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बड़खल झील को पानी से भरने की कवायद तेज हुई
Updated Tue, 02 Oct 2018 10:52 PM IST
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बड़खल झील को पानी से भरने की कवायद तेज
फरीदाबाद। अरावली की पहाड़ियों में स्थित बड़खल झील में पानी भरा रहे इसके उपाय करने मंगलवार को आईआईटी रुड़की की टीम पहुंची। टीम झील की तलहटी में इनफिल्ट्रोमीटर लगाकर ज्ञात करेगी कि पानी किस गति से रिस कर जमीन में चला जाता है। जिन जगहों पर नीचे रिसने की गति भरने से अधिक होगी वहां पानी रोकने के उपायों पर सुझाव देगी।
आईआईटी रुड़की से आए प्रोफेसर हरिप्रसाद ने बताया कि उनकी टीम झील में पानी के रिसाव की मात्रा और उसे कम करने के उपाय पर अपनी रिपोर्ट बनाएगी। इसके लिए झील क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर डबल रिंग इनफिल्ट्रो मीटर लगाए जाएंगे। जमीन में करीब दस मीटर गड्ढा खोदने के बाद इन्हें स्थापित किया जाएगा। सभी इनफिल्ट्रोमीटर एक ही समय एक निश्चित मात्रा में पानी डाला जाएगा। किस जगह का पानी जल्दी रिस कर जमीन में जाता है और किस जगह देर तक रुकता है इसका आकलन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि अधिक रिसाव वाली जगह पर सिंथेटिक लेप लगाया जाएगा। उनकी टीम में मौजूद शोध छात्र कौशिक जीएस, सतेंद्र कुमार, इक्क्षांाशु सोनकर और मनीष मल्ल ने बताया कि टीम करीब तीन दिन रुक कर जमीन की फिल्ट्रेशन शक्ति परखेगी।
उन्होंने बताया कि झील को पानी से भरने के लिए पहले सेक्टर-21 के पास एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। जो हर रोज 10 एमएलडी पानी 5 बीओडी मात्रा तक ट्रीट करेगा। इस पानी को हर रोज मोटी पाईप के जरिये झील तक पहुंचाया जाएगा। झील को 300 दिन में 6 मीटर ऊंचाई तक पानी से भर दिया जाएगा। इसके बाद एसटीपी से हर रोज केवल 3 एमएलडी पानी ही झील के अंदर डाला जाएगा ताकि पानी बरकरार रहे। बाकी के बचे हुए 7 एमएलडी पानी को शहर के अन्य कामों में इस्तेमाल कर लिया जाएगा।
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झील को भरने को लगेंगे तीन एसटीपी
विधायक सीमा त्रिखा ने बताया कि झील को भरने के लिए के तीन ओर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। प्रत्येक एसटीपी की क्षमता 20 एमएलडी होगी। इस पर 79 करोड़ रुपये खर्च होंगे। उन्होंने बताया कि अगले दस माह में बड़खल झील को उसका प्राकृतिक रूप लौटाने का प्रयास किया जा रहा है। झील के भरने से क्षेत्र का पर्यावरण बेहतर होगा और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
फरीदाबाद। अरावली की पहाड़ियों में स्थित बड़खल झील में पानी भरा रहे इसके उपाय करने मंगलवार को आईआईटी रुड़की की टीम पहुंची। टीम झील की तलहटी में इनफिल्ट्रोमीटर लगाकर ज्ञात करेगी कि पानी किस गति से रिस कर जमीन में चला जाता है। जिन जगहों पर नीचे रिसने की गति भरने से अधिक होगी वहां पानी रोकने के उपायों पर सुझाव देगी।
आईआईटी रुड़की से आए प्रोफेसर हरिप्रसाद ने बताया कि उनकी टीम झील में पानी के रिसाव की मात्रा और उसे कम करने के उपाय पर अपनी रिपोर्ट बनाएगी। इसके लिए झील क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर डबल रिंग इनफिल्ट्रो मीटर लगाए जाएंगे। जमीन में करीब दस मीटर गड्ढा खोदने के बाद इन्हें स्थापित किया जाएगा। सभी इनफिल्ट्रोमीटर एक ही समय एक निश्चित मात्रा में पानी डाला जाएगा। किस जगह का पानी जल्दी रिस कर जमीन में जाता है और किस जगह देर तक रुकता है इसका आकलन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि अधिक रिसाव वाली जगह पर सिंथेटिक लेप लगाया जाएगा। उनकी टीम में मौजूद शोध छात्र कौशिक जीएस, सतेंद्र कुमार, इक्क्षांाशु सोनकर और मनीष मल्ल ने बताया कि टीम करीब तीन दिन रुक कर जमीन की फिल्ट्रेशन शक्ति परखेगी।
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उन्होंने बताया कि झील को पानी से भरने के लिए पहले सेक्टर-21 के पास एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। जो हर रोज 10 एमएलडी पानी 5 बीओडी मात्रा तक ट्रीट करेगा। इस पानी को हर रोज मोटी पाईप के जरिये झील तक पहुंचाया जाएगा। झील को 300 दिन में 6 मीटर ऊंचाई तक पानी से भर दिया जाएगा। इसके बाद एसटीपी से हर रोज केवल 3 एमएलडी पानी ही झील के अंदर डाला जाएगा ताकि पानी बरकरार रहे। बाकी के बचे हुए 7 एमएलडी पानी को शहर के अन्य कामों में इस्तेमाल कर लिया जाएगा।
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झील को भरने को लगेंगे तीन एसटीपी
विधायक सीमा त्रिखा ने बताया कि झील को भरने के लिए के तीन ओर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। प्रत्येक एसटीपी की क्षमता 20 एमएलडी होगी। इस पर 79 करोड़ रुपये खर्च होंगे। उन्होंने बताया कि अगले दस माह में बड़खल झील को उसका प्राकृतिक रूप लौटाने का प्रयास किया जा रहा है। झील के भरने से क्षेत्र का पर्यावरण बेहतर होगा और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।