कोर्ट ने रोहित को दिया एनडी के पुत्र का कानूनी दर्जा
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पितृत्व विवाद मामले में आखिर दिल्ली निवासी रोहित शेखर ने सात वर्ष चली कानूनी लड़ाई जीत ली।
हाईकोर्ट ने समाचार पत्रों में तिवारी के साक्षात्कार के आधार पर रोहित को उनका कानूनी रूप से पुत्र घोषित करते हुए डिक्री प्रदान कर दी। अदालत के फैसले के समय तिवारी या उनके वकील पेश नहीं हुए।
हाईकोर्ट 27 जुलाई 2012 को हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एनडी तिवारी के डीएनए रिपोर्ट के आधार पर पहले ही रोहित को तिवारी का जैविक पुत्र घोषित कर चुकी है। अदालत ने कहा था कि उज्जवला शर्मा ही रोहित की जैविक माता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर फैसला
न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान मंगलवार को पुन: तिवारी या उनके वकील पेश नहीं हुए।
वहीं रोहित के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष राष्टीय समाचार पत्र पेश करते हुए बताया कि तिवारी ने तीन मार्च को सार्वजनिक रूप से रोहित को अपना पुत्र स्वीकार किया है। उन्होंने कहा इसी आधार पर रोहित को तिवारी के पुत्र के रूप में डिक्री प्रदान की जाए।
अदालत ने समाचार पत्रों में प्रकाशिक तिवारी के साक्षात्कार व फोटो को देखने के बाद कहा कि स्पष्ट है कि तिवारी ने अपने निवास पर उज्जवला व रोहित को बुलाकर मीडिया के समक्ष सार्वजनिक रूप से रोहित को अपना पुत्र घोषित किया है। इस संबंध में लगातार तिवारी, उज्जवला व रोहित के फोटो व समाचार प्रकाशित हुए है।
डीएनए रिपोर्ट को दी थी चुनौती
अदालत ने कहा कि निर्वाद रूप से स्पष्ट है कि रोहित ही तिवारी के पुत्र है और अब इसमें कोई संदेह नहीं है। इसलिए वे रोहित को तिवारी के कानूनी रूप से पुत्र होने की डिक्री प्रदान कर रहे है।
उन्होंने कहा कि अब यदि कोई रोहित को तिवारी का पुत्र स्वीकार नहीं करता तो यह अदालत के आदेश की अवमानना होगी। रोहित ने वर्ष 2008 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। एनडी तिवारी ने रोहित को पुत्र मानने से इंकार करते हुए कहा कि यह उनके राजनीति विरोधियों का षडयंत्र है।
इसके बाद काफी प्रयासों के बाद तिवारी का डीएनए टेस्ट हो पाया जिससे साबित हो गया कि रोहित उनका जैविक पुत्र है। तिवारी ने डीएनए रिपोर्ट को चुनौती दी। आखिर तीन मार्च को अचानक नए घटनाक्रम के तहत तिवारी ने रोहित को सार्वजनिक रूप से पुत्र स्वीकार कर लिया। बावजूद इससे सोमवार को सुनवाई के दौरान तिवारी व उनके वकील पेश नहीं थे।
'एनडी की जान को खतरा'
पितृत्व विवाद मामले में फैसला सुनते ही रोहित शेखर व उज्जवला शर्मा के चेहरे पर राहत नजर आई जो पिछले सात वर्ष से सुनवाई टलने पर मुरझा से जाते थे।
उज्जवला शर्मा ने कहा कि लंबी कानूनी लड़ाई काफी कष्टदायी रही है लेकिन तिवारी जी ने रोहित को पुत्र मान लिया था अब तो मात्र कानूनी औपचारिकता ही रह गई थी। उन्होंने तिवारी की जान को खतरा बताते हुए कहा कि कुछ लोग इस तथ्य को स्वीकार नहीं करना चाहते और तिवारी के दुश्मन बन गए है।
फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उज्जवला शर्मा ने कहा यह सच्चाई की जीत है। आज के फैसले से पहले ही तिवारी जी ने रोहित को पुत्र स्वीकार कर लिया था और पिता-पुत्र का विवाद था काफी सरल तरीके से निपट गया था। उज्जवला ने कहा कि इन्हीं लोगों ने कुछ दिन पहले मेरा सामान बाहर फेंक दिया व तिवारी जी बीमारी के कारण मौन रहे।