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सिंघु बॉर्डर पर गरजे केजरीवाल, कृषि कानूनों पर केंद्र को दी खुली बहस की चुनौती
Sun, 27 Dec 2020 06:44 PM IST
Mohit Mudgal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mohit Mudgal
Updated Sun, 27 Dec 2020 06:44 PM IST
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल
- फोटो : ANI
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप-मुख्यमंत्री रविवार को सिंघु बॉर्डर के गुरु तेग बहादुर स्मारक पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि हमारे किसान पिछले 32 दिनों से ठंड में सड़कों पर सोने को मजबूर हैं। क्यों? मैं इससे बहुत दुखी हूं कि यहां 40 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। मैं केंद्र सरकार से अपील करता हूं कि किसानों की बात सुने और तीनों कृषि कानूनों को वापस ले।
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केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार और उनके बड़े-बड़े नेता कानूनों के लाभ के बारे में बात नहीं कर रहे हैं, वे सभी कह रहे हैं कि इससे कोई नुकसान नहीं होगा। यह किसानों की जमीन या न्यूनतम समर्थन मूल्य को नहीं छीनेगा, क्या ये लाभ हैं? फिर आप इन कानूनों को क्यों लाए? इन्हें फाड़ कर फेंक दीजिए।Delhi CM Arvind Kejriwal & Dy CM Manish Sisodia visit Guru Tegh Bahadur Memorial at Singhu. pic.twitter.com/5atmnBTmaH
— ANI (@ANI) December 27, 2020विज्ञापन
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उन्होंने कहा कि किसानों को राष्ट्रद्रोही कहा जा रहा है, अगर किसान राष्ट्रद्रोही हो गया तो तुम्हारा पेट कौन भरेगा? किसानों की खेती चली गई तो किसान कहां जाएगा? किसानों के पास क्या बचेगा? केंद्र सरकार आरोप लगा रही है कि किसानों को गुमराह किया जा रहा है। मैं केंद्र सरकार को चुनौती देता हूं, केंद्र सरकार अपने सबसे बड़े नेता को लेकर आ जाए और हमारे किसान नेता आ जाएं और पब्लिक में चर्चा हो जाए, पता चल जाएगा किसको कितनी जानकारी है।
केजरीवाल ने कहा कि ये तीन कानून लेकर आए हैं, इन तीनों कानूनों के जरिए अब ये किसानों की खेती भी छीनना चाहते हैं। उनकी खेती भी उठाकर अपने 2-3 बड़े-बड़े पूंजीपति दोस्तों को देना चाहते हैं। अगर किसान की खेती भी चली गई तो किसान कहां जाएगा।
वहीं, दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री किसानों को होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए 24 घंटे काम कर रहे हैं। सभी के दबाव के बावजूद, स्टेडियम जेल में परिवर्तित नहीं हुए। अगर हमने ऐसा किया होता को ये इतिहास में काला धब्बा होता।