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सूरजकुंड मेला : पठनी और चंद्रकला साड़ियों की रहेगी धूम
Updated Tue, 20 Nov 2018 11:19 PM IST
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सूरजकुंड मेला : पैठणी और चंद्रकला साड़ियों की रहेगी धूम
फरीदाबाद। सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में इस बार महाराष्ट्र की पैठणी और चंद्रकला साड़ियों की धूम रहेगी। अगले साल लगने वाले 33वें सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में महाराष्ट्र को थीम स्टेट बनाया गया है। महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम के अधिकारी एक बार मेला परिसर का दौरा कर चुके हैं और जल्द ही दोबारा आकर मेला परिसर को सजाने संवारने को लेकर चर्चा की जाएगी।
हर साल फरवरी में लगने वाले सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मेला परिसर में बनी हट्स की पुरानी घास को बदला जा रहा है। जो हट्स पुरानी हो गई हैं, उनको तोड़कर उनके स्थान पर पक्का निर्माण किया जा रह है। हाल ही में मेला परिसर का जायजा लेने आए महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक अभिमन्यु काले अपनी टीम के साथ आए थे। इस दौरान उन्होंने पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ मेला परिसर को मराठी रंग में रंगने के लिए चर्चा की थी। मेला परिसर में छत्रपति महाराज शिवा जी के रायगढ़ किले की प्रतिकृति के साथ ही महाराष्ट्र के अलग-अलग ऐतिहासिक द्वार भी बनाए जाएंगे।
महाराष्ट्र थीम स्टेट होने के कारण मेले की चौपाल पर मराठी लोक कला की धूम मचेगी। चौपाल पर लावणी, गौंधल, कोवाड़ा और भारुड़ नृत्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे। इसके अलावा महाराष्ट्र से जरी वर्क वाली पैठणी और चंद्रकला साड़ियां आकर्षण का केंद्र होंगी। इसके अलावा विश्व प्रसिद्ध कोल्हापुरी चप्पल भी लोग मेले में खरीद सकेंगे।
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सी-फूड का भी ले सकेंगे आनंद
सूरजकुंड मेले में एक तरफ जहां मराठी सांस्कृतिक रंगों की खुशबू बिखरेगी, वहीं महाराष्ट्र के व्यंजनों के अलग-अलग स्टाल लोगों को अपनी ओर खीचेंगे। महाराष्ट्र में होली के दौरान बनाई जाने वाली पूरन पोली (मीठी रोटी), मोदक के अलावा सी-फूड का भी लुत्फ ले सकेंगे। इनमें विशेष तौर पर पापलेर मछली के अलावा अन्य कई व्यंजन शामिल होंगे।
फरीदाबाद। सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में इस बार महाराष्ट्र की पैठणी और चंद्रकला साड़ियों की धूम रहेगी। अगले साल लगने वाले 33वें सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में महाराष्ट्र को थीम स्टेट बनाया गया है। महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम के अधिकारी एक बार मेला परिसर का दौरा कर चुके हैं और जल्द ही दोबारा आकर मेला परिसर को सजाने संवारने को लेकर चर्चा की जाएगी।
हर साल फरवरी में लगने वाले सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मेला परिसर में बनी हट्स की पुरानी घास को बदला जा रहा है। जो हट्स पुरानी हो गई हैं, उनको तोड़कर उनके स्थान पर पक्का निर्माण किया जा रह है। हाल ही में मेला परिसर का जायजा लेने आए महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक अभिमन्यु काले अपनी टीम के साथ आए थे। इस दौरान उन्होंने पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ मेला परिसर को मराठी रंग में रंगने के लिए चर्चा की थी। मेला परिसर में छत्रपति महाराज शिवा जी के रायगढ़ किले की प्रतिकृति के साथ ही महाराष्ट्र के अलग-अलग ऐतिहासिक द्वार भी बनाए जाएंगे।
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महाराष्ट्र थीम स्टेट होने के कारण मेले की चौपाल पर मराठी लोक कला की धूम मचेगी। चौपाल पर लावणी, गौंधल, कोवाड़ा और भारुड़ नृत्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे। इसके अलावा महाराष्ट्र से जरी वर्क वाली पैठणी और चंद्रकला साड़ियां आकर्षण का केंद्र होंगी। इसके अलावा विश्व प्रसिद्ध कोल्हापुरी चप्पल भी लोग मेले में खरीद सकेंगे।
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सी-फूड का भी ले सकेंगे आनंद
सूरजकुंड मेले में एक तरफ जहां मराठी सांस्कृतिक रंगों की खुशबू बिखरेगी, वहीं महाराष्ट्र के व्यंजनों के अलग-अलग स्टाल लोगों को अपनी ओर खीचेंगे। महाराष्ट्र में होली के दौरान बनाई जाने वाली पूरन पोली (मीठी रोटी), मोदक के अलावा सी-फूड का भी लुत्फ ले सकेंगे। इनमें विशेष तौर पर पापलेर मछली के अलावा अन्य कई व्यंजन शामिल होंगे।