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यहां आज भी महिलाओं को समझा जाता है बच्चा पैदा करने की मशीन

Mon, 11 Jul 2016 12:35 AM IST
राजुद्दीन जंग/अमर उजाला, गुड़गांव
राजुद्दीन जंग/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Mon, 11 Jul 2016 12:35 AM IST
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Even today here thought women are baby machine

अपने वंश को चलाने के चक्कर में इंसान क्या से क्या कर बैठता है ये पता ही नहीं चलता। मेवात क्षेत्र में आज भी ऐसी कई महिलाऐं है जिन्होंने पति के खातिर बेटा पैदा करने के लालच में दर्जनभर लड़कियां पैदा कर ली।

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बीते 28 जून को सलमा का वंश चलाने का ख्वाब उस समय टूट गया। जब उसने मेडिकल कॉलेज नलहड़ में 12वीं सन्तान लड़की को जन्म दिया।

संतान का नाम बुसरा सुल्तान है जोकि सुपरस्टार सलमान खान की हालिया फिल्म सुलतान से मेल खाता है। पति पर अभी और बच्चे पैदा करने का भूत सवार है।

1000 लड़कों पर 932 लड़कियों का अनुपात

Even today here thought women are baby machine

मजदूरी करके हाकम बच्चों का पालन पौषण करता है। जनगणना 2011 के मुताबिक मेवात की आबादी करीब 11 लाख थी। औसतन मेवात के हरेक परिवार में 6 से 8 बच्चों का फैमिली साईज है।

बढ़ती जनसंया और घटते संसाधनों की घुटन से मेवात में बेरोजगारी चरम पर है। आज दो लाख से ज्यादा युवा या तो मजदूरी कर रहे है या ट्रक ड्राईवरी से जुडे़ है तथा हजारों को रोजगार मिल ही नहीं पा रहा है।

ऐसे में वंश चलाने के लिए बेटे की चाहत बढ़ना भी आबादी दर में बढ़ोतरी का बड़ा कारण बना हुआ है। हरियाणा में मेवात का लिंगानुपात 1000 लड़कों पर 932 लड़कियों का है।

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सलमा आज 12 लड़कियो को जन्म दे चुकी है

Even today here thought women are baby machine
नगीना के गांव घागस की सलमा ने 17 साल पहले पुन्हाना खंड़ के गांव डूढ़ोली में हाकम खान के साथ शादी हुई। तब सलमा की उम्र 18 साल के करीब थी।

सलमा आज 34 साल में 12 लडकियों को जन्म दे चुकी है। मौजूदा वक्त में सलमा की हालत लगातार बच्चे पैदा करने के कारण अभी भी वो बीमार है। बड़ी लडकी सुमैय्या दसवीं कक्षा में पढ़ रही है।

जबकि शबनम आठवीं, दिलशाना छठी, असमां चौथी, निबुस्ता तीसरी, जकिया पहली के अलावा सना, शिफा, आलिया, बुसरा सुल्तान है। वहीं तबस्सुम व अरफा जापे के दौरान आकाल मौत का शिकार हो चुकी है।
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रसीदन ने 11 बेटियों को जन्म दिया

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 इससे पहले नूंह खंड़ के चंदनी गांव की रसीदन ने वंश को कायम रखने के लिए 11 बेटियों को जन्म दिया। अच्छी बात ये है कि रसीदन की बेटियां आज मेवात की बेटियों के लिए मिसाल बन चुकी है।

मेवात के आकेड़ा गांव की महिला बिस्मिल्लाह ने भी 23 वीं सन्तान को जन्म देकर सुर्खियां बटोरी थी। बातचीत में हाकम खान ने बताया कि समाज में धारणा है कि बेटों से ही वंश चलता है। इसी रिवाज में 12 लडकियों को जन्म दिया।

जिसमें 10 जिन्दा है। मुफती मोहमद सलीम ने फोन पर बताया कि ये हुनर है। यदि मुस्लिम माहिर डॉक्टर ये कहे कि महिला की जान को बच्चा पैदा करने से खतरा है तो वो कोई भी तरीका इस्तेमाल कर सकती है।

सन् 1961 की जनगणना में मुस्लमानों की आबादी दर 32.49, 1971 में 30.92, 1981 में 30.78, 1991 में 32.88, 2001 में 29.52 और 2011 में 24.60 है।

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