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दिल्ली: टैक्सी बोट के संचालन में दिल्ली एयरपोर्ट ने कीर्तिमान रचा
Fri, 07 May 2021 02:53 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Fri, 07 May 2021 02:53 PM IST
सार
- एक हजार विमानों की टर्मिनल गेट से पार्किंग बे तक टैक्सी बोट से पहुंचाने में अव्वल
- 532 टन कार्बन का उत्सर्जन कम हुआ तो 214000 लीटर एयर टर्बाईन फ्यूल
- दिल्ली एयरपोर्ट 2030 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन वाला क्षेत्र बन जाएगा
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Delhi Airport
विस्तार
विमान ईंधन की बचत और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट टैक्सी बोट अब विश्व में अपनी पहचान बना लिया है। दिल्ली एयरपोर्ट विश्व का पहला एयरपोर्ट बन गया है जहां एक हजार टैक्सी बोट ने फेरा लगाया है। इससे टर्मिनल गेट से विमान को खड़ा करने के लिए पार्किग बे पर आसानी से ले जाया जाता है।
दो साल पहले इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर टैक्सी बोट विश्व के एयरपोर्ट में सबसे अधिक संख्या वाला हो गया है। रनवे तक ले जाने के लिए इसे इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान विमान का इंजन बंद रहता है। अत्याधुनिक तकनीक से बनी इस टैक्सी बोट में अन्य सुविधाएं भी है। जिसमें विमान को बेहतर तरीके से खड़ा करने में मदद मिलती है।
दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) ने दावा किया है कि सबसे आकि संख्या में टैक्सी बोट का प्रयोग करने वाला विश्व का पहला एयरपोर्ट बन गया है। इससे कार्बन का उत्सर्जन काफी कम होने लगा है। 532 टन कार्बन का उत्सर्जन टैक्सी बोट की वजह से हुआ है। 214000 लीटर एयर टर्बाईन फ्यूल के खर्च में भी कमी आई है। दिल्ली एयरपोर्ट 2030 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन वाला क्षेत्र बन जाएगा। वर्तमान में अन्य एयरपोर्ट से आने पर यात्रियों को उतारकर पायलट विमान को पार्किंग वे पर ले जाते हैं। इस दौरान विमान का इंजन चालू रहता है। इसमें काफी ईंधन की खपत होती है। वहीं, ईंधन जलने से वातावरण में भारी मात्र में कार्बन का उत्सर्जन भी होता है।
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दो साल पहले इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर टैक्सी बोट विश्व के एयरपोर्ट में सबसे अधिक संख्या वाला हो गया है। रनवे तक ले जाने के लिए इसे इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान विमान का इंजन बंद रहता है। अत्याधुनिक तकनीक से बनी इस टैक्सी बोट में अन्य सुविधाएं भी है। जिसमें विमान को बेहतर तरीके से खड़ा करने में मदद मिलती है।
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दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) ने दावा किया है कि सबसे आकि संख्या में टैक्सी बोट का प्रयोग करने वाला विश्व का पहला एयरपोर्ट बन गया है। इससे कार्बन का उत्सर्जन काफी कम होने लगा है। 532 टन कार्बन का उत्सर्जन टैक्सी बोट की वजह से हुआ है। 214000 लीटर एयर टर्बाईन फ्यूल के खर्च में भी कमी आई है। दिल्ली एयरपोर्ट 2030 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन वाला क्षेत्र बन जाएगा। वर्तमान में अन्य एयरपोर्ट से आने पर यात्रियों को उतारकर पायलट विमान को पार्किंग वे पर ले जाते हैं। इस दौरान विमान का इंजन चालू रहता है। इसमें काफी ईंधन की खपत होती है। वहीं, ईंधन जलने से वातावरण में भारी मात्र में कार्बन का उत्सर्जन भी होता है।
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