Delhi: जलभराव रोकने के लिए रेखा सरकार तैयार, तकनीकी समाधान पर दे रहे जोर; 335 जलभराव स्थलों को चिह्नित किया
सरकार का सभी सिविक एजेंसियों को निर्देश हैं कि जलभराव जैसी समस्याओं से निपटने के लिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी के तहत सात अति-संवेदनशील जलभराव स्थलों की सीधी निगरानी अब पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव और इंजीनियर-इन-चीफ करेंगे।
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दिल्ली सरकार ने इस बार मानसून के दौरान राजधानी में जलभराव की समस्या को लेकर पूरी सतर्कता बरती है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के संयुक्त प्रयास से शहर भर में 335 जलभराव स्थलों को चिह्नित किया गया है। सरकार का दावा है कि इनमें से 283 स्थलों पर शॉर्ट टर्म समाधान देने वाले काम पूरे हो गए हैं, जबकि 52 स्थानों पर दीर्घकालिक प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं।
सरकार का सभी सिविक एजेंसियों को निर्देश हैं कि जलभराव जैसी समस्याओं से निपटने के लिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी के तहत सात अति-संवेदनशील जलभराव स्थलों की सीधी निगरानी अब पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव और इंजीनियर-इन-चीफ करेंगे। इन स्थानों पर निगरानी की व्यवस्था चौबीसों घंटे रहेगी और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत सभी 335 जलभराव स्थलों पर नोडल अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है। कार्यों की प्रभावी निगरानी के लिए फील्ड स्तर से लेकर शीर्ष स्तर तक जिम्मेदारी तय की गई है।
तकनीकी तरीकों पर ध्यान
जमीनी स्तर नालों की गहन सफाई, ड्रेनेज सिस्टम की मरम्मत व पुनर्निर्माण, सड़क किनारे जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने और गड्ढों की मरम्मत के साथ तकनीक को भी इसमें जोड़ा गया है। जल भराव वाले प्वाइंट पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इससे इन प्वाइंट की केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से 24 घंटे बेहद माइक्रो स्तर पर निगरानी होगी। रियल टाइम मॉनीटरिंग होने से सरकार को पल-पल की जानकारी मिल सकेगी।
नहीं दोहराई जाएगी जलभराव की पुरानी तस्वीर...
सरकार का दावा है कि इस बार मानसून के दौरान शहर के किसी भी हिस्से में जलभराव की पुरानी तस्वीर नहीं दोहराई जाएगी। इसके लिए सभी अधिकारियों की जवाबदेही मुख्यमंत्री ने तय कर रखी है। जरूरत पड़ने पर व्यक्तिगत कार्रवाई भी की होगी।
ट्रैफिक पुलिस और पीडब्ल्यूडी में तालमेल
जलभराव रोकने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और पीडब्ल्यूडी साथ मिलकर काम करेंगे। इसमें ऐसे स्थलों पर पंपिंग सेट, फॉगिंग मशीन और अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती भी की गई है, जहां पानी जमा होने की आशंका है। इसके साथ ही, दिल्ली सरकार ने नागरिकों को भी मानसून संबंधी जानकारी और सहयोग के लिए विशेष हेल्पलाइन और मोबाइल एप के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा दी है। सरकार की ओर से कहा गया है कि प्रत्येक शिकायत का समाधान त्वरित और जिम्मेदाराना ढंग से किया जाएगा।
इससे प्रमुख मार्गों, चौराहों और अंडरपास जैसे अति आवश्यक ट्रैफिक प्वाइंट्स पर जलभराव से यातायात प्रभावित न हो।
ड्रेनेज साफ करने के बाद मलबा भी उसी समय हटाना होना होगा। बारिश से 15 दिन पहले काम करने की बजाय मानसून आने और उसके बाद का जो समय बचता है, उसमें काम किया जाए। यमुना, नालों और सड़क पर कूड़ा डालने से लोगों को रोकना होगा, इसके लिए सख्त कानून बनाना जरूरी है। नाला या नालियों से निकला मलबा बारिश के समय दोबारा नालियों व नालों में बह जाता है। इसके अलावा लोग कूड़ा फेंक देते हैं। इसके चलते नालियां अवरुद्ध हो जाती है। - विशेषज्ञ सोहेल हाशमी
जलभराव की समस्या केवल दिल्ली में ही नहीं, बल्कि हर शहर का यही हाल है। इसकी मुख्य वजह दिल्ली में कंक्रीटीकरण और शहरीकरण है। इसके चलते थोड़ी सी बारिश होने पर ही सड़कों व गड्ढों में जलभराव हो जाता है। दिल्ली में बारिश के पानी की निकासी की 22 ड्रेन है, जिसमें बारिश के पानी के अलावा भी अन्य अपशिष्ट जल भर जाता है। इससे बचने के लिए और अधिक जल निकाय और हरित क्षेत्र बढ़ाने की जरूरत है। - सुष्मिता सेनगुप्ता, सीनियर प्रोग्राम मैनेजर, सीएसई