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Delhi: कैग रिपोर्ट में खुला यमुना की दुर्दशा का कच्चा चिट्ठा, जल मंत्री बोले- सुधार के लिए शुरू हो चुका है काम

Sat, 28 Mar 2026 01:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 28 Mar 2026 01:51 AM IST
सार

विधानसभा में रिपोर्ट पर चर्चा के बाद सरकार ने सुधार के लिए एक्शन मोड में आने का दावा किया है।
 

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Delhi: CAG Report Exposes the Grim Reality of the Yamuna's Plight
प्रवेश साहिब सिंह - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पिछली आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान दिल्ली जल बोर्ड से जुड़ी कैग रिपोर्ट ने यमुना की हालत और शहर के पानी-सीवर सिस्टम की खामियों को उजागर किया है। विधानसभा में रिपोर्ट पर चर्चा के बाद सरकार ने सुधार के लिए एक्शन मोड में आने का दावा किया है।

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यमुना की खराब हालत और पानी-सीवर व्यवस्था की कमजोरियों को लेकर कैग रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 200 एमजीडी से ज्यादा बिना ट्रीटमेंट का सीवेज सीधे यमुना में जा रहा है, जबकि 1000 से अधिक कॉलोनियां अब भी सीवर नेटवर्क से बाहर हैं। इस मुद्दे पर जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने माना कि वर्षों से चली आ रही व्यवस्थागत कमियों के कारण हालात बिगड़े हैं, लेकिन अब सरकार ने सुधार के लिए ठोस और समयबद्ध योजना पर काम शुरू कर दिया है।
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200 एमजीडी पानी अब भी नहीं मिल रहा
मंत्री ने कहा कि दिल्ली को करीब 1200 एमजीडी पानी की जरूरत है, जबकि सप्लाई लगभग 1000 एमजीडी ही हो रही है। इसके अलावा नॉन-रेवेन्यू वाटर लॉस 45 से 53 फीसदी तक पहुंच गया है, जो सिस्टम की बड़ी कमजोरी को दिखाता है। करीब 30 लाख घरों में नियमित जल कनेक्शन नहीं होने से समस्या और बढ़ रही है।
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सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाई जाएगी
मंत्री ने कहा कि यमुना की सफाई का सबसे बड़ा रास्ता बिना ट्रीटमेंट वाले सीवेज को रोकना है। इसके लिए 35 नए और अपग्रेडेड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाएंगे और ट्रीटमेंट क्षमता 1500 एमजीडी तक बढ़ाई जाएगी। नजफगढ़ नाले समेत बड़े नालों का इन-सीटू ट्रीटमेंट भी योजना में शामिल है। उन्होंने दावा किया कि अगले 2 से 2.5 साल में ट्रीटमेंट क्षमता जरूरत से ज्यादा हो जाएगी। सीवर नेटवर्क को लेकर भी सरकार ने बड़ा लक्ष्य रखा है। अभी करीब 20 लाख घर इससे बाहर हैं। सरकार 1799 अनधिकृत कॉलोनियों तक सीवर लाइन पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है। पिछले एक साल में 180 किलोमीटर से ज्यादा नई लाइन बिछाई गई है और 400 से अधिक कॉलोनियों में काम जारी है। सेप्टिक टैंक सिस्टम में गड़बड़ियों को खत्म करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड नई पारदर्शी व्यवस्था ला रहा है। इसमें डिजिटल बुकिंग और अपने टैंकर शामिल होंगे।

जल बोर्ड को 4988 करोड़ का नुकसान
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने भी कैग रिपोर्ट के अहम बिंदु सदन में रखे। उन्होंने बताया कि जल नीति का अभाव, परियोजनाओं में देरी, भूजल प्रबंधन की कमी और करीब 4988 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान जैसे गंभीर मुद्दे सामने आए हैं। अध्यक्ष ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि रिपोर्ट पर तय समय में एक्शन टेकन नोट दें, ताकि संबंधित समितियां जांच शुरू कर सकें।

दिल्ली की तीन यूनिवर्सिटी में बस गिने-चुने छात्र, ऑडिट और एडमिशन सिस्टम फेल

दिल्ली के सरकारी विश्वविद्यालयों की हालत पर कैग रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। कुछ विश्वविद्यालयों की हालत बेहद खराब है। दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी आज भी एक स्कूल की बिल्डिंग में चल रही है, जबकि तीन विश्वविद्यालयों में कुल मिलाकर केवल तीन छात्र ही दाखिल हैं। पिछले साल भी यह संख्या सिर्फ 20 थी। इसी तरह दिल्ली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी सीमित कमरों में चल रही है और वहां पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य को लेकर भी स्पष्टता नहीं है।

विधानसभा में शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि रिपोर्ट से साफ है कि पिछले वर्षों में उच्च शिक्षा व्यवस्था में गंभीर गड़बड़ियां रही हैं। दिल्ली विधानसभा में 2018 से 2023 के बीच विश्वविद्यालयों के कामकाज पर आई कैग रिपोर्ट को लेकर सरकार ने बड़ा खुलासा किया। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने सदन में कहा कि रिपोर्ट ने विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली, नीतियों और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में वित्तीय कुप्रबंधन, मानव संसाधन की कमी और अकादमिक स्तर पर कमजोरियों को साफ तौर पर उजागर किया गया है। कई फैसले बिना योजना के लिए गए, जिनका असर आज भी दिख रहा है। दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि पॉलिटेक्निक संस्थानों को इसमें शामिल तो कर दिया गया, लेकिन इससे छात्रों और शिक्षकों के सामने अनिश्चितता पैदा हो गई। कई जगह छात्र और शिक्षक दोनों विरोध कर रहे हैं।

दिल्ली में एडमिशन सिस्टम रहा भ्रष्ट : कैग रिपोर्ट से पता चला कि 16 साल तक एडमिशन सिस्टम सही तरीके से काम नहीं किया। न स्पष्ट एडमिशन पॉलिसी थी, न माइग्रेशन का सिस्टम। पांच साल तक विश्वविद्यालयों के ऑडिटेड अकाउंट्स भी सदन में पेश नहीं किए गए। इसके अलावा फंड के गलत इस्तेमाल और मनमानी नियुक्तियों के मामले भी सामने आए हैं। एमबीए जैसे कोर्स लंबे समय तक बिना मान्यता के चलते रहे और सिलेबस कई साल तक अपडेट नहीं हुआ। इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस की भी भारी कमी रही। हालांकि, मंत्री ने कहा कि अब स्थिति बदली जा रही है। सरकार ने 2023-25 के बीच 3014 ईडब्ल्यूएस छात्रों को 44 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप दी है। कैंपस टू मार्केट योजना के तहत 100 स्टार्टअप्स को मदद दी गई है और छात्रों को नए अवसर दिए जा रहे हैं।

रिपोर्ट पीएसी को भोजने की सिफारिश : मंत्री ने सदन से अपील की कि इस रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा हो और इसे लोक लेखा समिति (पीएसी) को भेजा जाए, ताकि पूरे मामले की गहराई से जांच हो सके और जिम्मेदारी तय की जा सके। उन्होंने कहा कि पहले शिक्षा में केवल प्रचार हुआ, अब सरकार जमीन पर परिणाम देने पर काम कर रही है।
 

टैक्स वसूली, बाल कल्याण और विश्वविद्यालयों में गड़बड़ियों पर मांगी एटीएन

विधानसभा में कैग की विभिन्न रिपोर्टों पर चर्चा के दौरान कई विभागों में गंभीर कमियां सामने आईं। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि अब जवाबदेही तय करने के लिए सभी रिपोर्टों पर तेजी से कार्रवाई होगी। कैग रिपोर्ट में शीशमहल से जुड़े मुद्दों के अलावा जीएसटी, वैट, स्टाम्प और रजिस्ट्रेशन शुल्क, मोटर वाहन कर और आबकारी की वसूली में गंभीर गड़बड़ियों का जिक्र है। इसके साथ ही सूचना एवं प्रचार, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास और राजस्व विभाग के कामकाज में भी कमियां पाई गई हैं।

 

रिपोर्ट संख्या 3 (वर्ष 2022) में गृह, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, शहरी विकास, पर्यटन और अन्य विभागों में अनियमितताओं को उजागर किया गया है। वहीं रिपोर्ट संख्या 1 (वर्ष 2023) में जरूरतमंद बच्चों की देखभाल से जुड़ी योजनाओं में कमी सामने आई है। इसमें फंड जारी करने में देरी, दत्तक ग्रहण प्रक्रियाओं में लापरवाही और बाल देखभाल संस्थाओं में स्टाफ व सुविधाओं की कमी का जिक्र है।

 

15 साल बाद आई पीएसी रिपोर्ट

अध्यक्ष ने कहा कि इन रिपोर्टों के जरिए साफ है कि कई स्तरों पर सुधार की जरूरत है और अब सरकार इन पर कार्रवाई करेगी। विडंबना देखिए कि सदन में 15 साल बाद लोक लेखा समिति (पीएसी) की कोई रिपोर्टों आई है। पिछली सरकार ने कैग रिपोर्टें सदन में पेश नहीं कीं। इस कारण पीएसी निष्क्रिय हो गई थी, लेकिन अब इसे फिर से सक्रिय किया गया है।

विभाग जल्द जमा करें एटीएन

अध्यक्ष ने कहा कि विभागों ने सुधारात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे तय समय के भीतर अपनी कार्रवाई रिपोर्ट (एटीएन) जमा करें, ताकि जवाबदेही तय हो सके और सुधार की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
 

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