नहर से मछलियां कम लाशें ज्यादा निकलती हैं: दिल्ली की प्यास बुझाती है, कहते हैं लाइफलाइन; आंकड़े कर देंगे हैरान
रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल का कहना है कि शव मिलने के बाद उसकी पहचान की प्रक्रिया की जाती है। पहचान होने के बाद उसका पोस्टमार्टम करवाया जाता है। ताकि उनके मौत के कारणों का खुलासा हो सके।
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मुनक नहर राजधानी के लोगों के लिए लाइफ लाइन मानी जाती है। यह दिल्ली के लिए जल आपूर्ति में अहम भूमिका निभाती है। लेकिन यह नहर शवों का कैरियर बन गई है। हर पांचवें दिन इसमें एक लाश मिलती है। इसमें ज्यादातर मौतें डूबने से होती है। वहीं कुछ मामले हत्या के भी हैं। दिल्ली में 16 किलोमीटर तक फैले इस नहर से एक साल में करीब 79 शव बरामद हुए हैं। जिसमें से 33 मौत के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है।
आए दिन तैरती मिलती है लाश
मुनक नहर हरियाणा से दिल्ली में प्रवेश करता है। नहर दिल्ली के दो थाना केएन काटजू मार्ग और समयपुर बादली इलाके से होकर गुजरती है। आए दिन इन इलाकों में नहर में शव तैरने की जानकारी मिलती है। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक एक अप्रैल 2024 से लेकर 31 मार्च 2025 तक 79 शव बरामद हो चुके हैं। समयपुर बादली इलाके में 45 शव जबकि केएन काटजू मार्ग इलाके से 34 शव बरामद किए जा चुके हैं।
लाशों का क्या करती है पुलिस?
रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल का कहना है कि शव मिलने के बाद उसकी पहचान की प्रक्रिया की जाती है। पहचान होने के बाद उसका पोस्टमार्टम करवाया जाता है। ताकि उनके मौत के कारणों का खुलासा हो सके। पहचान नहीं होने की स्थिति शव की शिनाख्त के लिए 72 घंटे तक मोर्चरी में रखवाया जाता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का खुलासा होता है। इसके आधार पर ही कानूनी कार्रवाई की जाती है। एक साल में मिले 79 शवों में से दो मामले में हत्या की बात सामने आई है। जिसमें हत्या करने के बाद शव को नहर में फेंका गया था। ऐसे में हत्या का मामला दर्ज कर इसकी जांच की जा रही है। मृतक के परिवार वालों से पूछताछ कर हत्या के कारणों और आरोपी की पहचान करने की प्रक्रिया की जाती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नहर में शव मिलने के ज्यादातर मामलों में नहाने के दौरान डूबने का होता है। समयपुर बादली इलाके में नहर से मिले 45 शवों में 44 मामले डूबने के हैं।
| शवों के मिलने की संख्या | 45 |
| डूबकर मरने वालों की संख्या | 44 |
| हत्या कर फेंके गए शव | 01 |
| महिलाओं की संख्या | 03 |
| पुरुषों की संख्या | 37 |
| बच्चों की संख्या | 05 |
| शवों की पहचान | 14 |
| शवों की पहचान नहीं | 31 |
| शवों के मिलने की संख्या | 34 |
| हत्या कर फेंके गए शव | 01 |
| महिलाओं की संख्या | 03 |
| पुरुषों की संख्या | 24 |
| बच्चों की संख्या | 07 |
| शवों की पहचान | 21 |
| शवों की पहचान नहीं | 13 |
| मामलों की जांच जारी है | 33 |
हरियाणा से भी आते हैं शव
पुलिस अधिकारी का कहना है कि हरियाणा से भी दिल्ली की सीमा में शव आते हैं। काफी दिनों बाद शव मिलने से वह पूरी तरह से सड़ चुके होते हैं। ऐसे में खुले तौर पर उनकी पहचान करना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में 40 फीसदी शवों की पहचान नहीं हो पाती है। ऐसे शवों को 72 घंटा रखने के बाद उसका पोस्टमार्टम कराकर अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। रिपोर्ट में हत्या की बात सामने आने के बाद मामला दर्ज कर जांच की जाती है।