{"_id":"6acd14bc569c3ef3df0c1c23","slug":"10-accused-acquitted-in-flat-fraud-case-faridabad-news-c-26-1-fbd1023-82538-2026-10-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: फ्लैट धोखाधड़ी के मामले में 10 आरोपी बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: फ्लैट धोखाधड़ी के मामले में 10 आरोपी बरी
विज्ञापन
फरीदाबाद। अफोर्डेबल हाउसिंग योजना के तहत फ्लैट का कब्जा न मिलने के धोखाधड़ी के एक मामले में अदालत ने दस आरोपियों को बरी कर दिया है। यह फैसला शिकायतकर्ता रविंद्र कुमार और आरोपियों के बीच आपसी समझौते के बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रितू यादव की अदालत ने सुनाया।
अदालत ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज करने के बाद माना कि समझौता बिना किसी दबाव के किया गया था। रविंद्र कुमार ने 2014 में अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी के तहत फ्लैट बुक कराया था। उन्हें मई 2015 में फ्लैट नंबर 205, टावर ए-3 आवंटित किया गया था। उन्होंने 11 अगस्त 2014 से 4 जुलाई 2019 के बीच अलग-अलग किस्तों में 19,69,780 रुपये जमा कराए। इसके बावजूद उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं मिला। रविंद्र कुमार ने 25 नवंबर 2021 को पुलिस आयुक्त को शिकायत दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि संबंधित कंपनियों के निदेशकों और अधिकारियों ने उनकी रकम का दुरुपयोग किया। इस शिकायत की जांच के बाद 25 मार्च 2023 को थाना सेक्टर-31 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अदालत के आदेश के अनुसार, शिकायतकर्ता और आरोपियों ने आपसी विवाद खत्म करने पर सहमति जताई। शिकायतकर्ता ने अपने बयान में कहा कि समझौता स्वेच्छा से हुआ है। अदालत ने इस समझौते को स्वीकार किया। सुरेश अग्रवाल, हरिश चंद्र अग्रवाल, दीन दयाल अग्रवाल, हरपाल सिंह, देवेंद्र कुमार, कैलाश मोहन मेहता, अनिल जिंदल, विनोद जिंदल, राजेश सिंगला और धन प्रकाश गुप्ता को आरोपों से बरी कर दिया गया। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
अदालत ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज करने के बाद माना कि समझौता बिना किसी दबाव के किया गया था। रविंद्र कुमार ने 2014 में अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी के तहत फ्लैट बुक कराया था। उन्हें मई 2015 में फ्लैट नंबर 205, टावर ए-3 आवंटित किया गया था। उन्होंने 11 अगस्त 2014 से 4 जुलाई 2019 के बीच अलग-अलग किस्तों में 19,69,780 रुपये जमा कराए। इसके बावजूद उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं मिला। रविंद्र कुमार ने 25 नवंबर 2021 को पुलिस आयुक्त को शिकायत दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि संबंधित कंपनियों के निदेशकों और अधिकारियों ने उनकी रकम का दुरुपयोग किया। इस शिकायत की जांच के बाद 25 मार्च 2023 को थाना सेक्टर-31 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
विज्ञापन
अदालत के आदेश के अनुसार, शिकायतकर्ता और आरोपियों ने आपसी विवाद खत्म करने पर सहमति जताई। शिकायतकर्ता ने अपने बयान में कहा कि समझौता स्वेच्छा से हुआ है। अदालत ने इस समझौते को स्वीकार किया। सुरेश अग्रवाल, हरिश चंद्र अग्रवाल, दीन दयाल अग्रवाल, हरपाल सिंह, देवेंद्र कुमार, कैलाश मोहन मेहता, अनिल जिंदल, विनोद जिंदल, राजेश सिंगला और धन प्रकाश गुप्ता को आरोपों से बरी कर दिया गया। संवाद
विज्ञापन