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Delhi : सफदरजंग अस्पताल में हर्निया के गंभीर मरीज बढ़े, जागरूकता के लिए परिसर में कार्यक्रम का आयोजन

Mon, 06 May 2024 02:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 06 May 2024 02:16 AM IST
सार

लक्षण दिखने के बाद लापरवाही से मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे मरीजों की तुरंत सर्जरी करने की जरूरत पड़ती है।

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Delhi: Serious hernia patients increased in Safdarjung Hospital.
सफदरजंग अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सफदरजंग अस्पताल में हर्निया के मामले बढ़ रहे हैं। लक्षण दिखने के बाद लापरवाही से मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे मरीजों की तुरंत सर्जरी करने की जरूरत पड़ती है। अस्पताल के आपातकालीन विभाग में हर दिन ऐसे मरीजों की सर्जरी हो रही है। यहां एक साल में करीब 600 मरीजों की सर्जरी होती है। इन मरीजों की आंतों में रुकावट के कारण परेशानी बढ़ जाती है।

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मरीजों में बढ़ती हर्निया की परेशानी को देखते हुए सर्जरी विभाग ने हर्निया जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान मरीजों के लिए स्क्रीनिंग कैंप भी चलाया गया। इस मौके पर अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर डॉ. वंदना तलवार ने बताया कि अस्पताल में हर्निया के मरीजों को मुफ्त सर्जिकल सुविधाएं मिलती हैं। लक्षण दिखने पर मरीज की जांच की जाती है। पुष्टि होने के बाद अस्पताल में ही सर्जरी की जाती है। यहीं एक मात्र इलाज है।
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हर साल 3000 से अधिक सर्जरी
विभाग की प्रमुख प्रोफेसर डॉ. शिवानी बी परुथी ने कहा कि पेट में सूजन सहित दूसरी दिक्कत दिखे तो तुरंत जांच करवानी चाहिए। यह हर्निया हो सकता है, लेकिन देखा गया है कि लोग अक्सर इसे लेकर लापरवाही करते हैं। यहीं कारण है कि स्थिति गंभीर हो जाती है। अस्पताल के आपातकालीन विभाग में हर साल ऐसे 600 मरीज की सर्जरी होती हैं। वहीं, पेट के पास होने वाले हर्निया के 600 मरीज की सर्जरी एक साल में हुई, जबकि जांघ के पास के हर्निया की 2000 सर्जरी हर साल होती है। उनका कहना है कि हर्निया किसी भी उम्र के मरीज को हो सकता है। इसका इलाज केवल सर्जरी ही है।
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जीवनशैली में बदलाव जरूरी
विभाग के प्रोफेसर डॉ. मेघराज कुन्दन ने कहा कि धूम्रपान, लगातार खांसी, पेशाब के लिए जोर लगाना, कब्ज, बिना सावधानियों के भारी वजन उठाना सहित अन्य पर ध्यान रखकर हर्निया के विकास को रोक सकते हैं। डॉ. कुंदन ने हर्निया की रोकथाम के लिए जीवनशैली में बदलाव की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जागरूकता कार्यक्रम एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया के दिल्ली स्टेट चैप्टर के तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता डीएससी के अध्यक्ष डॉ. पीएस सारंगी और डीएससी के सचिव डॉ. आशीष डे ने की। इस दौरान डॉ. डे ने लोगों को जटिल हर्निया और बिना किसी दर्द के लेप्रोस्कोपिक उपचार के बारे में बताया।

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