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नशे और धुएं ने ली थी दोनों युवकों की जान
अरीश रिज़वी/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sun, 16 Nov 2014 12:53 AM IST
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सेक्टर-23 संजयनगर में शुक्रवार रात करीब साढ़े 12 बजे फ्लैट में आग लगने से बंटी (28) और रवि (30) की मौत हो गई थी, जबकि नरेश 70 प्रतिशत जल गया था।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया है कि बंटी और रवि की मौत धुएं से दम घुटने से हुई थी। रवि का शरीर करीब 40 प्रतिशत जल गया था।
पुलिस ने शराब की एक बोतल बरामद की है। पुलिस का मानना है कि इन्होंने शराब पी और जली हुई सिगरेट कमरे में ही फेंक दी, जिससे आग लग गई। नशे में होने के कारण धुंआ फैलने के बाद ये खुद का बचाव भी नहीं कर सके।
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नरेश का दिल्ली जीटीबी अस्पताल में उपचार चल रहा है। उसकी हालत गंभीर है। पोस्टमार्टम के बाद शनिवार शाम परिजन अंतिम संस्कार के लिए दोनों के शवों को मेरठ ले गए।
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रवि के पिता राजबीर शर्मा रिटायर्ड दरोगा हैं। वे परिवार के साथ शास्त्रीनगर मेरठ में रहते हैं। रवि यहां भाई रोहित और दोस्त बंटी के साथ करीब 9 माह से किराए पर रह रहा था। इनका वाटर टैंक सफाई का काम था।
नरेश इनका दोस्त था, जो अक्सर इनकेपास आता था। वह आग बुझाने में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडर लगाने का काम करता था। संजयनगर सेक्टर-23 जे-25 बिल्डिंग में रहते थे।
ये बिल्डिंग पार्षद मनवीर नागर की है, जिसके ग्राउंड फ्लोर पर मंगलम ज्वैलरी शॉप है। प्रथम तल पर केबिल कारोबारी का कार्यालय है। द्वितीय तल पर बने फ्लैट एक कमरे में रवि, रोहित और बंटी रहते थे।
आग लगने की सूचना पर पहुंचे पार्षद और पड़ोसियों ने खिड़की का शीशा तोड़कर झुलसे नरेश को निकालकर अस्पताल पहुंचाया था।
जबकि धुएं के वजह से रवि और बंटी का पता नहीं चल सका था। आग बुझने पर उनकी लाशें फ्लैट में मिली थीं। फायर ब्रिगेड ने आग बुझाई थी।
बच गया रोहित
रोहित भी इसी फ्लैट में रहता था, मगर शुक्रवार रात वह दिल्ली में अपने दोस्त के पास रुक गया था। अगर वह यहां होता तो उसकी भी जान खतरे में होती।
आखिरी दम तक छटपटाते रहे दोनों
एसएचओ अवनीश गौतम ने बताया कि पुलिस जांच में आया है कि आग पहले बिस्तर में लगी फिर कमरे में धुआं फैल गया। उन्होंने बताया कि आग लगने की वजह सिगरेट प्रतीत हो रही है।
हालांकि शार्ट सर्किट के एंगल पर भी जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नशीले पदार्थ का सेवन नहीं आया है। इस पर उनका कहना है कि जलने पर शरीर में मौजूद नशीले पदार्थ की पुष्टि कई बार नहीं हो पाती है।
एसएचओ ने बताया कि आग से बचने के लिए वे छटपटाए भी होंगे, क्योंकि उनके शव अलग-अलग पड़े मिले हैं। रवि का रूम के बाहर और बंटी का कमरे के कोने में। ज्यादा धुआं फैलने की वजह से वे अपने को बचा नहीं सके।
2 दिसंबर की है बंटी की बहन की शादी
बंटी के पिता हरेंद्र मलिक ने बताया कि बंटी उनका इकलौता पुत्र था। उनकी बेटी स्वाति की दो दिसंबर 2014 को शादी है। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं। बंटी ने रात में नौ बजे उनसे बात भी की थी।
शनिवार को उसने मेरठ घर आने की बात कही थी। 13 नवंबर को बंटी की शादी की पहली सालगिरह भी थी। सालगिरह के अगले ही दिन उसकी मौत ने परिवार को तोड़ दिया है। परिवार में कोहराम मचा है।
धुएं से बना कार्बन मोनोऑक्साइड
पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. एके आहलुवालिया ने बताया कि धुएं के चलते कमरे के खिड़की दरवाजे बंद रहने के कारण कार्बन मोनोऑक्साइड बन गया होगा।
इससे दोनों के ब्लड में न्यूरोटॉक्सिन पैदा हो गया होगा, जिससे फेफड़ों की पंपिंग बंद हो जाती है, जो उनकी मौत का कारण बना होगा। अगर कमरे की कोई खिड़की खुली होती तो इस हादसे से बचना संभव था।
ये सावधानी बरतें
बंद कमरे में कोई चीज जलाकर न सोएं
कमरे की खिड़की या रोशनदान खुला रखें
सोते समय कमरे ज्यादातर पावर सप्लाई लाइनों को ऑफ कर दें
मकान की विद्युत सप्लाई सिस्टम की जांच अवश्य कराएं
बेडरूम में स्मॉक अलार्म लगवा लें तो बेहतर