हाईकोर्ट की सख्ती: बिना मास्क नहीं भर सकेंगे हवाई उड़ान, 'नो फ्लाई' लिस्ट में डाला जाएगा नाम, जानें अन्य नियम
अदालत का कहना है कि कोरोना महामारी अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है और रह-रहकर सिर उठाती है, ऐसे में एक भी चूक बड़ी परेशानी को न्योता दे सकती है।
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कोरोना के केस की संख्या भारत में भले ही कम हो गई हो लेकिन यह संक्रमण अब भी खतरनाक बना हुआ है और ऐसे में इसके फैलने से परेशानी फिर बढ़ सकती है। यही वजह है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने हवाई यात्राओं के दौरान इसके नियमों से खिलवाड़ करने वालों पर सख्ती दिखाई है। हाईकोर्ट ने कड़े निर्देश देते हुए कहा है कि जो लोग हवाई अड्डों पर और विमान में मास्क न लगाएं या कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन करें उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अदालत का कहना है कि कोरोना महामारी अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है और रह-रहकर सिर उठाती है, ऐसे में एक भी चूक बड़ी परेशानी को न्योता दे सकती है। अदालत ने कहा कि जो लोग कोरोना से जुड़े मास्क व हाथ धोने के नियमों का पालन न करें उनके खिलाफ जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए।
अदालत ने तो यह भी कह दिया कि ऐसे लोगों को ‘नो-फ्लाई’ (उड़ान निषेध) सूची में डाल देना चाहिए। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सख्ती जरूरी है।
एयर होस्टेस से लेकर पायलट व अन्य स्टाफ को मिलें यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई के अधिकार- कोर्ट
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने कहा कि ऐसा कई बार देखा गया है कि गंभीरता से नियमों का पालन नहीं होता, इसलिए यह आवश्यक है कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) समेत अन्य एजेंसियां नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करें।
पीठ ने कहा, 'इसके लिए डीजीसीए को विमानन कंपनियों को अलग से बाध्याकारी निर्देश जारी करना चाहिए, ताकि वे हवाईअड्डों और विमानों में कर्मचारियों, एयर होस्टेस, कप्तान, पायलट व अन्य स्टाफ को उन यात्रियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का अधिकार प्रदान करें, जो मास्क लगाने तथा हाथ धोने से जुड़े नियमों का उल्लंघन करते मिलते हैं।'
अदालत ने डीजीसीए की वकील अंजना गोसाईं की इस दलील का संज्ञान लिया कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 10 मई को एक अन्य आदेश जारी कर कोविड-19 से बचाव के नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा था। गोसाईं खुद कोविड-19 से संक्रमित हैं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई में शामिल हुईं।
उन्होंने कहा कि हवाईअड्डों और विमानों में मास्क से जुड़े नियमों पर कड़ाई से अमल करवाया जा रहा है। पीठ ने कहा, उक्त आदेश सही दिशा में उठाया गया कदम है, क्योंकि महामारी अभी समाप्त नहीं हुई है और रह-रहकर सिर उठा रही है।
अदालत ने कहा कि दिशा-निर्देश पहले से हैं और उनका अनुपालन ठीक तरीके से नहीं हो रहा है, जो असल समस्या है। पीठ ने कहा कि दिशा-निर्देशों पर अमल के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं और मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 जुलाई की तारीख तय की।
अदालत ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर दिया, जो उच्च न्यायालय के एक वर्तमान न्यायाधीश के अनुभव के आधार पर दायर की गई थी। न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने हवाईअड्डे से विमान में जाते यात्रियों को मास्क नहीं लगाए देखा था, जिसके बाद उन्होंने आठ मार्च 2021 को स्थिति का स्वतः संज्ञान लिया था।
दिव्यांग की तबीयत बिगड़े तो डॉक्टरी सलाह से ही फैसला लें एयरलाइंस
दिव्यांगों की यात्रा को लेकर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने नियमों का मसौदा जारी किया है, जिसमें कहा गया कि अगर ऐसे किसी यात्री की तबीयत बिगड़ती है तो हवाई अड्डे पर मौजूद डॉक्टर से सलाह के बाद ही विमानन कंपनियां फैसला लें। हाल ही में डीजीसीए ने इंडिगो के स्टाफ द्वारा 7 मई को रांची हवाई अड्डे पर यात्रा से रोकने के कारण कंपनी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। डीजीएसी ने लोगों से 2 जुलाई तक इस मसौदे पर प्रतिक्रियाएं मांगी हैं, जिसके बाद अंतिम नियमावली जारी की जाएगी।