दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय में बने तहखाने के बंदीगृह के दरवाजे भगत सिंह के शहीदी दिवस पर स्कूली छात्रों के लिए खोले गए। उन्हें बुधवार को बंदीगृह की यात्रा कराई गई। इस पूरी कवायद का मकसद शहीदों से जुड़े इतिहास से बच्चों को रूबरू कराना था। वॉयस रीगल लॉज (कुलपति कार्यालय) भविष्य में आम जनता के लिए भी खोला जाएगा। बता दें कि कुलपति कार्यालय के इसी तहखाने में शहीद भगत सिंह को फांसी देने से पहले बंदी बनाकर रखा गया था।
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यही वो जगह है जहां फांसी से पहले रखे गए थे भगत सिंह
- फोटो : अमर उजाला
भ्रमण के दौरान पुस्तकालय व संग्रहालय में बच्चों खासी रुचि दिखाई। इस कार्यक्रम में लगभग 100 से अधिक स्कूली बच्चे शामिल हुए। जेल में भगत सिंह से जुड़ी किताबें एकत्र करके रखी गई हैं।
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बच्चों के साथ डीयू के वाइस चांसलर ने दी श्रद्धांजलि
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इसके अलावा जेल में चारपाई व तस्वीर को भी रखा गया है। बच्चे यहां क्रांतिकारी नेता शहीद भगत सिंह पर लिखे गए साहित्य से भी रूबरू हुए। कुलपति प्रोफेसर योगेश त्यागी ने शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि देेते हुए स्कूली छात्रों के साथ-साथ घूमकर यहां से जुड़े इतिहास को जाना।
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डीयू वाइस चांसलर
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प्रोफेसर त्यागी ने बताया कि जिस दिन उन्होंने कार्यभार संभाला था, उसी दिन उन्हें किसी ने बताया था कि वे उस इमारत में बैठे हैं, जहां भगत सिंह को बंदी बनाकर रखा गया था।
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शहीद दिवस पर शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की प्रतिमाओं का हुआ अनावरण
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विधानसभा में बुधवार को शहीद दिवस पर भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की प्रतिमा का अनावरण के बाद केजरीवाल ने विजय माल्या के बहाने केंद्र सरकार और किसान आत्महत्या को लेकर पंजाब सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो आजादी भगत सिंह चाहते थे, वो अभी नहीं मिली है।