दिल्ली : सर गंगा राम अस्पताल के डॉक्टर का दावा भारत में भी थी सामुदायिक संक्रमण की स्थिति
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सर गंगा राम अस्पताल के सेंटर फॉर चेस्ट सर्जरी के चेयरमैन डॉ. अरविंद कुमार ने दावा किया है कि देश में कुछ समय तक कोरोना वायरस के सामुदायिक संक्रमण की स्थिति थी। यह पॉकेट स्तर तक सीमित था, उदाहरण के लिए मुंबई के धारावी और दिल्ली के कुछ इलाकों में यह स्थिति थी। मैं आईएमए से 100 प्रतिशत सहमत हूं कि भारत में सामुदायिक संक्रमण है।
Community transmission has been there from quite some time. It was localised to pockets, for instance- in Dharavi&several areas of Delhi. I 100% agree with IMA that there is community transmission in India: Dr Arvind Kumar, Chairman,Centre for Chest Surgery,Sir Ganga Ram Hospital pic.twitter.com/dBR1bWkeOR
— ANI (@ANI) July 19, 2020विज्ञापन
कावासाकी सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों को खतरा ज्यादा
कावासाकी सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों को संक्रमित होने पर खतरा बढ़ जाता है। सर गंगा राम अस्पताल के बाल रोग विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉक्टर धीरेंद्र गुप्ता ने कहा कि लगभग 50 फ़ीसदी मामलों में ऐसा हुआ है कि जो बच्चे कोरोना संक्रमित हैं और वह कावासाकी सिंड्रोम से भी पीड़ित हैं तो अन्य मरीजों के मुकाबले उन्हें अधिक खतरा रहता है। कावासाकी बीमारी में रक्त वाहिकाओं में सूजन आ जाती है। यह विशेषकर पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में अधिक पाया जाता है।
पिछले छह महीनों में कई ऐसे मरीज देखने को मिले हैं जिनमें कावासाकी सिंड्रोम के लक्षण पाए गए हैं। इनमें से कुछ मरीज कोरोना पॉजिटिव भी पाए गए थे। डॉक्टर ने कहा कि यह एक उभरती हुई बीमारी का हिस्सा है, जिसे मल्टीसिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम कहा जाता है।
ऐसे मामलों को लंदन और अमेरिका में सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल द्वारा भी दर्ज किया गया है। डॉक्टर ने बताया कि भारत में पहले इसे मुंबई और अब दिल्ली में भी देखा जा रहा है। सर गंगा राम अस्पताल में कावासाकी सिंड्रोम के छह मामले आए हैं। इनमें से चार मरीजों को छुट्टी भी दे दी गई है। फिलहाल दो मरीज आईसीयू में है।
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर के मुताबिक, 6 मामलों में कोरोना और कोरोना संदिग्ध जैसे लक्षण दिखाई दिए हैं। जिनमें रक्त वाहिकाओं में सूजन पाई गई। यानी, ये बच्चे पहले कोरोना से संक्रमित हुए थे और अब कावासाकी सिंड्रोम से पीड़ित हो गए। जो पहले से हुए संक्रमण के चलते गंभीर बन गई है। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा निदेशक एनएन माथुर ने कहा कि इस बीमारी के पीछे अन्य कारण हो सकते हैं।