपये सालाना ट्रर्नओवर पर : 10,000 रुपये सालाना
मैरिज गार्डन, बैक्वेट हॉल
एक एकड़ में बने एसी हॉल व गार्डन : 50 हजार रुपये सालाना
पांच एकड़ तक बने एसी हॉल व गार्डन : एक लाख रुपये सालाना
पांच एकड़ से अधिक में बने एसी हॉल व गार्डन : डेढ़ लाख रुपये सालाना
बिना एसी के एक एकड़ में बने हॉल व गार्डन : 10 हजार रुपये सालाना
बिना एसी के पांच एकड़ तक में बने हॉल व गार्डन : 25 हजार रुपये सालाना
बिना एसी के पांच एकड़ से अधिक में बने हॉल व गार्डन : 50 हजार रुपये सालाना
टेंट हाउस : पांच हजार रुपये सालाना
दो पहिया वाहनों की एजेंसी
250 गज से अधिक क्षेत्र में : 20 हजार रुपये सालाना
250 गज से कम क्षेत्र में : पांच हजार रुपये सालाना
क्लीनिक : 25 सौ रुपये सालाना
नर्सिंग होम : 5 बिस्तर तक एक हजार रुपये सालाना
6 से 15 बिस्तर तक 25 सौ रुपये सालाना
16 से 30 बिस्तर तक चार हजार रुपये सालाना
30 से अधिक अतिरिक्त बिस्तर पर 200 रुपये प्रति बेड
मल्टीप्लेक्स : 10 हजार रुपये प्रति स्क्रीन सालाना
सिनेमा हॉल : 5 हजार रुपये सालाना