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Delhi : कश्मीरी गेट से शिफ्ट हो सकता है बस अड्डा, एलजी ने परिवहन विभाग को योजना बनाने का दिया आदेश
Fri, 09 Aug 2024 06:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 09 Aug 2024 06:10 AM IST
सार
दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने ट्रैफिक व्यवस्था की समीक्षा करते हुए परिवहन आयुक्त को इसे स्थानांतरित करने के लिए योजना तैयार करने का आदेश दिया है।
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कश्मीरी गेट बस अड्डा
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
कश्मीरी गेट स्थित अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) को मध्य दिल्ली से दिल्ली-हरियाणा के बॉर्डर पर नरेला अथवा सिंघु क्षेत्र में शिफ्ट किया जा सकता है। बृहस्पतिवार को दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने ट्रैफिक व्यवस्था की समीक्षा करते हुए परिवहन आयुक्त को इसे स्थानांतरित करने के लिए योजना तैयार करने का आदेश दिया है। इस टर्मिनल में रोज हजारों की संख्या में वाहन आते हैं। यह दिल्ली का सबसे व्यस्त जगहों में से एक है। यहां रोजाना 50 हजार से अधिक लोग सफर करने के लिए आते हैं।
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दरअसल, कुछ माह पूर्व गुरु हनुमान सोसाइटी ऑफ भारत नाम की एक संस्था ने दिल्ली के उपराज्यपाल को सुझाव भेजा था। इसमें कहा गया था कि रिंग रोड स्थित आईएसबीटी कश्मीरी गेट पर भारी भीड़ के कारण हजारों लोगों को असुविधा होती है। कश्मीरी गेट के आसपास हनुमान मंदिर, आवासीय क्षेत्र, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन, उपराज्यपाल आवास, एशिया का सबसे बड़ा मोटर वाहन एक्सेसरीज बाजार, चुनाव आयोग कार्यालय, विश्वविद्यालय व महाविद्यालय, विद्यालय, निगम बोध घाट, चांदनी चौक बाजार, लाल किला, सिविल लाइन्स क्षेत्र सहित महत्वपूर्ण स्थान हैं।
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इस क्षेत्र में हजारों की संख्या में बसें, टैक्सी, ऑटो रिक्शा, निजी वाहनों के कारण अधिकतर समय भयंकर जाम लगता है। इसके कारण लोगों का समय व ईंधन और ऊर्जा नष्ट होती है। साथ ही प्रदूषण बढ़ता है। आपातकालीन वाहनों (पुलिस, रोगी, अग्निशमन, डाक आदि) के आवागमन में बाधा आना, सड़क दुर्घटनाएं होना, अपराध (चोरी, छीना-झपटी, भिक्षावृत्ति, बाल शोषण सहित अन्य) की घटनाएं होती हैं।
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मौजूदा समय में दिल्ली में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में इसे दिल्ली-हरियाणा सीमा पर नरेला अथवा सिंघु क्षेत्र में स्थानांतरित किया जा सकता है। ऐसा होने पर अंतरराज्यीय बसों को दिल्ली के भीतर प्रवेश व यात्रा करने की आवश्यकता नहीं रहेगी। दिल्ली के भीतर आवागमन के लिए जनता परिवहन के स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर सकती है।