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नकली रोडवेज बसें चलाने के अपराध की सजा महज एक हजार रुपये जुर्माना

Tue, 07 Jun 2016 02:13 AM IST
मयंक तिवारी/अमर उजाला, फरीदाबाद
मयंक तिवारी/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Tue, 07 Jun 2016 02:13 AM IST
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Fake roadways buses crime penalty just one thousand rupees
नकली रोडवेज बस - फोटो : अमर उजाला

रोडवेज की शक्ल में चलने नकली बसों से भले ही राज्य सरकार को लाखों का फटका लगा हो लेकिन आप को जान कर यह हैरानी होगी कि इस अपराध के लिए सिर्फ एक हजार रुपये जुर्माना है।

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यह इतना कम है कि बस संचालकों को कोई असर नहीं डाल पाएगा। इन बसों से न सिर्फ राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा था बल्कि इसमें सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा भी राम भरोसे थी।
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अगर इन बसों का कहीं पर एक्सीडेंट होता और कोई यात्री मर जाता या घायल होता तो उसको किसी प्रकार इंश्योरेंस क्लेम नहीं मिल पाता क्योंकि यह बसें बिना परमिट के चल रही थी।
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रोड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की माने तो इन बसों के पीछे वह एक माह से लगी हुई थी। उसे इस तरह की 15 बस चलने की सूचना थी। एक माह पहले एक बस पकड़ी गई थी।

जिसे पार्किंग में खड़ा कराने के बाद उसका रंग बदला था। दो दिन पहले रोड ट्रांसपोर्ट विभाग की टीम ने आठ बसे पकड़ी है। सूत्रों की माने तो इस मामले में विभागीय लोग फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।

उन्होंने पूरे मामले को सीजीएम की कोर्ट भेज दिया। इन पर कार्रवाई करने का फैसला अदालत लेगी। पंजाब, हरियाणा व राजस्थान के रहने वाले लोगों के  नाम पर बस रजिस्टर्ड हैं। प्रदेश सरकार में बड़ी पहुंच रखने वालों से लेकर सत्ता के बीच रसूख रखने वालों का भी इस मामले में हस्तक्षेप हो रहा है। हालांकि कोई कुछ बोलने का तैयार नहीं है।  

रोडवेज की टीम के इशारे पर भी नहीं रुकती थीं बसें
नकली बसों को पकडने वाली टीम के लोगों की माने तो रोडवेज की ओर से होने वाली जांच टीम की ओर से भी इस बात का इनपुट था कि उनकी शक्ल की कुछ बसें चलती है।

जिनको रोकने का कई बार इशारा किया गया मगर वह रुक नहीं रही थी। इस मामले में पूर्व में आरटीए के रूप में यहां तैनात रहे अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उन्होंने इन बस संचालकों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की।


रवैया यही रहा तो चलती रहेंगी ऐसी बसें
भ्रामक शक्ल देने के मुद्दे पर विभाग के अधिकारी कार्रवाई से बच रहे हैं। जबकि इस मामले में वह संचालकों को लपेटे में ले सकते हैं। जानकारों का कहना है कि यदि सिर्फ 1000 रुपये लेकर इन बसों को छोड़ दिया गया तो यह बसें फिर से सड़क पर उतरेंगी। संचालक जुर्माना भरकर निजी बसें सरकारी की शक्ल में चलवाते रहेंगे।

 

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