{"_id":"6ae8a1f928cd7b0ec10cbae0","slug":"dus-cdoe-dismisses-assistant-professor-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-161843-2026-11-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: डीयू के सीडीओई ने सहायक प्रोफेसर को किया बर्खास्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: डीयू के सीडीओई ने सहायक प्रोफेसर को किया बर्खास्त
विज्ञापन
लर्निंग मैटीरियल में आतंकवाद के समर्थन का आरोप
प्रोबेशन बढ़ाने के बाद भी नहीं हुआ सुधार
अमर उजाला ब्यूराे
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र (सीडीओई) ने राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सरीपल्ली वी रविकिरण को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इस संबंध में सीडीओई ने 30 अक्तूबर को आदेश जारी किया।
आदेश के अनुसार, डॉ रविकिरण की नियुक्ति मई 2023 को हुई थी। 2025 को उनकी प्रोबेशन अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी गई थी। हालांकि, बढ़ाई गई अवधि के दौरान भी उनके काम और आचरण में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। आदेश में कहा गया है कि केंद्र ने समय-समय पर उन्हें काम में कमियों की जानकारी दी। साथ ही अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई और लिखित जवाब देने के कई अवसर भी दिए गए।
सीडीओई की गवर्निंग बॉडी ने लगातार असंतोषजनक प्रदर्शन को देखते हुए सेवा से हटाने की सिफारिश की। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति ने भी इस सिफारिश को मंजूरी दे दी। इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से मुक्त कर दिया गया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बर्खास्तगी का फैसला भविष्य में दिल्ली विश्वविद्यालय, अन्य कॉलेजों या सरकारी सेवाओं में पदों के लिए आवेदन करने में अयोग्यता नहीं माना जाएगा।
विज्ञापन
इस कार्रवाई के विरोध में नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एनडीटीएफ) ने शिक्षक के अधिकारों, गरिमा और निष्पक्ष प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि शिक्षकों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस, निलंबन या सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई निर्धारित नियमों और निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए।
विज्ञापन
प्रोबेशन बढ़ाने के बाद भी नहीं हुआ सुधार
अमर उजाला ब्यूराे
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र (सीडीओई) ने राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सरीपल्ली वी रविकिरण को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इस संबंध में सीडीओई ने 30 अक्तूबर को आदेश जारी किया।
आदेश के अनुसार, डॉ रविकिरण की नियुक्ति मई 2023 को हुई थी। 2025 को उनकी प्रोबेशन अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी गई थी। हालांकि, बढ़ाई गई अवधि के दौरान भी उनके काम और आचरण में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। आदेश में कहा गया है कि केंद्र ने समय-समय पर उन्हें काम में कमियों की जानकारी दी। साथ ही अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई और लिखित जवाब देने के कई अवसर भी दिए गए।
विज्ञापन
सीडीओई की गवर्निंग बॉडी ने लगातार असंतोषजनक प्रदर्शन को देखते हुए सेवा से हटाने की सिफारिश की। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति ने भी इस सिफारिश को मंजूरी दे दी। इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से मुक्त कर दिया गया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बर्खास्तगी का फैसला भविष्य में दिल्ली विश्वविद्यालय, अन्य कॉलेजों या सरकारी सेवाओं में पदों के लिए आवेदन करने में अयोग्यता नहीं माना जाएगा।
विज्ञापन
इस कार्रवाई के विरोध में नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एनडीटीएफ) ने शिक्षक के अधिकारों, गरिमा और निष्पक्ष प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि शिक्षकों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस, निलंबन या सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई निर्धारित नियमों और निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए।