Delhi Election 2020: चांदनी चौक में प्रत्याशी वही, पार्टी नई, दिलचस्प होगा इस बार मुकाबला
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चांदनी चौक सीट दिल्ली के सबसे पुराने विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। चांदनी चौक को दिल्ली की सियासत का प्रमुख केंद्र माना जाता है। 1952 में पहली बार यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार युद्धवीर सिंह ने जीत हासिल की थी। तब से लेकर अब तक यहां से एक-एक बार भाजपा और आप के प्रत्याशी जीत चुके हैं।
वहीं इस सीट से चार बार कांग्रेस के प्रत्याशी विधायक रह चुके हैं। प्रहलाद सिंह साहनी 1998 से 2015 तक 17 साल यहां से विधायक रहे थे। इस बार यहां आठ फरवरी को मतदान होना है। समीकरण बताते हैं कि इस बार चांदनी चौक का चुनाव सबसे अलग होने वाला है। आइए जानते हैं इस बार कैसा होने वाला है चांदनी चौक का चुनाव-
इनमें होगी सीधी टक्कर
| पार्टी | उम्मीदवार 2020 | उम्मीदवार 2015 |
| आप | प्रहलाद सिंह साहनी | अलका लांबा |
| भाजपा | सुमन कुमार गुप्ता | सुमन कुमार गुप्ता |
| कांग्रेस | अलका लांबा | प्रहलाद सिंह साहनी |
चांदनी चौक से आप ने प्रहलाद सिंह साहनी को टिकट दिया है। चार विधानसभा क्षेत्रों से जीत हासिल करने वाले साहनी पिछले दिनों ही कांग्रेस छोड़ कर आम आदमी पार्टी में आए हैं। वहीं आम आदमी का लोकप्रीय चेहरा बन चुकी अलका लांबा ने चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस का हाथ थाम लिया था, जिन्हें यहां से कांग्रेस ने उतारा है।
2015 के चुनाव में भी दोनों प्रत्याशी इसी सीट पर एक दूसरे के सामने खड़े थे, लेकिन पार्टियां अलग थीं। पिछली बार अलका लांबा आप से और प्रहलाद सिंह साहनी ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा था। इस बार फिर इनके बीच टक्कर है, लेकिन फर्क सबसे बड़ा यही है कि दोनों का दल बदल चुका है। वहीं भाजपा के सुमन कुमार गुप्ता पिछली बार भी मैदान में थे और इस बार भी हैं।
2015 विधानसभा चुनाव के नतीजे
| पार्टी | प्रत्याशी | वोट |
| आप | अलका लांबा | 36756 |
| भाजपा | सुमन कुमार गुप्ता | 18469 |
| कांग्रेस | प्रहलाद सिंह | 17,930 |
इस सीट से कुल 1,13,784 मतदाता हैं, जिनमें से 62,723 पुरुष, 51,055 महिला और छह ट्रांसजेंडर वोटर हैं। इसके साथ ही जातिगत आधार पर इलाके में मुस्लिम वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा है। चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र में 20 फीसदी मुस्लिम मतदाता, 17 फीसदी पंजाबी, 15 फीसदी वैश्य, 17 फीसदी एससी, 9 फीसदी ओबीसी, 07 फीसदी सामान्य व अन्य और 03 फीसदी ब्राह्मण मतदाता हैं। वहीं पूर्वांचली सहित अन्य वोटरों की संख्या 12 फीसदी है।