दिल्ली विधानसभा कमेटी LG को भेजेगी समन, विशेषज्ञों ने कहा ये है कानून के खिलाफ
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दिल्ली सरकार ने शीला सरकार के वक्त हुए कथित घोटालों से जुड़े मामलों में एलजी नजीब जंग समेत एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) चीफ मुकेश मीणा को भी सह आरोपी बनाए जाने की मांग की है। अब दिल्ली विधानसभा की पिटिशन कमिटी ने भी यह निर्णय लिया है कि एलजी के साथ एसीबी चीफ को भी समन किया जाए।
बता दें कि दिल्ली के विधायकों की मांग पर विधानसभा स्पीकर ने कथित घोटालों से जुड़े मामलों को पिटिशन कमिटी को भेजा था। इसके बाद कमिटी की अध्यक्ष और डिप्टी स्पीकर राखी बिड़लान ने बृहस्पतिवार को हुई पहली बैठक में इस बात पर एकमत हो सहमति जताई।
उन्होंने कहा कि ये पांचों मामले काफी गंभीर हैं और एफआईआर दर्ज होने के बाद भी कोई एक्शन नहीं लिया गया। ऐसे में एलजी और एसीबी प्रमुख के साथ ही सभी मामलों से जुड़े जांच अधिकारियों के खिलाफ भी समन किया जाए।
कमिटी ने समन करने का फैसला ले लिया गया है लेकिन इससे पहले वैधानिक सलाह ली जाएगी। गौरतलब है कि बुधवार को आप के 12 विधायक इसी सिलसिले में राजभवन पहुंचे थे और एलजी ने उनसे मिलने से इंकार कर दिया था।
कानून सम्मत नहीं है एलजी को समन
हालांकि पिटिशन कमिटी एलजी को समन भेजने से पहले बैधानिक सलाह लेगी, लेकिन जब हमने कानून के जानकारों से बात की तो उनका कहना है कि एलजी को समन किया जाना उनकी समझ से परे है और अनुचित भी है। जानकारों का कहना है कि सरकार का ऐसा कोई भी कदम एलजी को मिले संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ होगा।
विशेषज्ञों की आम राय है कि दिल्ली एक केंद्र शासित राज्य है और इसमें प्रदेश के प्रमुख उपराज्यपाल ही हैं। चूंकि संविधान के अनुसार एलजी दिल्ली में राष्ट्रपति की ओर से सत्ता संभालता है, ऐसे में वह केवल राष्ट्रपति के प्रति जवाबदेह होता है।
जानकारों के मुताबिक एनसीटी एक्ट में एलजी को मिली छूटों के बारे में साफतौर पर जानकारी नहीं होना उन्हें तलब किए जाने का आधार नहीं बन सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह वही व्यवस्था है जिसके अनुसार राष्ट्रपति को संसद या फिर प्रधानमंत्री द्वारा तलब नहीं किया जा सकता है।